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हिमाचल में निर्धनता छात्रवृत्ति योजना के नाम पर गरीबों से मजाक

Thu, 02 Dec 2021 10:54 AM IST
Krishan Singh अनिमेष कौशल, अमर उजाला, शिमला
अनिमेष कौशल, अमर उजाला, शिमला Published by: Krishan Singh Updated Thu, 02 Dec 2021 10:54 AM IST
सार

प्रदेश के गठन का स्वर्ण जयंती वर्ष मना रही सरकार के प्रारंभिक शिक्षा निदेशालय के पास 40 रुपये छात्रवृत्ति लेने को हर वर्ष सैकड़ों आवेदन भी आ रहे हैं। महंगाई के इस दौर में जहां रसोई गैस सिलिंडर सहित खाने-पीने से लेकर कपड़ों तक के दाम लगातार बढ़ते जा रहे हैं।

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Joke with the poor in the name of poverty scholarship scheme in Himachal
छात्रवृत्ति(सांकेतिक) - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हिमाचल प्रदेश के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले पहली से पांचवीं कक्षा के गरीब परिवारों से संबंधित विद्यार्थियों के साथ निर्धनता छात्रवृत्ति योजना के नाम पर सरकार बड़ा मजाक कर रही है। हर दो-तीन साल बाद अपने मंत्रियों और विधायकों के भत्ते बढ़ाने वाली सरकार सालाना 11 हजार रुपये आय वाले परिवारों के बच्चों को मात्र 40 रुपये दे रही है। वर्ष 1971 में हिमाचल प्रदेश को पूर्ण राज्य का दर्जा मिलने के बाद से यह छात्रवृत्ति दी जा रही है।

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यानी बीते 50 वर्षों में सरकार ने एक बार भी इस छात्रवृत्ति की राशि को बढ़ाने पर विचार नहीं किया है। प्रदेश के गठन का स्वर्ण जयंती वर्ष मना रही सरकार के प्रारंभिक शिक्षा निदेशालय के पास 40 रुपये छात्रवृत्ति लेने को हर वर्ष सैकड़ों आवेदन भी आ रहे हैं। महंगाई के इस दौर में जहां रसोई गैस सिलिंडर सहित खाने-पीने से लेकर कपड़ों तक के दाम लगातार बढ़ते जा रहे हैं। ऐसे में मात्र 40 रुपये प्रतिवर्ष की छात्रवृत्ति राशि से पहली से पांचवीं कक्षा में पढ़ने वाले गरीब परिवारों के बच्चे क्या करते होंगे। यह सोचने वाली बात है। सरकार को भी विचार करना चाहिए कि इस योजना को चलाकर मात्र खानापूर्ति क्यों की जा रही है।
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90 फीसदी हाजिरी पर दिए जा रहे प्रतिमाह दो रुपये
सूबे की बेटियों की स्कूलों में अधिक से अधिक मौजूदगी दर्ज करवाने के लिए शुरू की गई छात्रवृत्ति को बढ़ाना भी सरकार भूले बैठी है। बेटियों को हिमाचल सरकार प्रतिमाह मात्र दो रुपये वजीफा दे रही है। पहली से पांचवीं कक्षा में साल भर 90 फीसदी हाजिरी पूरी होने पर सरकार बीस रुपये सालाना छात्रवृत्ति देती है। हर वर्ष 30 से 32 हजार लड़कियों को अटेंडेंस स्कॉलरशिप दी जाती है। दो महीने प्रदेश में स्कूल बंद रहते हैं, ऐसे में सरकार दस महीने का ही वजीफा देती है।
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छात्रवृत्ति लेने को आधार नंबर किया अनिवार्य
शिक्षा विभाग की ओर से चलाई जा रही विभिन्न छात्रवृत्ति योजनाओं का लाभ लेने के लिए आधार नंबर का होना भी अनिवार्य कर दिया गया है। बुधवार को प्रारंभिक शिक्षा विभाग की ओर से राजपत्र में इस बाबत अधिसूचना जारी की गई है। अगर किसी विद्यार्थी के पास आधार नंबर नहीं है तो उसे अपने परिजनों या संरक्षक की ओर से आधार नंबर के लिए आवेदन करने का प्रार्थना पत्र देना होगा। इस प्रार्थना पत्र के प्राप्त होने के बाद ही छात्रवृत्ति आवेदन किया जा सकेगा।

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