शिमला: आम बजट में पर्यटन उद्योग के हाथ खाली, कारोबारी निराश
बजट में पर्यटन उद्योग का कोई जिक्र न होने से प्रदेश के पर्यटन कारोबारी निराश हैं। सरकार ने ई-पासपोर्ट देने की बात जरूर कही है लेकिन पर्यटन कारोबारियों का कहना है कि इससे प्रदेश के पर्यटन कारोबार को कोई लाभ नहीं होगा।
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बीते दो सालों से कोरोना संकट से जूझ रहे पर्यटन उद्योग को केंद्र सरकार ने आम बजट में कोई राहत नहीं दी है। बजट में पर्यटन उद्योग का कोई जिक्र न होने से प्रदेश के पर्यटन कारोबारी निराश हैं। सरकार ने ई-पासपोर्ट देने की बात जरूर कही है लेकिन पर्यटन कारोबारियों का कहना है कि इससे प्रदेश के पर्यटन कारोबार को कोई लाभ नहीं होगा। पर्यटन कारोबारियों ने बजट को झुनझुना बताया है। कोरोना वायरस संक्रमण के चलते हिमाचल का पर्यटन कारोबार वर्ष 2020 की शुरुआत से प्रभावित है। दो वर्षों से सैलानियों की आमद में भारी कमी के कारण पर्यटन कारोबारियों को बड़ा नुकसान झेलना पड़ा है। विदेशी सैलानियों की आमद अब तक शुरू नहीं हो पाई है। पर्यटन कारोबारियों को उम्मीद थी कि कोरोना काल में सर्वाधिक प्रभावित पर्यटन उद्योग की बजट में सरकार सुध लेगी, लेकिन मंगलवार को उन्हें निराशा ही मिली। बड़ी संख्या में बेरोजगारों को रोजगार देने वाले टूरिज्म सेक्टर की बजट में अनदेखी से पर्यटन कारोबारी मायूस हैं।
पर्यटन उद्योग को बजट में मिला झुनझुना : बांबा
पर्यटन उद्योग की दृष्टि से बजट में सिर्फ झुनझुना मिला है। होटल के कमरों पर जीएसटी की सीमा 1000 से बढ़ाकर 2000 होने की उम्मीद थी। छोटे होटलों, ढाबों और रेस्टोरेंट के लिए फूड सेल इनपुट पर जीएसटी टैक्स क्रेडिट भी नहीं मिला। टूरिज्म को इन्फ्रास्ट्रक्चर इंडस्ट्री का दर्जा न मिलने से निराशा हुई है।
अश्वनी बांबा, अध्यक्ष फेडरेशन ऑफ होटल एंड रेस्टोरेंट एसोसिएशन हिमाचल प्रदेश
पर्यटन के लिहाज से निराश करने वाला बजट : मनु
कोविड संकट के बाद घरेलू पर्यटन को प्रमोट करने के लिए जीएसटी की दरों में कटौती की जरूरत थी। थाईलैंड और मलेशिया से प्रतिस्पर्धा के लिए जीएसटी 18 फीसदी से घटाकर 5 फीसदी किया जाना चाहिए था। ऐसा होने से होटलों के कमरों के रेट कम होते और सैलानियों की आमद बढ़ती। - मनु सूद, महासचिव ट्रेवल एजेंट्स एसोसिएशन
बजट में टूरिज्म इंडस्ट्री को कोई राहत नहीं : गोपाल
केंद्र के बजट में टूरिज्म इंडस्ट्री के लिए कोई राहत नहीं मिली है। कोरोना काल के बाद जीएसटी की दरों में कटौती की उम्मीद थी। नुकसान झेलने वाले पर्यटन कारोबारियों के लिए राहत पैकेज की घोषणा न होने से मायूसी हाथ लगी है। हालांकि, देश की बात करें तो बजट देश को विकास की राह पर ले जाने वाला है। - गोपाल अग्रवाल, मुख्य सलाहकार टूरिज्म इंडस्ट्री स्टेक होल्डर्स एसोसिएशन
पर्यटन के लिए बजट में कुछ भी नहीं : सेठ
बजट देखकर ऐसा लग रहा है, जैसे सरकार को पर्यटन के बारे में बिलकुल ही जानकारी नहीं है। कई सालों से पर्यटन को बजट में कुछ नहीं मिल रहा है। देश की जीडीपी में करीब 10 फीसदी योगदान देने वाले उद्योग को भुला दिया गया है। प्रदेश सरकार ने भी सपने ही दिखाए, राहत कोई नहीं दी। - मोहिंद्र सेठ, अध्यक्ष टूरिज्म इंडस्ट्री स्टेक होल्डर्स एसोसिएशन हिमाचल प्रदेश