चीन बॉर्डर तक पहुंचने के लिए ये है सरकार का नया प्लान
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हिमाचल के किन्नौर से सटी चीन सीमा तक सेना अब आसानी से पहुंच सकेगी। इस अंतरराष्ट्रीय सीमा पर पहुंचने के लिए सरकार अब एक वैकल्पिक मार्ग तैयार कर रही है। सत्रह किलोमीटर लंबी यह वैकल्पिक सड़क हिंदोस्तान-तिब्बत मार्ग का हिस्सा होगी।
लियो से चांगो तक इस सड़क के बनने से सामरिक महत्त्व का हिंदोस्तान तिब्बत मार्ग अब बार-बार अवरुद्ध नहीं होगा। किन्नौर और स्पीति की सीमा पर मलिंग पहाड़ी से लगातार भूस्खलन के चलते यह मार्ग वर्तमान में बार-बार अवरुद्ध होता है।
इसी समस्या के हल के लिए सरकार 70 करोड़ से लियो से चांगो तक यह वैकल्पिक मार्ग बना रही है। केंद्र की मदद से प्रदेश सरकार इस सड़क को बनाएगी। बीते दिन दिल्ली में हुई बैठक में केंद्र ने इसे हरी झंडी दे दी है।
इसलिए लिया गया फैसला
किन्नौर के मलिंग में लगातार भू स्खलन से चीन सीमा तक जाने वाला हिंदोस्तान-तिब्बत मार्ग बार बार अवरुद्ध हो जाता है। हल्के हिमपात होने पर भी इस हाईवे से वाहन आगे नहीं जा पाते हैं। इसका तोड़ निकालने को सरकार ने लियो से चांगो तक वैकल्पिक सड़क बनाने का फैसला लिया है। सत्रह किलोमीटर इस सड़क के बनने पर लियो से न केवल चीन सीमा की दूरी तेरह किलोमीटर कम हो जाएगी।
हल्की बर्फबारी में भी यह रोड बंद नहीं होगा। लियो से चीन सीमा 63 किलोमीटर है। लियो से चांगो वाया मलिंग 30 किलोमीटर है। वैकल्पिक मार्ग बनने से ये दूरी 17 किलोमीटर रह जाएगी। इस वैकल्पिक मार्ग की ऊंचाई भी 800 मीटर कम हो जाएगी। वर्तमान में जा रही सड़क की ऊंचाई 3800 मीटर है।
किन्नौर के मलिंग में लगातार पहाड़ी खिसकने से दिक्कतें पेश आ रही थीं। समदो और कौरिक में सेना की पोस्ट है। सेना के जवान समय रहते बार्डर पर पहुंच सकें इसके लिए वैकल्पिक मार्ग बनाया जा रहा है। केंद्र सरकार ने बीते दिन इसे स्वीकृति दे दी है।- नरेश शर्मा, ईएनसी, लोनिवि