अंतिम यात्रा: ढोल-नगाड़ों के साथ विदा किए राजा, उल्टा बजा बाजा, महिलाओं ने गाए शोक गीत
प्राचीन बुशहर रियासत चार ठहरियों से आए आए बजंतरियों ने सुबह छह बजे से ही पारंपरिक वाद्य यंत्र बजाने शुरू कर दिए। शनिवार सुबह करीब सात बजे राजगद्दी कक्ष में वीरभद्र के बेटे विक्रमादित्य सिंह का राज्याभिषेक हुआ। राज्याभिषेक के वक्त सीधा बाजा बजाना शुरू किया गया तो बाद में जब राजा वीरभद्र सिंह की विदाई की रस्में हुई तो उल्टा बाजा बजा।
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हिमाचल प्रदेश के लोकप्रिय नेता वीरभद्र सिंह को अंतिम विदाई देने के लिए उनके पैतृक राजमहल पद्म पैलेस में लोगों का हुजूम उमड़ आया। लोग कहते सुने गए कि इतनी भीड़ तो कभी फाग मेले में भी नहीं देखी। फाग मेला भी हर साल इसी परिसर में होली से एक दिन पहले आयोजित किया जाता है। सुबह पांच बजे से ही पद्म पैलेस में लोगों की भीड़ जुटनी शुरू हो गई। प्राचीन बुशहर रियासत चार ठहरियों से आए आए बजंतरियों ने सुबह छह बजे से ही पारंपरिक वाद्य यंत्र बजाने शुरू कर दिए। शनिवार सुबह करीब सात बजे राजगद्दी कक्ष में वीरभद्र के बेटे विक्रमादित्य सिंह का राज्याभिषेक हुआ।
राज्याभिषेक के वक्त सीधा बाजा बजाना शुरू किया गया तो बाद में जब राजा वीरभद्र सिंह की विदाई की रस्में हुई तो उल्टा बाजा बजा। महिलाओं ने शोक गीत गाए। साढ़े दस बजे सराहन से आया जनसमूह राजा साहब अमर रहे के नारे लगाता हुआ पद्म परिसर में दाखिल हुआ। इस दौरान भावुक लोग राजा साहब अमर रहे के नारे लगाते हुए दर्शन के लिए लगी कतारों को तोड़कर पद्म पैलेस में प्रवेश करने लगे। सुरक्षाकर्मियों के लिए व्यवस्था बनाना मुश्किल हो गया।
सवा 11 बजे विक्रमादित्य पद्म महल की ऊपरी मंजिल में खिड़की के पास आए और हाथ जोड़कर लोगों का अभिवादन करते रहे। साढ़े 12 बजे छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, पूर्व रेल मंत्री पवन बंसल, कांग्रेस के राज्य प्रभारी राजीव शुक्ला और कांग्रेस नेता आनंद शर्मा तो पहुंचे तो सुरक्षाकर्मी एकाएक भीड़ को तितर-बितर करने लगे। राजतिलक के बाद जब वीरभद्र सिंह की पार्थिव देह महल से बाहर लाई जाने लगी तो पूरा परिसर राजा नहीं फकीर थे हिमाचल की तकदीर थे जयघोष से गूंज उठा। करीब तीन बजे पद्म पैलेस से वीरभद्र सिंह की अंतिम यात्रा जोबनीबाग स्थित शाही श्मशानघाट के लिए रवाना हुई।
इसके बाद हजारों लोगों को सैलाब पद्म पैलेस के गेट से बाहर राष्ट्रीय राजमार्ग-पांच की ओर निकला और सतलुज नदी के किनारे की ओर बढ़ चला। इससे करीब एक किलोमीटर तक सड़क लोगों से खचाखच भरी रही। जोगनीबाग में यह राजसी शवयात्रा तीन बजकर पैंतीस मिनट पर पहुंची। पहले गार्ड ऑनर हुआ। फिर शय्या पूजन के बाद चार बजकर दस मिनट पर विक्रमादित्य सिंह ने अपने पिता को मुखाग्नि दी। इसके बाद वीरभद्र की पार्थिव देह पंचतत्व में मिल गई। इस दौरान कुल्लू जिला में सामने दिखाई देने वाली पहाड़ी में वजीर बावड़ी सड़क में वाहन रुक गए। लोग सतलुज पार सड़क में खड़े हो गए और वहां से नम आंखों से वीरभद्र सिंह के अंतिम संस्कार के साक्षी बने।
राजा साहब को याद कर रोने मुस्लिम दर्जी रियासत अली
