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Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   International Literature Festival: Booker Award winner writer Geetanjali Shree Addressed on the topic 'Women writing in Indian languages'at shimla

International Literature Festival: बुकर पुरस्कार विजेता गीतांजलि बोलीं- मुझ पर तो इत्तेफाक से टॉर्च पड़ी, रोशनी आसपास भी है

Sat, 18 Jun 2022 09:39 PM IST
Krishan Singh अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला Published by: Krishan Singh Updated Sat, 18 Jun 2022 09:39 PM IST
सार

शिमला में अंतरराष्ट्रीय साहित्य उत्सव ‘उन्मेष’ के समापन के दिन शनिवार को गेयटी थियेटर के गौथिक सभागार में ‘भारतीय भाषाओं में महिला लेखन’ विषय पर संबोधित करते हुए गीतांजलि श्री ने कहा कि कोई भी कृति केवल लिखने वाले की ही नहीं होती है या केवल उसी के बनाए नहीं बनती है।

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International Literature Festival: Booker Award winner writer Geetanjali Shree Addressed on the topic 'Women writing in Indian languages'at shimla
अंतरराष्ट्रीय बुकर पुरस्कार से सम्मानित उपन्यासकार गीतांजलि श्री। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

अंतरराष्ट्रीय बुकर पुरस्कार से सम्मानित उपन्यासकार गीतांजलि श्री ने कहा है कि कोई भी पुरस्कार जब मिलता है, तो वह बुकर हो या कोई अन्य पुरस्कार हो, वह रोशनी फेंकता है। इत्तेफाक से इस बार टॉर्च उनकी कृति पर पड़ी है। गीतांजलि श्री ने कहा कि मेरी कृति बंजर जमीन पर नहीं उगी है, वह जिस जमीन पर उगी है, वहां भी रोशनी है। वहां मेरे आसपास भी कई कृतियां हैं। टॉर्च की तरफ देखना बंद करें, जहां रोशनी पड़ी है वहां देखिए। 

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शिमला में अंतरराष्ट्रीय साहित्य उत्सव ‘उन्मेष’ के समापन के दिन शनिवार को गेयटी थियेटर के गौथिक सभागार में ‘भारतीय भाषाओं में महिला लेखन’ विषय पर संबोधित करते हुए गीतांजलि श्री ने कहा कि कोई भी कृति केवल लिखने वाले की ही नहीं होती है या केवल उसी के बनाए नहीं बनती है। उसके आसपास के सब लोग न जाने क्या-क्या मिलकर उसे इस लायक बना देते हैं कि बुकर पुरस्कार मिलता है। वह एक बात यह कहेंगी कि कुछ दिनों तक शायद उनका नाम हिंदुस्तान में लिया जाएगा। बुकर के साथ जोड़ा जाएगा। वह नहीं समझतीं कि इस तरह की गहमागहमी बहुत दिनों तक रहती है। फिल्मी सितारों और क्रिकेटरों के साथ शायद ऐसा होता हो कि उन्हें याद रखा जाता है। 
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साहित्य के लिए आम लोगों में इतना धैर्य नहीं होता कि वे रुके रहेें
गीतांजलि श्री बोलीं कि साहित्य के लिए आम लोगों में इतना धैर्य नहीं होता है कि वे रुके रहेें कि अब अगली किताब आएगी। वे सोचते हैं कि इस किताब को तो पढ़ लें, अगली को छोड़िए। जो साहित्यिक सर्कल है, वहीं सब रहेगा। वह सर्कल बहुत अच्छे से समझता है कि पुरस्कार का मतलब क्या होता है। पुरस्कार आपको एक पहचान देता है। पुरस्कार कोई एक पल होता है जो बहुत से लोगों को मिल जाते हैं। 
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रेत समाधि’ के अंग्रेजी अनुवाद ने ही नहीं मिला बुकर
इसके अलावा अमर उजाला से विशेष बातचीत में बुकर पुरस्कार पर उठे सवालों का जवाब देते हुए गीतांजलि श्री ने बताया कि केवल ‘रेत समाधि’ के अंग्रेजी अनुवाद ने ही उन्हें बुकर पुरस्कार दिलाया, ऐसा नहीं है। लियो टॉलस्टॉय के उपन्यास की अन्ना केरेनिना हर भाषा में वही रहेगी, यह बदलेगी नहीं। ठीक वैसे ही उनका उपन्यास भी है। उन्हें अपने आप को डिफेंड करने की जरूरत नहीं, ये आलोचकों और पाठकों का काम है। इस उत्सव के अंतिम दिन केरल के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने 'भारत में भक्ति साहित्य' विषय पर आयोजित सत्र की अध्यक्षता की। विदेशी साहित्यकारों ने भी विदेश में भारतीय साहित्य पर चर्चा की। 

साहित्य अभिव्यक्ति का दर्पण, इसमें सत्यांश का होना जरूरी : आर्लेकर 

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राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर - फोटो : अमर उजाला

राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर ने कहा कि साहित्य का मूल स्वभाव प्रकाशन से जुड़ा है। सत्य पर आधारित जो विचार आपके मन में है, वह प्रकाशित होकर समाज के सामने अभिव्यक्त होना चाहिए। ऐतिहासिक गेयटी थियेटर में आयोजित तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय साहित्य उत्सव ‘उन्मेष’ का राज्यपाल ने समापन किया। राज्यपाल ने कहा कि साहित्य को अभिव्यक्ति का दर्पण कहा गया है, जो उस समय का चित्रण हो सकता है। यही साहित्य आज की परिस्थिति का चित्रण भी करता है। समाज में जो विषय आते हैं वह साहित्य के रूप में सामने आते हैं। उन्होंने कहा कि लेखन स्वांत सुखाय नहीं होना चाहिए।

लेखन सत्य के आधार पर होना चाहिए। स्वतंत्रता आंदोलन के गुमनाम चेहरों और तत्कालीन घटनाओं को साहित्य के माध्यम से लोगों के सामने लाने की आवश्यकता पर बल देते हुए फिल्म पटकथा को साहित्य का दर्जा देने की बात का समर्थन किया। आर्लेकर ने कहा कि साहित्य को पढ़ना जरूरी है। पुस्तकों को पढ़ने की रुचि हमारे घर में होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि बच्चों को पढ़ने की आदत लगाने की जरूरत है। उन्होंने साहित्य अकादमी से अपील करते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय साहित्य उत्सव हर वर्ष शिमला में आयोजित किया जाना चाहिए। इससे पूर्व साहित्य अकादमी के अध्यक्ष प्रो. चंद्रशेखर कंबार ने राज्यपाल का स्वागत किया तथा साहित्य उत्सव से संबंधित जानकारी दी। साहित्य अकादमी के सचिव डॉ. के श्रीनिवास राव ने धन्यवाद प्रस्ताव प्रस्तुत किया।

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