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जान पर खेली ये गरीब मां, अब बच्चे लड़ रहे हैं मौत से जंग

Fri, 20 Jan 2017 10:00 AM IST
कमलेश रतन भारद्वाज/अमर उजाला, मंडी
कमलेश रतन भारद्वाज/अमर उजाला, मंडी Updated Fri, 20 Jan 2017 10:00 AM IST
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Kamla Devi Need Help For Treatment of Her Children.

हिमाचल के जिला मंडी की गाड़ागुसैणी की घाट पंचायत के पाली गांव निवासी कमला देवी के 10 दिन के नवजात बर्फ और गरीबी से तो जंग जीत गए, लेकिन लचर स्वास्थ्य सुविधाओं के कारण जिंदगी और मौत के बीच झूल रहे हैं।

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ढाई से तीन फीट बर्फ में 25 किमी पैदल चलकर को अस्पताल पहुंचाने वाली कमला देवी के जुड़वां बच्चे उधारी के इलाज से सांस ले रहे हैं। परिवार रिश्तेदारों से पैसे उधार लेकर निजी अस्पताल में बच्चों का इलाज करवा रहा है।
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अभी तक 15 हजार रुपये खर्च हो चुके हैं। यह खर्च महज रहन-सहन का है। अभी निजी अस्पताल के इलाज का बिल आना बाकी है। कमला देवी का परिवार बीपीएल से संबंध रखता है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत निशुल्क चिकित्सा सुविधाओं का फायदा परिवार को नहीं मिल रहा है।
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परिवार लगभग ढाई साल पहले बीपीएल में लिया है। बावजूद इसके सरकार परिवार को राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन से नहीं जोड़ पाई है।

4 फीट बर्फ में 25 किलो चली मां, सरकार से मांगी मदद

Kamla Devi Need Help For Treatment of Her Children.

गत मंगलवार को कमला देवी और उनके पति बेली राम ने 25 किमी बर्फ में पैदल चलकर बच्चों को इलाज के लिए बंजार पहुंचाया। यहां से चिकित्सकों ने इन्हें जोनल अस्पताल मंडी रेफर कर दिया। बेलीराम पत्नी और बच्चों के साथ देर रात मंडी अस्पताल पहुंचे।

यहां चिकित्सकों ने दाखिल करने से पहले ही उन्हें शिमला या आईजीएमसी जाने की सलाह दी। बेली राम ने कहा कि बच्चों की हालत काफी नाजुक थी। इस कारण उन्हें आईजीएमसी और पीजीआई चंडीगढ़ पहुंचाने की बजाय निजी अस्पताल ले गए। चिकित्सक ने बच्चों को आईसीयू में रखा है।

दोनों बच्चे अंडरवेट हैं। बेटी की तबीयत में सुधार है, लेकिन बेटे को सांस लेने में दिक्कत आ रही है। बेलीराम और कमला देवी की पहले दो बेटियां हैं। एक दूसरी कक्षा में पढ़ती है। दूसरी बेटी ढाई साल की है। उधर, गाड़ागुसैणी के बीडीसी राजू ठाकुर ने कहा कि सरकारी अस्पताल के दरवाजे पर पहुंचकर भी इस परिवार को इलाज नहीं मिल पाया है। उन्होंने सरकार से परिवार को इलाज का खर्च देने की मांग की है।

सीएमओ मंडी डॉ. देशराज ने कहा कि मामला उनके ध्यान में आया है। अस्पताल से बच्चों को रेफर नहीं किया है। न ही किसी चिकित्सक न उन्हें यहां से जाने की सलाह दी है। परिवार बीपीएल में है तो सरकार के समक्ष मामले को रखा जाएगा।

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