एक बार फिर जब्त होते-होते बची जनशताब्दी एक्सप्रेस
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दिल्ली से ऊना तक चलने वाली जनशताब्दी एक्सप्रेस एक बार फिर जब्त होते-होते बची। बसाल क्षेत्र के एक किसान को भूमि अधिग्रहण का 5.69 लाख मुआवजा न देने पर जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने उत्तर रेलवे की करोड़ों की संपत्तियों को उसके हवाले करने के मौखिक आदेश दे दिए। हालांकि, ऐन मौके पर रेलवे के अधिवक्ता की ओर से संपत्ति जब्त न करने की विशेष अर्जी दाखिल करने पर कोर्ट ने अपना फैसला रोक लिया।
रेलवे को एक सप्ताह में मुआवजा देने का समय दिया। अदालत के आदेश पर ऊना रेलवे स्टेशन और जन शताब्दी एक्सप्रेस का पूरा ब्योरा और इससे संबंधित कागजात सुनवाई के दौरान मौजूद थे। जिला एवं सत्र न्यायाधीश मुकेश बंसल की अदालत में बसाल निवासी गगना राम की जमीन संबंधी मामले की सुनवाई हुई।
1998 में उत्तर रेलवे ने अधिगृहीत की थी जमीन
गगना राम की जमीन वर्ष 1998 में उत्तर रेलवे ने अधिगृहीत की थी। इसके मुआवजे के लिए किसान गगना ने वर्ष 2000 में रेलवे के समक्ष अपील दायर की, लेकिन वर्ष 2009 तक रेलवे ने उक्त फाइल को दबाकर रखा। बाद में हिमाचल हाईकोर्ट के आदेश पर रेलवे को पांच लाख 69 हजार मुआवजा देने के आदेश हुए। गगना राम की ओर से मामले की पैरवी कर रहे अधिवक्ता अरुण कुमार सैणी ने बताया कि उच्च अदालत के आदेशों पर यह केस एक्जीक्यूशन के लिए जिला अदालत को भेजा गया।
इस पर मुकेश बंसल की अदालत ने ऊना रेलवे स्टेशन और जन शताब्दी ट्रेन के कागजात तलब किए थे। रेलवे की ओर से राशि जमा न कराने पर अदालत ने कड़े शब्दों में रेलवे को फटकार लगाई और पूछा कि क्यों न रेलवे की इन संपत्तियों को किसान के हवाले कर दिया जाए। इस पर रेलवे की ओर से तैनात अधिवक्ता ने अदालत में विशेष अर्जी दाखिल की, जिस पर कोर्ट ने एक सप्ताह का समय दिया है।