अपने राजा साहब को याद कर रामपुर में सिलाई करने वाले मुस्लिम दर्जी रियासत अली रोने लगे। अली बोले - राजा साहब जब भी रामपुर आते थे तो उनके कपड़े वही प्रेस करते थे। बीस साल पहले परिवार पालने के लिए उन्हें बाजार में अड्डा भी राजा साहब ने ही दिया था। शुक्रवार रात भी तीन घंटे इंतजार में रहा, लेकिन दर्शन नहीं हो पाए। शनिवार सुबह छह बजे दर्शन के लिए पहुंचा, फिर कहीं जाकर अंतिम दर्शन कर पाया। राजा साहब उनसे गले लगाकर बात करते थे।
11 कारीगरों ने 36 घंटे में तैयार किया गरुड़ स्वरूप पुष्प यान
अंतिम विदाई के लिए पुष्प यान 11 राजमिस्त्रियों ने 36 घंटे की कड़ी मेहनत से तैयार किया। पुष्प यान यहां मृत्यु शैय्या को कहते हैं। 12 मुखी पुष्पयान को गरुड़ का स्वरूप माना जाता है। गरुड़ विष्णु की सवारी होता है। चूंकि, राजा को विष्णु स्वरूप माना जाता है तो मान्यता है कि यह यान वैकुंठ यात्रा के लिए रवाना होता है। इस पुष्पयान के चारों कोनों में चांदी के चार छत्र लगाए गए थे। अर्थी के ऊपर का पकड़ा भी राज दर्जियों ने महल परिसर में तैयार किया।
सांगला घाटी के कामरू से ब्रह्मकमल लाईं महिलाएं
बुशहर रियायत की प्राचीन राजधानी किन्नौर की सांगला घाटी के कामरू से महिलाएं दुर्लभ ब्रह्मकमल लेकर आईं, जिन्हें अंतिम यात्रा से पहले उनकी पार्थिव देह पर चढ़ाया। घाघरो वस्त्र और उमालंग माला भी अर्पित की।
महिलाओं ने गाए शोक गीत, बोलीं - पता नहीं महल से बुलावा आएगा या नहीं
वीरभद्र की अंतिम यात्रा से पहले महल के प्रांगण में बने मच मछखंडी चबूतरे पर महिलाएं नम आंखों के साथ शोक गीत गाने लगीं। महिलाओं का कहना था कि जब भी वीरभद्र सिंह महल में आते थे तो इलाके की महिलाओं को खास तौर पर मुलाकात के लिए बुलावा भेजा जाता था। आज वीरभद्र सिंह अंतिम यात्रा पर जा रहे हैं, पता नहीं अब महल से बुलावा आएगा भी या नहीं।
राजमाता की बगल में हुआ वीरभद्र सिंह का दाह संस्कार
पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह का रामपुर स्थित जोबनी बाग के शाही श्मशानघाट में दोपहर बाद अंतिम संस्कार किया गया। पुत्र विक्रमादित्य सिंह ने उनको मुखाग्रि दी। वीरभद्र सिंह का दाह संस्कार राजमाता शांति देवी के साथ लगती जमीन पर किया गया। इससे पूर्व राजसी परंपरा और विधि विधान के साथ राज पुरोहितों ने सभी परंपराओं का निर्वहन किया। दाह संस्कार में करीब 25 किलोग्राम घी और कई किलो मेवा इस्तेमाल में लाया गया। उनकी अंत्येष्टि में चंदन, शूर और सामान्य लकड़ी का इस्तेमाल किया गया।
गौर हो कि जोबनी बाग स्थित श्मशान घाट में राज परिवार के किसी भी सदस्य का निधन होने पर उनके दाह संस्कार के लिए अलग से स्थान सुनिश्चित है। यहां अब तक राजपरिवार के हिस्सा रह चुके पूर्वजों के स्मारक शीला लेख में दर्ज है, जबकि उनकी मृत्यु का समय और तारीख भी यहां अंकित की गई हैं। दिल को छूने वाले इस मंजर के साक्षी विभिन्न राजनीतिक हस्तियों सहित हजारों लोग बने। लोगों की बढ़ती संख्या के आगे श्मशानघाट की भूमि भी कम पड़ गई। दिवंगत नेता को श्रद्धांजलि देने क्या बच्चा, क्या बूढ़ा सभी भारी संख्या में पहुंचे। बुशहर रियासत के 122वें राजा को हजारों लोगों ने नम आंखों से विदाई दी। सभी ने उनकी आत्मा की शांति की प्रार्थना की।