अफसरों और नेताओं की मिलीभगत से बढ़ रहा अवैध खनन का गोरखधंधा
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हिमाचल में खनन माफिया से सरकारी तंत्र की मिलीभगत और राजनीतिक छत्रछाया के नीचे बीबीएन में सरकारी और निजी जमीन का अवैध दोहन किया जा रहा है। विधायक की पत्नी के टिप्पर पकड़े जाने से सवाल उठना शुरू हो गए हैं।
कार्रवाई क्या चालान तक रहेगी। कब तक चलेगा रहेगा अवैध धंधा। और लोगों पर कब कसेगी नकेल। बीबीएन में कुल 37 क्रशर हैं। दोनों राजनैतिक दलों से संबंधित नेताओं से कई क्रशर जुड़े हैं। बद्दी औद्योगिक शहर में कुल 13 क्रशर हैं। छह बंद हैं, जबकि सात में से तीन क्रशर मालिकों के पास खनन की लीज है।
चार अन्य क्रशरों को कंस्ट्रक्शन कार्य के माध्यम से निकलने वाले रॉ मैटीरियल को फिनिश गुड्स में बदलने की परमिशन है। बता दें कि रेत-बजरी निकाल जमीनों में कई फीट गहरे गड्ढे बनाए जा रहे हैं। खनन सामग्री हरियाणा पहुंचाई जा रही है।
गोरखधंधों से जुड़े रसूखदारों के हौसले इतने बुलंद हैं कि पुलिस की तमाम चालान और गाड़ियों के जब्त करने की मुहिम मजाक बन कर रह गई है। अपने स्तर पर पुलिस कार्रवाई कर रही है, लेकिन अन्य संबंधित विभाग कार्रवाई का अधिकार होने के बावजूद तमाशा देख रहे हैं।
सरकारी और राजनीतिक शरण के बीच अवैध खनन के काले कारोबार में लीज की जमीन से जुड़े लोगों से लेकर क्रशर तथा मालवाहक वाहनों मालिकों की चांदी हो रही है।
अवैध खनन को ऐसे दे रहे अंजाम
बीबीएन की सड़कों से दूसरे राज्यों तक रेत-बजरी को बिना सप्लीमेंटरी एम फार्म, एक ही फार्म पर गाड़ियों के कई चक्कर तथा फार्म के साथ ओवरलोडिंग कर पहुंचाया जा रहा है। कुछ गाड़ियों के चालान हो रहे हैं।
लेकिन अधिकतर को बिना जांच के छोड़ा जा रहा है। अवैध कारोबार लीज की जमीन के साथ सरकारी, निजी जमीनों पर बेरोकटोक चल रहा है। खनन को लीज पर दी गई जमीन का समय पर निरीक्षण तक नहीं होता।
तीन मीटर तक खुदाई की परमिशन
लीज की जमीन पर अधिकृत कारोबारी को तीन मीटर गहराई तक बिना जेसीबी मशीन का प्रयोग किए खुदाई की परमिशन है। इसका दुरुपयोग कर तीन मीटर से गहरी खुदाई बीबीएन में की जा रही है।
लीज की जमीन पर अवैध रूप से की गहरी खुदाई को बाद में मिट्टी से भर दिया जाता है। किसान या जमीन के मालिक को पैदावार से अधिक पैसा मिलता है। गड्ढे खोदने के बाद बंजर भूमि पर आलीशान होटल या भवन खड़े किए जा रहे हैं।
क्रशरों में जनरेटर से तैयार होता है दो नंबरी माल
क्रशर मालिक विभागीय कार्रवाई से बचने को खनन के रॉ मैटीरियल को फिनिश मैटीरियल में तबदील करने को जनरेटर से क्रशरों को चला रहे हैं, ताकि विभाग को अवैध खनन पर कार्रवाई के लिए सबूत न मिले।
सरकारी खजाने को भी चपत
सरकार से खनन को लीज पर मिली जमीन से माल को ओवरलोडिंग की आड़ में बेचकर सरकारी खजाने को चूना लगाया जा रहा है। सरकार को सप्लीमेंटरी एम फार्म के माध्यम से प्रति मीट्रिक टन 60 रुपये रॉयल्टी मिलती है। खनन माफिया लीज की जमीन अथवा साथ लगती सरकारी तथा निजी जमीनों पर अवैज्ञानिक रूप से खनन कर बाहरी राज्य के टिपर-ट्रैक्टरों से माल को क्रशरों तक पहुंचाते हैं।
कई विभागों को अधिकार, पर कार्रवाई कर रहे कम
पुलिस, माइनिंग विभाग के अलावा वन विभाग, लोनिवि, आईपीएच, जिला प्रशासन, उद्योग विभाग को चालान का अधिकार है। पुलिस ने साल 2016 के सात माह में 28.56 लाख रुपये जुर्माना वसूला। पुलिस के एक अधिकारी ने अकेले 87 चालान कर 16.44 लाख जुर्माना वसूला, जबकि माइनिंग विभाग ने बीबीएन में सात माह में 90 चालान कर 5.75 लाख का जुर्माना वसूला।
पुलिस कानूनी दायरे में अवैध खनन पर हरसंभव कार्रवाई कर रही है। अवैध खनन के मामलों में एक सप्लीमेंटरी एम फार्म के कई बार प्रयोग, बिना डेट और बैक डेट के फार्म प्रयोग करने के मामले सामने आए हैं। सात माह में बद्दी एसडीपीओ के तहत 26 लाख के चालान किए हैं। - गौरव सिंह, एएसपी बद्दी
विभाग अवैध खनन पर हरसंभव कार्रवाई कर रहा है। सुरक्षा प्रबंधों की कमी के चलते रात्रि के समय माफिया पर कार्रवाई करना जोखिमपूर्ण रहता है। समय-समय पर कार्रवाई की जा रही है। - सरित चंद्र, माइनिंग ऑफिसर