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Shimla News: चेक बाउंस मामले में कोटखाई निवासी दोषी करार, एक साल की कैद और 4.10 लाख जुर्माना
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मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट संदीप सिंह सिहाग ने सुनाया फैसला, साल 2019 में श्रीराम ट्रांसपोर्ट फाइनेंस कंपनी का मामला
दोषी ने वाहन खरीदने के लिए लिया था 3.98 लाख रुपये का ऋण
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। सत्र न्यायालय ने चेक बाउंस मामले में तहसील कोटखाई निवासी राजेंद्र सिंह को दोषी करार देते हुए एक साल की कैद और 4.10 लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट संदीप सिंह सिहाग की अदालत ने यह फैसला सुनाया है। जुर्माने का भुगतान न करने पर दोषी को एक महीने की अतिरिक्त साधारण कारावास की सजा काटनी होगी।
शिकायतकर्ता के अनुसार दोषी ने श्रीराम ट्रांसपोर्ट फाइनेंस कंपनी लिमिटेड कच्चीघाटी शाखा से वाहन खरीदने के लिए 3,98,632 रुपये का ऋण लिया था। ऋण स्वीकृत होने के बाद 47 मासिक किस्तों में ऋण चुकाने के लिए समझौता हुआ था। लेकिन, दोषी भुगतान करने में विफल रहा। जुलाई 2019 को शिकायतकर्ता को 2.60 लाख की राशि का एक चेक जारी किया, लेकिन बैंक खाते में धन अपर्याप्त होने के कारण चेक बाउंस हो गया। इसके बाद दोषी को राशि के भुगतान करने के लिए कानूनी नोटिस भी जारी किया। 28 सितंबर 2019 को निर्धारित समय में कर्ज न चुकाने पर शिकायतकर्ता ने नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट एक्ट की धारा 138 के तहत न्यायालय के समक्ष केस दायर किया था। न्यायालय में केस के दौरान दोनों पक्षों की ओर दलीलें दी गई और सबूतों के आधार पर न्यायालय ने आरोपी को दोषी करार देते यह फैसला सुनाया है। संवाद
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दोषी ने वाहन खरीदने के लिए लिया था 3.98 लाख रुपये का ऋण
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। सत्र न्यायालय ने चेक बाउंस मामले में तहसील कोटखाई निवासी राजेंद्र सिंह को दोषी करार देते हुए एक साल की कैद और 4.10 लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट संदीप सिंह सिहाग की अदालत ने यह फैसला सुनाया है। जुर्माने का भुगतान न करने पर दोषी को एक महीने की अतिरिक्त साधारण कारावास की सजा काटनी होगी।
शिकायतकर्ता के अनुसार दोषी ने श्रीराम ट्रांसपोर्ट फाइनेंस कंपनी लिमिटेड कच्चीघाटी शाखा से वाहन खरीदने के लिए 3,98,632 रुपये का ऋण लिया था। ऋण स्वीकृत होने के बाद 47 मासिक किस्तों में ऋण चुकाने के लिए समझौता हुआ था। लेकिन, दोषी भुगतान करने में विफल रहा। जुलाई 2019 को शिकायतकर्ता को 2.60 लाख की राशि का एक चेक जारी किया, लेकिन बैंक खाते में धन अपर्याप्त होने के कारण चेक बाउंस हो गया। इसके बाद दोषी को राशि के भुगतान करने के लिए कानूनी नोटिस भी जारी किया। 28 सितंबर 2019 को निर्धारित समय में कर्ज न चुकाने पर शिकायतकर्ता ने नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट एक्ट की धारा 138 के तहत न्यायालय के समक्ष केस दायर किया था। न्यायालय में केस के दौरान दोनों पक्षों की ओर दलीलें दी गई और सबूतों के आधार पर न्यायालय ने आरोपी को दोषी करार देते यह फैसला सुनाया है। संवाद
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