उद्योगों को जमीन, ढांचा बनाए बिना इन्वेस्टर मीट संभव नहीं
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उद्योगों को उपयुक्त जमीन जुटाए और बुनियादी ढांचा तैयार किए बिना हिमाचल प्रदेश में इन्वेस्टर मीट संभव नहीं है। जब तक सरकार उद्योगपतियों की जरूरत को ध्यान में लैंड बैंक जुटाना जरूरी है। इसके अतिरिक्त उद्योगपतियों की आवश्यकता अनुसार औद्योगिक क्षेत्रों में खुले रास्ते, बिजली और पानी उपलब्ध करना होता है।
नए उद्योगों के लिए बुनियादी ढांचा मुहैया कराने के बाद उद्योगपतियों के लिए इंवेस्टर मीट बुलाया कर प्रस्ताव रखे जाते हैं। इन प्रस्तावों के आधार पर बडे़- बड़े उद्योगपति अपने उद्योग लगाने को रुचि दिखाते हैं।
पड़ोसी राज्य उत्तराखंड में करीब डेढ़ साल पहले इन्वेस्टर मीट की तैयारी शुरू कर दी थी। इससे पहले बड़े-बड़े शहरों को सरकार ने रोड शो कराए थे। इस दौरान देश विदेश
पूंजीपतियों से अधिकारियों से संपर्क स्थापित किया था। इसके बाद गत अक्तूबर पहले हफ्ते में उत्तराखंड सरकार ने इंवेस्टर मीट आयोजित की।
इस दौरान पूंजीपतियों के समक्ष प्रस्ताव रखा कि उद्योगपतियों को सरकार औद्योगिक क्षेत्रों में यह सुविधाएं उपलब्ध करा रही है और सरकार की ओर से उद्योगों को दिए जाने वाले लाभों के बारे में अवगत कराया गया। इसके बाद उत्तराखंड में पूंजीपतियों ने करीब एक लाख करोड़ के निवेश के लिए रुचि दिखाई।
लैंड बैंक, रास्ते, बिजली पानी मुहैया कराया
उत्तराखंड में इन्वेस्टर मीट से पहले बड़े औद्योगिक क्षेत्र विकसित किए गए। इसके बाद इन क्षेत्रों में रास्ते, बिजली और पानी जैसे सुविधाएं पहले उपलब्ध कराई। इसके अलावा बड़े उद्योगों के लिए लैंड बैंक भी तैयार किया गया ताकि कोई पांच सौ बीघा से ज्यादा जमीन लेना चाहता है तो उसे भूमि मुहैया कराई जा सके।
हिमाचल में इन्वेस्टर मीट से पहले करनी होगी पूरी तैयारी
पड़ोसी राज्य उत्तराखंड की तर्ज पर इन्वेस्टर मीट सफलतापूर्वक करानी होगी तो इससे पहले औद्योगिक क्षेत्र विकसित कर उद्योगों की जमीन देने की व्यवस्था होनी चाहिए। इसके अलावा बड़े उद्योगों की जरूरत के अनुसार लैंड बैंक पहले तैयार करना होगा। इसके अलावा इन क्षेत्रों में चौड़े रास्ते, बिजली और पानी की व्यवस्था पहले करनी होगी।