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घंडल में न्यायिक अकादमी के प्रशासनिक खंड का लोकार्पण
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला
Updated Sun, 01 Jul 2018 12:42 PM IST
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घंडल में न्यायिक अकादमी के प्रशासनिक खंड का लोकार्पण किया गया। सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश और हिमाचल हाईकोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश कुरियन जोसेफ ने कहा है कि श्रेष्ठ न्यायिक प्रणाली के लिए अधिवक्ताओं को न केवल बुद्धिजीवी होना चाहिए, बल्कि सामाजिक रूप से भी प्रबुद्ध होना चाहिए।
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शनिवार को राजधानी शिमला के समीप घंडल में न्यायिक अकादमी के प्रशासनिक खंड का न्यायाधीश कुरियन जोसेफ और मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने लोकार्पण किया। इस भवन का निर्माण 81 करोड़ रुपये की लागत से किया गया है।
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इस अवसर पर जोसेफ ने कहा कि न्यायिक अधिकारियों तथा अधिवक्ताओं को नवीनतम जानकारी से अवगत करवाने के लिए नियमित रूप से कार्यशालाओं, कांफ्रेंस और सेमीनारों का आयोजन किया जाना चाहिए। अधिवक्ताओं के लिए नियमित प्रशिक्षण कार्यक्रम आज के समय में नितांत आवश्यक है।
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न्यायिक प्रणाली के सुधार के लिए हरसंभव सहायता: जयराम
उन्होेंने कहा कि न्यायिक अकादमी एक मनमोहक और शांत स्थान पर स्थित है। अकादमी अधिवक्ताओं को अपने ज्ञान को बढ़ाने के लिए श्रेष्ठ संस्थान साबित होगी।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने कहा कि प्रदेश सरकार राज्य में न्यायिक प्रणाली के सुधार के लिए हरसंभव सहायता प्रदान करेगी। प्रदेश में ईमानदार और कर्मठ न्यायिक प्रणाली स्थापित है।
इसके फलस्वरूप राज्य की न्यायपालिका में वर्ष 2016 में कुल 206727 लंबित मामलों में से पांच वर्ष से अधिक समय से मात्र 5.96 प्रतिशत मामले लंबित हैं। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने वर्ष 2016 में भारत में अधीनस्थ न्यायालयों से संबंधित प्रकाशित रिपोर्ट में बताया है कि उत्तरी पूर्वी राज्यों को
छोड़कर हिमाचल प्रदेश पुराने मामलों के संदर्भ में सर्वाधिक परिणाम प्रदान करने वाला राज्य है। उन्होंने कहा कि अकादमी के निर्माण के लिए 165 करोड़ रुपये पहले ही स्वीकृत कर दिए गए हैं। हाईकोर्ट के न्यायाधीश एवं न्यायिक अकादमी के अध्यक्ष धर्म चंद चौधरी ने गण्यमान्यों का स्वागत किया।
कार्यक्रम में प्रदेश उच्च न्यायालय के न्यायाधीश सुरेश्वर ठाकुर, विवेक सिंह, अजय मोहन गोयल, संदीप शर्मा, चंद्रभूषण बरोवालिया सहित गुजरात मानवाधिकार आयोग की अध्यक्ष न्यायमूर्ति अभिलाषा कुमारी, नगर निगम की महापौर कुसुम सदरेट, एडवोकेट जनरल अशोक शर्मा सहित कई वरिष्ठ अधिवक्ता मौजूद रहे।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने कहा कि प्रदेश सरकार राज्य में न्यायिक प्रणाली के सुधार के लिए हरसंभव सहायता प्रदान करेगी। प्रदेश में ईमानदार और कर्मठ न्यायिक प्रणाली स्थापित है।
इसके फलस्वरूप राज्य की न्यायपालिका में वर्ष 2016 में कुल 206727 लंबित मामलों में से पांच वर्ष से अधिक समय से मात्र 5.96 प्रतिशत मामले लंबित हैं। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने वर्ष 2016 में भारत में अधीनस्थ न्यायालयों से संबंधित प्रकाशित रिपोर्ट में बताया है कि उत्तरी पूर्वी राज्यों को
छोड़कर हिमाचल प्रदेश पुराने मामलों के संदर्भ में सर्वाधिक परिणाम प्रदान करने वाला राज्य है। उन्होंने कहा कि अकादमी के निर्माण के लिए 165 करोड़ रुपये पहले ही स्वीकृत कर दिए गए हैं। हाईकोर्ट के न्यायाधीश एवं न्यायिक अकादमी के अध्यक्ष धर्म चंद चौधरी ने गण्यमान्यों का स्वागत किया।
कार्यक्रम में प्रदेश उच्च न्यायालय के न्यायाधीश सुरेश्वर ठाकुर, विवेक सिंह, अजय मोहन गोयल, संदीप शर्मा, चंद्रभूषण बरोवालिया सहित गुजरात मानवाधिकार आयोग की अध्यक्ष न्यायमूर्ति अभिलाषा कुमारी, नगर निगम की महापौर कुसुम सदरेट, एडवोकेट जनरल अशोक शर्मा सहित कई वरिष्ठ अधिवक्ता मौजूद रहे।