एशिया में हाई स्पीड माइक्रो चिप बनाने वाला पहला देश बनेगा भारत
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माइक्रो/नैनो चिप का निर्माण अब भारत में भी हो सकेगा। आईआईटी मंडी में विदेश से लाई गई अत्याधुनिक मशीनरी स्थापित कर दी गई है। बेहद छोटे आकार वाली हाई स्पीड चिप का उत्पादन शुरू होते ही भारत एशिया का पहला देश बन जाएगा।
बुधवार को आईआईटी मंडी में चिप निर्माण के लिए 50 करोड़ से बने सेंटर फॉर डिजाइन एंड फैब्रिकेशन ऑफ इलेक्ट्रॉनिक डिवाइसिस का शुभारंभ केंद्र के एचआरडी मंत्रालय के सचिव आर सुब्रमण्यम ने किया। सेंटर में 40 करोड़ की मशीनरी स्थापित की गई है।
यह मशीनरी यूएस, जर्मनी और यूरोप से लाई गई है। चिप निर्माण के लिए चंडीगढ़ की एससीएल कंपनी के साथ तीन साल का करार हुआ है। भारत सहित एशिया में अभी तक ऐसी चिप बनाने की सुविधा नहीं है। नैनो चिप की दिशा में आईआईटी मंडी ने काम करना शुरू कर दिया है।
डीआरडीओ और इसरो को चिप सप्लाई होगी
आईआईटी मंडी के निदेशक टीमोथी गोंजालविस और कंप्यूटरिंग एंड इलेेक्ट्रॉनिक के सहायक प्रो. सतिंद्र शर्मा ने बताया कि यह चिप देेश के लिए कई मायने मेें मददगार साबित होगी।
रॉकेट को दिशा देने वाली एक नैनो चिप भी आईआईटी मंडी ने तैयार की है। इसकी अभी टेस्टिंग चल रही है। अब जो नैनो चिप बनेगी, उसका कंप्यूटर, लैपटॉप और मोबाइल सहित डिफेंस के लिए इस्तेमाल होगा।
आईआईटी मंडी ने इसरो, डीआरडीओ और वीएसएससी से यह चिप सप्लाई करने का करार किया है। इससे डिफेंस को आधुनिक और सूक्ष्म तकनीक मिलेगी। आईआईटी मंडी के वैज्ञानिकों ने लिथोग्राफी के विभिन्न अनुप्रयोगों के लिए उन्नत रेसिस्टेंस (रोधकों) का विकास भी किया है।
भारत की पहली वर्कशाप
मंडी में नैनो/ माइक्रो 2डी एवं 3डी फैब्रिकेशन एवं निर्माण और उपयोग पर अंतरराष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन भी किया जा रहा है। 2 नवंबर तक चलने वाली आधुनिक लिथोग्राफी की भारत में यह पहली कार्यशाला है, जिसमें अमेरिका, ताइवान और सिंगापुर के उद्योग और शिक्षा जगत के प्रमुख भाग ले रहे हैं।
कार्यशाला में अमेरिका स्थित इंटेल कॉरपोरेशन के डॉ. विवेक सिंह, आईआईटी दिल्ली के निदेशक प्रोवी रामगोपाल राव, आईआईटी दिल्ली के प्रो. बीआर मेहता, आईआईटी मद्रास की प्रो. एनाक्षी भट्टाचार्य और प्रो. नंदिता दासगुप्ता हिस्सा ले रहे हैं।
इसके साथ ही जेएनयू दिल्ली के कुलपति प्रो. एम जगदीश कुमार, जर्मनी के प्रो. हबील जोर्ग शूल्ज, ताइवान के प्रो. क्यूएन-यू ताई, सिंगापुर के डॉ. एमएसएम सैफुल्ला और अमेरिका स्थित एलएसयू के प्रो. अशोक श्रीवास्तव तथा अमेरिका के लॉरेंस बर्कले नेशनल लैबोरेटरी के डॉ. पैट्रिक नौलेउ हिस्सा ले रहे हैं।