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किसी की मजबूरी का ऐसा 'सौदा' हैरान कर देगा आपको

Mon, 27 Oct 2014 10:25 AM IST
प्रेम प्रताप सिंह/ अमर उजाला,शिमला
प्रेम प्रताप सिंह/ अमर उजाला,शिमला Updated Mon, 27 Oct 2014 10:25 AM IST
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Illegal recovery from cancer and HIV patients in hospitals

हिमाचल प्रदेश में खून जांच के नाम पर जमकर खेल हो रहा है। प्रदेश के सबसे बड़े अस्पताल आईजीएमसी, टांडा मेडिकल कॉलेज समेत 24 जोनल अस्पतालों में 24 घंटे में महज तीन घंटे तक ही मरीजों के खून की जांच मुफ्त की जा रही है।

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इसके बाद कैंसर से लेकर एचआईवी और गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले मरीजों से लैब में वसूली की जा रही है। खास बात यह है कि इस तथ्य से अवगत होते हुए भी स्वास्थ्य महकमे ने मुंह मोड़ लिया है।
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प्रदेश सरकार की ओर से मेडिकल कॉलेज और जोनल अस्पतालों में खून जांच करने के लिए दो तरह की व्यवस्था है। स्वास्थ्य महकमे के कर्मी सुबह 9 बजे से 12 बजे तक खून का सैंपल लेते हैं। इस दौरान ही मरीजों की मुफ्त जांच हो पाती है।
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इसके बाद आने वाले हर तरह के मरीजों से शुल्क लिया जाता है। अगर कोई मरीज बाहर के डॉक्टर से चेक करा रहा है तो उससे ओवर चार्जिंग तक की जा रही है। यहां तक कि कैंसर जैसे गंभीर मरीजों को भी नहीं बख्शा जा रहा है।

मरीजों से मजाक है ऐसी व्यवस्था

Illegal recovery from cancer and HIV patients in hospitals

सरकारी अस्पतालों में आने वाले कैंसर, एचआईवी और गरीबी रेखा से नीचे रहने वाले मरीजों के लिए मुफ्त में खून जांच करने की व्यवस्था है। इन मरीजों से कोई फीस नहीं ली जा सकती। बावजूद इसके ऐसे मरीजों से सूबे के अस्पतालों में जमकर वसूली हो रही है।

हिमाचल के दो मेडिकल कॉलेजों और 24 जोनल अस्पतालों में बने लैबों में मरीजों के खून जांच करने के लिए स्वास्थ्य विभाग के कर्मियों को महज तीन घंटे का समय दिया गया है जबकि, 21 घंटे खून का सैंपल लेने के लिए निजी लैब को दिया गया है। जहां पर हर मरीज से शुल्क लिया जा रहा है।

मुफ्त में मुहैया कराया स्पेस

Illegal recovery from cancer and HIV patients in hospitals

प्रदेश के अस्पतालों में आने वाले मरीजों से खून जांच के नाम पर जमकर वसूली की जा रही है। यह एक गंभीर मामला है। इस मामले की शिकायत मुख्यमंत्री से की जाएगी। साथ ही निष्पक्ष जांच कराने की मांग की जाएगी। - एसएस जोगटा, अध्यक्ष हिमाचल प्रदेश, अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ

आईजीएमसी, टांडा मेडिकल कॉलेज सहित सभी 24 जोनल अस्पतालों में सरकार की ओर से निजी लैब को मुफ्त में स्पेस उपलब्ध कराया गया है, जिसका केवल किराया प्रति माह लाखों रुपये है। इसके अलावा उन्हें मुफ्त में बिजली और पानी की सुविधा भी मुहैया कराई जा रही है। इसके बावजूद यह तस्‍वीर है।

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री कौल सिंह ठाकुर ने पूरे मामले पर कहा कि गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले मरीजों की मुफ्त में टेस्ट करने की व्यवस्था है। इसके लिए निजी लैब को सरकार धन देती है। इसके बावजूद अगर टेस्ट करने के नाम पर शुल्क लिया जा रहा है तो गलत है। इसे चेक कराया जा रहा है।

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