फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Shimla News ›   IPH Scam in Himachal Pradesh all accused acquitted including Five Himachal Govt Officers

बहुचर्चित द्राभला आईपीएच घोटाले में पांच अफसरों समेत आठों आरोपी बरी

Mon, 03 Jun 2019 10:02 AM IST
अरविन्द ठाकुर न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला Published by: अरविन्द ठाकुर Updated Mon, 03 Jun 2019 10:02 AM IST
विज्ञापन
IPH Scam in Himachal Pradesh all accused acquitted  including Five Himachal Govt Officers
सांकेतिक तस्वीर

बहुचर्चित सोहाल-द्राभला आईपीएच घोटाले के सभी आठों आरोपी कोर्ट से बरी हो गए हैं। विजिलेंस ब्यूरो लाखों के इस कथित घोटाले में आरोपी पांच अधिकारियों और तीन ठेकेदारों पर आरोप सिद्ध नहीं कर सका। विशेष न्यायाधीश (वन) की कोर्ट ने तत्कालीन अधीक्षण अभियंता एसके सिंघल, अधिशासी अभियंता सतपाल लोहिया, सहायक अभियंता अशोक शर्मा, कनिष्ठ अभियंता गुरचरण भरमोटा एवं प्रकाश चंद के अलावा ठेकेदार महेश पुरी, संजीव ठाकुर और कमलेश पुरी को बरी कर दिया है।

विज्ञापन


इनमें अशोक शर्मा का देहांत हो चुका है। विजिलेंस ने इनके खिलाफ अपने शिमला थाने में आईपीसी की धारा 420, 465, 467, 468, 471 और 120बी तथा भ्रष्टाचार रोधी अधिनियम की धारा 13(1)(डी) और 13(2) के तहत मामला दर्ज किया था।  
विज्ञापन


धूमल सरकार में मार्च, 2008 को विजिलेंस के जांच अधिकारी नेशिमला थाने में केस दर्ज करने के लिए एक रिपोर्ट दी। रिपोर्ट में आरोपियों पर दो तरह के आरोप थे। इनमें एक आईपीएच विभाग के पंपिंग स्टेशनों में मशीनरी की बिक्री और मरम्मत में घपले से संबंधित और दूसरा सोहाल-द्राभला सड़क निर्माण में घोटाले का था। नौटी खड्ड से शिमला के लिए लिफ्ट वाटर सप्लाई की करोड़ों की स्कीम के काम के लिए अधिशासी अभियंता सतपाल लोहिया जिम्मेवार थे। लोहिया पर आरोप रहा कि उन्होंने काम शुरू करने को कंपीटेंट अथॉरिटी से मंजूरी नहीं ली।
विज्ञापन
विज्ञापन


जेई गुरचरण सिंह भरमोटा और प्रकाश चंद पर झूठी एंट्री करने, अशोक शर्मा पर इसे मिलीभगत से सत्यापित करने और लोहिया पर झूठे बिल पास करने के आरोप थे, जिससे सरकारी राजस्व को करीब 80 लाख का नुकसान हुआ। तीन फर्मों को इसका लाभ देने का भी आरोप रहा। मशीनरी की खरीद-फरोख्त के अलावा सोहाल-द्राभला सड़क चौड़ा करने में भी घोटाले के आरोप थे।

धोखाधड़ी और जालसाजी के आरोप नहीं हुए साबित

कोर्ट ने आदेश में स्पष्ट किया कि मामले में आरोपियों पर संदेह उजागर किया, लेकिन यह लीगल प्रूफ का रूप नहीं ले सका। अभियोजन की ओर से बताई और रिकॉर्ड से जोड़ी परिस्थितियां पूर्ण नहीं हैं। इससे आरोपियों पर दोष सिद्ध नहीं होते हैं।

कोर्ट ने पाया कि इस मामले में अभियोजन पक्ष धोखाधड़ी, जालसाजी और आपराधिक प्रवृत्ति के आरोप साबित नहीं कर पाया है। जिस तकनीकी रिपोर्ट के आधार पर विजिलेंस ने जांच शुरू की। उसका रिकॉर्ड भी अपूर्ण बताया। 

मंत्री को भी थी लपेटने की थी तैयारी 
इस मामले में कांग्रेस सरकार में रहे मंत्री को भी लपेटने की तैयारी थी। माना जा रहा था कि अधिकारियों ने इस घपले को राजनीतिक शह में अंजाम दिया। तत्कालीन धूमल सरकार इस मामले को उससे पिछली वीरभद्र सरकार के खिलाफ लगातार मुद्दा भी बनाती रही, मगर पूर्व मंत्री और किसी नेता के खिलाफ सुबूत नहीं जुटाए जा सके। 

आरोपियों की पूर्व मंत्री से बातचीत की सीडी भी हुई वायरल 
कुछ आरोपियों की तत्कालीन कांग्रेस सरकार के पूर्व मंत्री से हुई बातचीत की एक सीडी भी इस मामले में खूब वायरल हुई। चर्चा यह रही कि इस सीडी को गुप्तचर महकमे ने तैयार किया था।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed