फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Shimla News ›   Improved variety of apple prepared from natural farming, cost also reduced

उम्मीद की मशाल

Sun, 03 Jul 2022 11:51 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Sun, 03 Jul 2022 11:51 PM IST
विज्ञापन
Improved variety of apple prepared from natural farming, cost also reduced
बागवान तिलकराज वर्मा प्राकृतिक खेती से पैदा कर रहे उन्नत किस्म का सेब
शिमला। शिमला जिले के बागवान तिलकराज वर्मा ने प्राकृतिक खेती अपनाकर अपने बगीचे में सेब की उन्नत किस्में तैयार की हैं। खाद, कीटनाशक सहित अन्य रसायनों का प्रयोग किए बिना सेब की स्पर और गाला किस्में तैयार कर अन्य बागवानों के लिए मिसाल बने हैं। बागवानी कैंप आयोजित कर तिलकराज अब अन्य बागवानों को भी प्राकृतिक खेती अपनाने के लिए प्रेरित कर रहे हैं।
विज्ञापन

नारकंडा विकास खंड के तहत हथिया गांव के निवासी तिलकराज ने बताया कि मार्च 2019 में पूर्व राज्यपाल आचार्य देवव्रत के कुरुक्षेत्र स्थित फार्म हाउस में प्राकृतिक तरीके से गेहूं और चने की खेती देख उन्हें बागवानी में प्राकृतिक खेती करने की प्रेरणा मिली। प्रयोग के तौर पर उन्होंने अपने बगीचे में फसल न देने वाले 10 पेड़ों पर प्राकृतिक खेती का प्रयोग किया। अगले ही साल इन पेड़ों पर फसल आनी शुरू हो गई। इसके बाद बगीचे में लगाए उन्नत किस्म के 50 नए पौधों पर प्राकृतिक खेती शुरू की। सार्थक परिणाम आने के बाद अब 12 बीघा में स्पर, गाला, रायल, टाइडमैन और प्लम के करीब 650 पौधों पर पूरी तरह प्राकृतिक खेती के जरिये फसल तैयार कर रहे हैं। तिलकराज ने बताया कि इस साल टाइडमैन सेब के 90 बॉक्स किंगल के सेब कारोबारी ने उनके बागीचे में आकर ही 1200 रुपये प्रति बॉक्स खरीद लिए। इससे न सिर्फ उनका कार्टन का खर्चा बचा, बल्कि ट्रांसपोटेशन के पैसे की भी बचत हो गई।
विज्ञापन

लागत घटी, सालाना 30 हजार की बचत
तिलकराज ने बताया कि प्राकृतिक खेती अपनाने के बाद सेब उत्पादन की लागत कम हो गई है। सालाना करीब 30 हजार रुपये खाद और दवाओं पर खर्च होते थे, अब इस पैसे की बचत हो रही है। सेब के तौलिए में लगने वाले राजमाह और मक्की की कमाई अतिरिक्त है।
विज्ञापन
विज्ञापन

बीमारियों से बचाव के लिए सप्त धान्य अंकुर अर्क
सेब की फसल को बीमारियों से बचाने के लिए तिलकराज अपने बगीचे में लस्सी, जीवामृत्त और सप्त धान्य अंकुर अर्क का इस्तेमाल करते हैं। इनका दावा है कि माइट के कारण सेब के पत्ते पीले पड़ने की समस्या को प्राकृतिक उपचार से रोका जा सकता है। इतना ही नहीं सूखे के कारण फल में दरारें पड़ने की समस्या से बचाव और पौधों में नमी बनाए रखने के लिए मल्चिंग की जा सकती है। हर 15 दिन में सप्त धान्य अंकुर अर्क का छिड़काव करने से समस्या खत्म हो सकती है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed