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गरीबों के घर न बनाए तो लैप्स होंगे करोड़ों

Wed, 05 Nov 2014 11:48 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला Updated Wed, 05 Nov 2014 11:48 AM IST
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integrated housing and slum development programme grant to himachal govt.

केंद्र सरकार की इंटीग्रेटिड हाउसिंग एंड स्लम डेवलपमेंट प्रोग्राम (आईएचएसडीपी) के तहत प्रदेश सरकार को शहरी गरीबों के लिए 1200 आवास बनाना चुनौती से कम नहीं है। ये योजना मार्च 2015 में खत्म होगी। इस योजना के तहत प्रदेश के जिलों में 40 फीसदी काम हुआ है जबकि 60 फीसदी काम होना है।

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सरकार के पास 6 महीने है, जिसमें शहरी गरीबों के लिए आवास बनाने होंगे। अगर निर्धारित समय में आवास नहीं बने तो पैसा वापस केंद्र को वापस हो जाएगा। शहरी गरीबों को आवास उपलब्ध कराने के लिए केंद्र सरकार ने 2008 में 33 करोड़ रुपए की राशि जारी की थी।
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अब पैसा हाथ से जाता देख शहरी विकास विभाग ने 5 नवंबर को देश-विदेश की नामी कंपनियों के अधिकारियों से बैठक करने का फैसला लिया है। इसमें कंपनियों को छह माह के भीतर आवास तैयार करने का टारगेट दिया जाएगा। बैठक बुलाने की पुष्टि निदेशक शहरी विकास विभाग जेएम पठानिया ने की है।

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धर्मशाला, सोलन, बद्दी में नहीं हुई शुरुआत

integrated housing and slum development programme grant to himachal govt.

धर्मशाला, सोलन और बद्दी में एक भी आवास का निर्माण शुरू नहीं हो पाया। धर्मशाला में 348, सोलन में 70 और बद्दी में 200 के करीब आवास बनने हैं।

हमीरपुर, परवाणू और नालागढ़ में 472 आवासों का निर्माण होना है। यहां 200 आवास बनकर ही तैयार हुए हैं। इस योजना के तहत हमीरपुर में 152, परवाणू में 192 और नालागढ़ में 128 आवास बनने हैं।

यहां खुद बनाए घर
सुंगरनगर और सरकाघाट में पात्र लोगों ने योजना का पैसा लेकर खुद ही 238 घरों का निर्माण किया है।

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