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चरीडुघ में कुर्सी-पालकी ही सहारा, क्या करे ग्रामीण बेचारा
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चरीडुघ गांव के घायल युवक को कुर्सी के सहारे अस्पताल ले जाते हुए।
- फोटो : Mandi
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द्रंग (मंडी)। जोगिंद्रनगर विधानसभा क्षेत्र की कधार पंचायत के वार्ड नंबर-1 सरी के दुर्गम गांव चरीडुघ, बरवाहटू और कंडयाहलु के ग्रामीण आज भी नारकीय जीवन जीने को मजबूर हैं। भाग्यरेखा कही जाने वाली सड़क से महरूम होने के कारण ग्रामीण कुर्सी, चारपाई और पालकी पर ही निर्भर हैं।
यानी गांवों में कोई बीमार पड़ जाए या फिर चोटिल हो जाए तो उसे कुर्सी, चारपाई या पालकी पर ही चार किलोमीटर दूर सड़क तक पहुंचाया जाता है।
वीरवार को भी ऐसा ही वाकया पेश आया। चरीडुघ गांव में एक युवक पेड़ से टहनी गिरने से घायल हो गया। उसे अस्पताल ले जाने के लिए ग्रामीणों को कुर्सी पर बांस के डंडे बांधकर सड़क तक पहुंचाना पड़ा। पगडंडियां इतनी संकरी और खतरनाक हैं कि जरा सी लापरवाही पर जान पर बन आती है। चार किलोमीटर का पैदल सफर करीब ढाई घंटे में तय हुआ।
सड़क तक पहुंचाकर घायल को जोगिंद्रनगर नागरिक अस्पताल में भर्ती करवाया गया। कई बार घायल या बीमार लोग रास्ते में ही दम तोड़ जाते हैं। लोक निर्माण विभाग जोगिंद्रनगर के अधिशासी अभियंता संजीव कुमार सूद ने बताया कि फॉरेस्ट क्लीयरेंस जब तक नहीं होती, तक तक सड़क का निर्माण करना मुश्किल है। मामला विधायक प्राथमिकता में डाला गया है।
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गुम्मा या घटासनी पढ़ते हैं बच्चे
भूप सिंह, शेष राम, भागी राम, कमला देवी और विमला आदि ने बताया कि उच्च शिक्षा के लिए बच्चे चार से पांच किलोमीटर दूर गुम्मा या घटासनी स्कूल जाते हैं। बीच में जंगल होने के कारण जानवरों से खतरा रहता है। गावों के लिए पूर्व की वीरभद्र सिंह सरकार के समय में प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के तहत 2.87 करोड़ का बजट प्रावधान किया गया है। दुर्भाग्य है कि सड़क निर्माण के लिए फॉरेस्ट क्लीयरेंस नहीं मिल पाई।
सीएम ने दिया था आश्वासन
बीते वर्ष लोकसभा उपचुनाव में सरी वार्ड नंबर-1 के मतदाताओं ने मतदान का बहिष्कार किया। मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने स्वयं पंचायत के उपप्रधान के दूरभाष पर ग्रामीणों को शीघ्र सड़क मुहैया करवाने का आश्वासन दिया। इसके बाद ग्रामीणों ने मतदान में हिस्सा लिया। अब तक मुख्यमंत्री अपना वादा पूरा नहीं कर पाए हैं। ग्रामीणों ने चेताया कि गांव के लिए शीघ्र सड़क नहीं बनी तो आगामी विस चुनाव का बहिष्कार किया जाएगा।
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यानी गांवों में कोई बीमार पड़ जाए या फिर चोटिल हो जाए तो उसे कुर्सी, चारपाई या पालकी पर ही चार किलोमीटर दूर सड़क तक पहुंचाया जाता है।
वीरवार को भी ऐसा ही वाकया पेश आया। चरीडुघ गांव में एक युवक पेड़ से टहनी गिरने से घायल हो गया। उसे अस्पताल ले जाने के लिए ग्रामीणों को कुर्सी पर बांस के डंडे बांधकर सड़क तक पहुंचाना पड़ा। पगडंडियां इतनी संकरी और खतरनाक हैं कि जरा सी लापरवाही पर जान पर बन आती है। चार किलोमीटर का पैदल सफर करीब ढाई घंटे में तय हुआ।
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सड़क तक पहुंचाकर घायल को जोगिंद्रनगर नागरिक अस्पताल में भर्ती करवाया गया। कई बार घायल या बीमार लोग रास्ते में ही दम तोड़ जाते हैं। लोक निर्माण विभाग जोगिंद्रनगर के अधिशासी अभियंता संजीव कुमार सूद ने बताया कि फॉरेस्ट क्लीयरेंस जब तक नहीं होती, तक तक सड़क का निर्माण करना मुश्किल है। मामला विधायक प्राथमिकता में डाला गया है।
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गुम्मा या घटासनी पढ़ते हैं बच्चे
भूप सिंह, शेष राम, भागी राम, कमला देवी और विमला आदि ने बताया कि उच्च शिक्षा के लिए बच्चे चार से पांच किलोमीटर दूर गुम्मा या घटासनी स्कूल जाते हैं। बीच में जंगल होने के कारण जानवरों से खतरा रहता है। गावों के लिए पूर्व की वीरभद्र सिंह सरकार के समय में प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के तहत 2.87 करोड़ का बजट प्रावधान किया गया है। दुर्भाग्य है कि सड़क निर्माण के लिए फॉरेस्ट क्लीयरेंस नहीं मिल पाई।
सीएम ने दिया था आश्वासन
बीते वर्ष लोकसभा उपचुनाव में सरी वार्ड नंबर-1 के मतदाताओं ने मतदान का बहिष्कार किया। मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने स्वयं पंचायत के उपप्रधान के दूरभाष पर ग्रामीणों को शीघ्र सड़क मुहैया करवाने का आश्वासन दिया। इसके बाद ग्रामीणों ने मतदान में हिस्सा लिया। अब तक मुख्यमंत्री अपना वादा पूरा नहीं कर पाए हैं। ग्रामीणों ने चेताया कि गांव के लिए शीघ्र सड़क नहीं बनी तो आगामी विस चुनाव का बहिष्कार किया जाएगा।