नेताओं की खिंचतान से हजारों कर्मियों की उम्मीदों पर फिरा पानी
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जिला शिमला के हजारों कर्मचारियों के मुद्दों को लेकर होने वाली जेसीसी बैठक कर्मचारी नेताओं की गुटबाजी की भेंट चढ़ गई। बैठक न होने से दैनिक भोगी, अनुबंध और नियमित कर्मचारियों में रोष है। वेतनमान और पदोन्नति को लेकर कई महकमों के कर्मचारियों की मांगों पर बैठक में मंथन किया जाना था।
कर्मचारी नेता कई माह से कर्मचारियों को आश्वस्त कर रहे थे कि आपकी मांगों पर गंभीरतापूर्वक पहले जेसीसी की बैठक में चर्चा होगी उसके बाद राज्य सरकार के समक्ष मजबूती से रखा जाएगा।
लेकिन कर्मचारी महासंघ में आपसी खींचतान की वजह से कर्मचारियों की उम्मीदों पर पानी फिर गया। हजारों कर्मचारी महीनों से इस बैठक का इंतजार कर रहे थे।
हजारों कमर्चारियों की उम्मीदों पर फिरा पानी
उन्हें उम्मीद थी कि महासंघ के नेताओं के जरिये उनकी आवाज सरकार तक पहुंचेगी लेकिन बैठक टलने की खबर सुनकर कर्मचारियों में मायूसी छा गई। जिला शिमला में सबसे अधिक करीब 75 हजार कर्मचारी हैं।
अब बैठक कब होगी इस बारे में कोई भी कर्मचारी नेता खुलकर बोलने को तैयार नहीं है। सूत्र बताते हैं कि कुछ कर्मचारी नेताओं को इस बैठक को लेकर आपत्ति थी।
वीरवार सुबह उन्होंने सीएम से मुलाकात की और बैठक को अवैध बताया। उन्हें इस बात पर आपत्ति थी कि महासंघ का राज्य अध्यक्ष , जिला अध्यक्ष की हैसियत से बैठक नहीं ले सकता। इस बैठक में जिला के सभी कर्मचारी नेताओं को प्रतिनिधित्व मिले।
महासंघ में चल रही खींचतान से कर्मचारी नेताओं की राजनीति तो खूब चमक रही है लेकिन इसमें कर्मचारी पिस रहे हैं।