शेयर को लेकर हिमाचल, उत्तराखंड में ठनी
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उत्तराखंड में निर्माणाधीन किसाऊ बांध एक बार फिर विवादों में है। हिमाचल ने इस बिजली प्रोजेक्ट सहित उत्तराखंड के चार अन्य प्रोजेक्टों पर 50 फीसदी हिस्सेदारी मांगी है। उत्तराखंड सरकार ने हिमाचल के प्रस्ताव को सिरे से खारिज कर दिया है।
इस सिलसिले में शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रधान सचिव ने दोनों राज्यों के आला अधिकारियों की बैठक बुलाई है ताकि विवाद को सुलझाया जा सके।
इस बांध के बनने से हिमाचल का बड़ा क्षेत्र जलमग्न हो जाएगा। इसके दायरे में सिरमौर जिले के 100 से ज्यादा छोटे-बड़े गांव आ रहे हैं।
दोनों राज्यों में कांग्रेस, फिर भी विवाद
किसाऊ बांध के तहत पांच प्रोजेक्ट बनने हैं। इसमें से चार प्रोजेक्टों में हिमाचल को 25-25 फीसदी हिस्सेदारी मिलनी है जबकि एक प्रोजेक्ट में 20 फीसदी हिमाचल को शेयर मिलना है। हिमाचल और उत्तराखंड दोनों ही राज्यों में कांग्रेस की सरकारें हैं। इसके बावजूद दोनों राज्यों में बड़ा विवाद खड़ा हो गया है।
प्रदेश प्रधान सचिव ऊना एसकेबीएस नेगी का कहना है कि हिमाचल प्रदेश को किसाऊ बांध में 50 फीसदी हिस्सेदारी मिलनी चाहिए। तभी हिमाचल प्रदेश इस प्रोजेक्ट पर तैयार होगा। ऐसा न होने की स्थिति में हिमाचल सहयोग नहीं करेगा।
वहीं, उत्तराखंड के मुख्य सचिव सुभाष कुमार का कहना है कि हिमाचल को क्या हिस्सेदारी मिलनी चाहिए, यह केंद्र ने तय कर दिया है। इस मामले में केंद्र की ओर से बैठक भी बुलाई गई है, जिसमें उत्तराखंड अपना पक्ष रखेगा। आगे केंद्र जो तय करेगा, उसे उत्तराखंड मानने के लिए तैयार है।