HP Politics: जयराम बोले- 14 महीने में लिया 14 हजार करोड़ का ऋण, लगाया कहीं नहीं, कुछ तो गड़बड़ है
आज प्रदेश सरकार को पूरे 14 महीने का समय बीत गया है और मुख्यमंत्री सुखविंद्र सुक्खू ने 14 हजार करोड़ रुपये का ऋण ले लिया, लेकिन सवाल उठता है कि आखिर यह ऋण लग कहां रहा है।
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नेता प्रतिपक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर शनिवार सुबह ही कार्यकर्ताओं की बैठक लेने जोगिंद्रनगर पहुंचे और यहां कार्यकर्ताओं के बीच प्रदेश सरकार पर जमकर बरसे। उन्होंने कहा कि आज प्रदेश सरकार को पूरे 14 महीने का समय बीत गया है और मुख्यमंत्री सुखविंद्र सुक्खू ने 14 हजार करोड़ रुपये का ऋण ले लिया, लेकिन सवाल उठता है कि आखिर यह ऋण लग कहां रहा है। जहां आज हिमकेयर योजना के पैसे का भुगतान नहीं होने से गरीब इलाज के लिए भटक रहे हैं तो वहीं लोगों को बिजली के संकट से भी जुझना पड़ रहा है। सड़कों का रखरखाव नहीं हो रहा है, अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवाएं ठप पड़ी हैं। सभी विकास के कार्य बंद पड़े हैं। एक हजार के आसपास चले हुए संस्थान बंद कर दिए लेकिन बावजूद इसके ऋण दिन प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है। ऐसे में लगता है कुछ तो गड़बड़ है। उन्होंने लोकसभा चुनावों के लिए कार्यकर्ताओं से तैयार रहने का आह्वान करते हुए कहा कि जोगिंद्रनगर ने जो मांगा वो उन्होंने अपने समय में दिया है। इस मौके उनके साथ स्थानीय विधायक प्रकाश राणा, बंजार के विधायक सुरेंद्र शौरी, आनी के विधायक लोकेंद्र कुमार, जिलाध्यक्ष निहाल चंद शर्मा, मंडल अध्यक्ष अजय सकलानी सहित अन्य भाजपा कार्यकर्ता मौजूद रहे।
2004 से 2014 के बीच हुए 20 लाख करोड़ के 15 घोटाले : बिंदल
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष डॉ. राजीव बिंदल ने कहा है कि केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा संसद में लाया गया श्वेत पत्र कांग्रेस की 2004 से लेकर 2014 तक की कार्यशैली का एक नमूना है। इस अवधि में करीब 20 लाख करोड़ के 15 बड़े घोटाले हुए। 2 जी, 3जी घोटाला, अगस्ता बेस्ट लैंड घोटाला, आदर्श घोटाला, कोयला घोटाला, हेलीकॉप्टर घोटाला सहित अन्य घोटालों से देश की आर्थिक स्थिति खराब हुई। 2014 के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश को संभाला। मनमोहन सिंह सरकार के दस साल का कार्यकाल आर्थिक कुप्रबंधन, वित्तीय अनुशासनहीनता और भ्रष्टाचार का कालखंड था। तब हमने खराब स्थिति पर श्वेत पत्र लाने से परहेज किया। अगर तब ऐसा किया होता तो निवेशकों समेत कई लोगों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता और इससे आर्थिक व्यवस्था पर असर पड़ता।