वैज्ञानिकों की बड़ी खोज: घी, मीट, चॉकलेट और मछली लीवर की चर्बी रोकने में सक्षम
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देसी घी, पनीर, दूध, चॉकलेट, रेड मीट और प्रोटीन युक्त दालें चर्बी बढ़ाने ही नहीं, रोकने में भी सक्षम हैं। इन खाद्य पदार्थों का अगर आप संतुलित मात्रा में सेवन करें तो इसमें मौजूद जिंक सप्लीमेंट आपके लीवर के फैट बढ़ने नहीं देते। आईआईटी मंडी के स्कूल ऑफ बेसिक साइंस के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. प्रोसेनजीत और सीएसआईआर-आईआईटीआर (भारतीय विषविज्ञान अनुसंधान संस्थान) के वैज्ञानिक डॉ. देवव्रत घोष ने अपने शोध में खुलासा किया है कि जिंक ऑक्साइड के नैनो पार्टिकल लीवर में चर्बी जमने से रोक सकते हैं।
साथ ही शराब का सेवन नहीं करने वालों में लीवर की चर्बी की बीमारियों (एनएएफएलडी) की रोकथाम करने में भी सक्षम हैं। शोध करने वाली टीम ने कोशिका और चूहा मॉडल का प्रयोग कर पाया कि जिंक सप्लीमेंट (नैनो पार्टिकल या बतौर नमक) लीवर में चर्बी जमा होने से रोकता है। साथ ही इंसुलिन सेंस्टिविटी बढ़ाता है। उनका शोध हाल ही में एक जर्नल-नैनोमेडिसिन: नैनोटेक्नोलॉजी, बायोलॉजी एंड मेडिसिन में प्रकाशित हुआ है।
इसलिए बढ़ रही लीवर की बीमारियां
लीवर इंसान के शरीर के अंदर सबसे बड़ा अंग है। यह पित्त का स्राव करता है और ग्लाइकोजेन के रूप में ग्लूकोज जमा करता है। विटामिन, मिनरल्स और एमीनो एसिड को जैव वैज्ञानिक के रूप में अवशोषण योग्य बनाता है। पहले लीवर की बीमारियां मुख्यतया हेपेटाइटिस वायरस के संक्रमण और मद्यपान की वजह से होती थीं, लेकिन आज गतिहीन लाइफ स्टाइल और खान-पान की गलत आदतों से मद्यपान नहीं करने वालों में भी लीवर की बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं।
एक साल में ढाई लाख ने तोड़ा दम
विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट के अनुसार 2017 में भारत में 259,749 लोगों की लीवर की बीमारियां से मौत हुई। लगभग 120 मिलियन भारतीयों के एनएएफएलडी पीड़ित होेने का अनुमान है। मोटापा और डायबिटीज के मरीजों में यह समस्या अधिक हो सकती है। फैटी लीवर से कैंसर भी हो सकता है।
इस तरह किया शोध
कोशिका परीक्षण में शोधकर्ताओं ने पाया कि जिंक ऑक्साइड नैनो पार्टिकल से उनमें चर्बी का जमना रुक गया। चूहों के मॉडल में देखा गया कि जिंक सप्लीमेंट ने चर्बी युक्त आहार पर पले चूहों के लीवर में चर्बी के जमने को बढ़ाने वाले सेल्युलर फैक्टर की रोकथाम कर दी।
जिंक सप्लीमेंट आहार देकर मोटा किए गए चूहों में ऊर्जा के निगेटिव बैलेंस और हेपेटाइटिक लाइपोजेनिक नियंत्रण के माध्यम से लीवर में चर्बी की बीमारियों में सुधार कर सकते हैं।