किन्नौर निगुलसरी भूस्खलन: केंद्र से पहुंची टीमें, हादसे के कारणों का किया जा रहा अध्ययन
हिमाचल प्रदेश के ऊपरी क्षेत्रों में पहाड़ों पर लगातार हो रही भूस्खलन की घटनाओं को देखते हुए केंद्र सरकार की विभिन्न एजेंसियां भी हरकत में आ गई हैं।
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किन्नौर जिले के निगुलसरी में मलबे में दबे 28 लोगों के शव बरामद करने के बाद बुधवार को भी सर्च ऑपरेशन चलाया गया। एसडीएम निचार मनमोहन सिंह की अगुवाई में पुलिस और होमगार्ड जवानों की मदद से आठवें दिन भी यह अभियान चलाया गया। हालांकि, सभी शवों को निकाल लिया गया है, लेकिन बिना पहचान वाला व्यक्ति मलबे में न दबा हो, इस बात को ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने सर्च ऑपरेशन जारी रखा।
उधर, हिमाचल प्रदेश के ऊपरी क्षेत्रों में पहाड़ों पर लगातार हो रही भूस्खलन की घटनाओं को देखते हुए केंद्र सरकार की विभिन्न एजेंसियां भी हरकत में आ गई हैं। किन्नौर जिले के निगुलसरी में हुए हादसे के बाद 15 अगस्त को एक टीम ने मौके का निरीक्षण किया। टीम में मिनिस्ट्री ऑफ रोड ट्रांसपोर्ट एंड हाईवे, डीआरडीओ, मिनिस्ट्री ऑफ माइंड, आरओ मिनिस्ट्री, नेशनल हाइवे के अधिकारी शामिल रहे। टीम ने घटनास्थल पर मौके का किया मुआयना, जिससे भविष्य में हादसों को रोकने के लिए उचित कदम उठाए जाएं।
उधर, अधिशासी अभियंता नेशनल हाईवे केएल सुमन ने बताया कि मुख्य अभियंता मिनिस्ट्री ऑफ रोड ट्रांसपोर्ट एंड हाईवे एडीआरडीओ के वैज्ञानिक, आरओ मिनिस्ट्री, मिनिस्ट्री ऑफ माइंड, चीफ इंजीनियर नेशनल हाईवे ने दुर्घटना स्थल का पिछले दिनों निरीक्षण किया है। उनका मुख्य उद्देश्य पहाड़ों पर चट्टानों के गिरने के कारणों का पता लगाना था। भविष्य में ऐसे हादसे रोकने के लिए क्या उपाय हो सकते हैं, इस बारे में कौन सी तकनीक अपनाई जा सकती है, इसको लेकर भी अध्ययन किया गया।
अध्ययन के बाद वैज्ञानिक अपनी रिपोर्ट सौंपेंगे। उधर, एसडीएम निचार मनमोहन सिंह ने बताया कि बुधवार को भी पुलिस और होमगार्ड जवानों की टीम ने सर्च अभियान चलाया, लेकिन कुछ नहीं मिला। वीरवार को अंतिम बार सर्च अभियान चलाया जाएगा। उन्होंने कहा कि 15 अगस्त को भूवैज्ञानिकों की टीम ने घटनास्थल का निरीक्षण किया। भू वैज्ञानिक की टीम जल्द प्रशासन को रिपोर्ट सौंपेगी।