इस साल न के बराबर हुआ चीन से कारोबार, वजह भी है खास
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चीन से सटी सीमा पर दोनों देशों के बीच वर्ष 1991 से होने वाला सालाना कारोबार इस बार न के बराबर ही हो पाया। इसकी बड़ी वजह सामने आई है। डोकलाम विवाद से हिमाचल की चीन से सटी सीमा पर दोनों देशों के बीच वर्ष 1991 से होने वाला सालाना कारोबार इस बार न के बराबर ही हो पाया। करोड़ों में होने वाला आयात-निर्यात महज कुछ लाख में सिमटकर रह गया।
यह व्यापार किन्नौर जिला के नमज्ञा गांव के वाया शिपकिला दर्रे से होता है। हर वर्ष जिला के कई व्यापारी इसी दर्रे से होते हुए चीन अधिकृत तिब्बत जाते हैं और सामान की खरीद-फरोख्त करते हैं। यह कारोबार हर वर्ष 1 जून से शुरू होकर 30 नवंबर तक चलता है। हर साल यहां चीन के कारोबारियों से रेडीमेड गारमेंट्स, कारपेट, पशमीना, जूते साबर, क्रॉकरी, थरमस, चाइनीज परिधानों सहित कई खाद्य सामग्री खरीदी जाती है।
हिमाचल के कारोबारी चावल, रिफाइंड तेल, गुड़, इंडियन कारपेट, पीतल और कांसा के बर्तन, ड्राई फ्रूट्स, छवारा, नारियल, किशमिश, बादाम, चिलगोजा, काला जीरा, बादाम, अखरोट बेचते हैं। करीब चार साल पहले तिब्बतियन भेड़, बकरी, चिगू चामुर्थी घोड़े, याक, चाइनीज कुत्तों का कारोबार होता था लेकिन भारत सरकार ने इस पर रोक लगा दी।
इस वर्ष भारत से चीन के ट्रेड सेंटर यानी प्रथम गांव शिकपी में किन्नौर जिले के पूह खंड के नमज्ञा, पूह, डुबलिंग, खाब, टाशीगंग, नाको, चांगो, हांगो, सुमरा, शलखर सहित पूह के विभिन्न ग्रामीण क्षेत्रों से महज 71 कारोबारी ही जा पाए।
चीन के शिपकी गांव में है ट्रेड सेंटर
चीन के सीमांत क्षेत्र से सटे किन्नौर जिले के नमज्ञा गांव से 26 किलोमीटर दूर शिपकिला बॉर्डर पहुंचा जा सकता है। करीब 2 किलोमीटर आगे चीन का पहला गांव शिपकी है, जहां पर चीन का ट्रेड सेंटर है।
शिपकी से 2 किलोमीटर पीछे भारत की तरफ छप्पन नामक जगह पर भारत का ट्रेड सेंटर खुलना है, लेकिन भारत अभी इसका निर्माण नहीं करवा सका है। हालांकि, सरकार ने सेंटर बनाने के लिए कवायद शुरू कर दी है।
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक कारोबार (रुपये में)
वर्ष 2013 : 03,84,85,792 निर्यात, 03,83,82,110 आयात
वर्ष 2014 : 03,83,51,173 निर्यात, 03,85,11,186 आयात
वर्ष 2015 : 05,01,05,609 निर्यात, 04,36,05,900 आयात
वर्ष 2016 : 04,40,02,656 निर्यात, 04,55,93,300 आयात
वर्ष 2017 : 22,38,000 निर्यात, 36,83,000 आयात
भारत जल्द खोलेगा ट्रेड सेंटर
किन्नौर के उपायुक्त डॉ. नरेश कुमार लट्ठ ने कहा कि इस साल डोकलाम में चीन सीमा विवाद से कारोबार में कमी दर्ज की गई है। भारत की तरफ से भी ट्रेड सेंटर के लिए बजट और जमीन का प्रावधान कर दिया गया है। जल्द ही सेंटर खुलेगा, जिससे लोगों को फायदा होगा।
‘सरकार सुने तो सुधर जाएगी हमारी आर्थिकी’
ग्राम पंचायत नमज्ञा के पूर्व प्रधान नरबू छोरिया, कारोबारी सुरेंद्र नेगी, सोनम हिशे, राजकुमार नेगी, होजर निमा, जसवंत सिंह, सूरज प्रकाश नेगी, राजेश कुमार नेगी आदि ने कहा कि अगर सरकार लाइव स्टाक के आयात-निर्यात पर प्रतिबंध हटा दे और ट्रेड सेंटर बना दे तो लोगों की आर्थिकी मजबूत होगी।
यही नहीं, किन्नौर के लोगों को दिल्ली, मुंबई और चंडीगढ़ से चाइनीज ट्रेड मार्क लगाकर नकली सामान बेचने वाले कारोबारियों की लूट खसोट से बच सकते हैं। इन कारोबारियों ने कहा कि डोकलाम विवाद से कारोबार घटा है।
कहा कि हर बार चीन के चोख, तियांग, गायंग, टुनजु, सारकुंग सहित चीन के बड़े शहरों से भी कारोबारी हर साल कारोबार के लिए दस्तक देते थे, लेकिन इस साल डोकलाम विवाद से कारोबारियों की संख्या घटी है।