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जांच में खुलासा, शिमला के पानी में फिर पीलिया का विषाणु
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
Updated Tue, 17 Jan 2017 12:01 AM IST
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राजधानी शिमला को पानी की सप्लाई करने वाली कोटी बरांडी और चुरट परियोजना के पानी के सैंपल फेल हो गए हैं। दोनों परियोजनाओं के पानी में पीलिया फैलाने वाला हेपेटायटस- ए और ई- वायरस पाया गया है। राष्ट्रीय विषाणु विज्ञान संस्थान (एनआईवी) पुणे की रिपोर्ट में हुआ खुलासा हुआ है। नगर निगम ने शहर के लिए इन दोनों परियोजनाओं के पानी की सप्लाई रोक दी है।
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शहर में पीलिया का प्रकोप फैलने के ठीक एक साल बाद शहर को पानी की सप्लाई करने वाली दो परियोजनाएं सवालों के घेरे में हैं। शहर में पीलिया फैलने के बाद अश्वनी परियोजना के विकल्प के तौर पर तैयार की गई कोटी-बरांडी परियोजना और चुरट परियोजना के सैंपल फेल हो गए हैं। बीते 29 दिसंबर को संजौली टैंक आउटलेट, वाटर ट्रीटमेंट प्लांट ढली आउटलेट और कसुम्पटी टैंक आउटलेट के पानी के सैंपल जांच के लिए राष्ट्रीय विषाणु विज्ञान संस्थान पुणे को भेजे गए थे। छह जनवरी को इन सैंपलों की रिपोर्ट आई है।
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रिपोर्ट में संजौली टैंक आउटलेट के सैंपल को संतोषजनक पाए गए हैं लेकिन वाटर ट्रीटमेंट प्लांट ढली आउटलेट (बी) में हेपेटायटस- ई और कसुम्पटी टैंक आउटलेट (सी) में हेपेटायटस- ए पाजिटिव पाया गया है। रिपोर्ट में साफ लिखा गया है कि दोनों स्रोतों का पानी दूषित होने के कारण हेपेटायटस- ई और ए वायरस मौजूदगी पाई गई है। बीते साल अश्वनी परियोजना में सीवरेज का पानी मिलने के कारण शहर में पीलिया फैल गया था जिसके कारण करीब 24 लोगों की मौत हो गई थी।
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एनआईवी को भेजे हैं सैंपल, एक दो दिन में आएगी रिपोर्ट
छह जनवरी की एनआईवी की रिपोर्ट हमें नहीं मिली है। 9 और 10 जनवरी को सैंपल जांच के लिए जरूर एनआईवी को भेजे गए हैं जिसकी रिपोर्ट एक दो दिन में मिलने की उम्मीद है। 11 से 13 जनवरी के बीच ढली और कसुम्पटी टैंक के सैंपल की रिपोर्ट आईजीएमसी से मिल गई है जो कि एक्सीलेंट है। मौजूदा समय में कोटी बरांडी और चुरट परियोजना से पानी की पंपिंग बंद है। एनआईवी की रिपोर्ट के बाद ही पंपिंग शुरू करने को लेकर कोई फैसला लिया जाएगा।- धर्मेंद्र गिल, अधीक्षण अभियंता, ग्रेटर शिमला वाटर एंड सीवरेज सर्कल
सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट के सैंपल भी फेल
बीते साल शहर में पीलिया फैलने के बाद शहर के सभी सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांटों का संचालन भी नगर निगम ने अपने हाथों में ले लिया था। करीब दस करोड़ रुपये खर्च कर नई मशीनरी से सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांटों को अपग्रेड किया गया। बावजूद इसके प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा लिए गए सैंपलों की रिपोर्ट फेल पाई गई है। अक्तूबर 2016 तक के अधिकतर सैंपल फेल हैं।