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फिल्मों में कश्मीर को अपना दिखाया पर कश्मीरियों को नहीं: शर्मिला टैगोर
Sun, 13 Oct 2019 11:38 AM IST
Krishan Singh
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कसौली (सोलन)
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कसौली (सोलन)
Published by: Krishan Singh
Updated Sun, 13 Oct 2019 11:38 AM IST
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शर्मिला टैगोर
- फोटो : अमर उजाला
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खुशवंत सिंह लिटफेस्ट में भाग लेने पहुंचीं अपने जमाने की मशहूर अभिनेत्री व सेंसर बोर्ड की सदस्य रह चुकीं शर्मिला टैगोर ने कहा कि भारतीय फिल्मों में कश्मीर को अक्सर अपनी जमीन बताया जाता रहा है। लेकिन किसी ने कश्मीरियों को कभी अपना नहीं दिखाया यह बहुत दुखद रहा है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान में बहुत अच्छे कलाकार हैं।
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भारतीय कलाकार उनके साथ एक मंच पर देश के बाहर फिल्में बना सकते हैं। भारतीय सिनेमा में 60 वर्ष पूरे कर चुकीं शर्मिला टैगोर ने अपने सभी यादगार पलों को श्रोताओं के साथ साझा किया। उन्होंने कहा कि जब उन्हें फिल्म में काम करने का ऑफर आया था तो उस जमाने में महिलाओं का किसी भी क्षेत्र में काम करना निंदनीय माना जाता था।
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लेकिन उन्होंने सभी बाधाओं को पार कर फिल्मों में अपना करियर चुना। शर्मिला ने बताया कि अपनी पहली बंगाली फिल्म के लिए उन्हें स्कूल को भी अलविदा कहना पड़ा था जो उनके लिए कठिन निर्णय रहा। हालांकि फिल्म की सफलता के बाद उन्होंने फिल्मों के साथ पढ़ाई दोबारा शुरू कर दी। शर्मिला ने बताया कि सात साल तक सेंसर बोर्ड की सदस्य रहते हुए कई अहम फैसलों में अपनी भूमिका बखूभी निभाई।
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जिसमें मुख्यत: समलैंगिक फिल्में व विशेष क्षेत्रों पर आधारित विवादित फिल्मों को बैन किया। ताकि जनता में गलत संदेश न जाए। उन्होंने कहा कि सेंसर बोर्ड सही नाम न होकर सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेट है। शर्मिला ने आराधना, अविष्कार, कश्मीर की कली, इवनिंग इन पेरिस, तेरे मेरे सपने, हाथी मेरे साथी जैसी मशहूर फिल्में की हैं।