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आईआईटी मंडी ने तैयार किया फार्मूला: हिमालयी क्षेत्रों में पहाड़ों को दरकने से बचाएगा सीमेंटिंग सॉल्यूशन

Tue, 12 Apr 2022 11:06 AM IST
Krishan Singh संवाद न्यूज एजेंसी, मंडी
संवाद न्यूज एजेंसी, मंडी Published by: Krishan Singh Updated Tue, 12 Apr 2022 11:06 AM IST
सार

 हिमाचल प्रदेश के आईआईटी मंडी ने प्राकृतिक संसाधनों से ऐसा सीमेंटिंग सॉल्यूशन तैयार किया है, जिसे संवेदनशील पहाड़ों में डालकर मिट्टी को मजबूत किया जा सकेगा। भूमि कटान को रोकने के लिए भी यह सॉल्यूशन बेहतर उपाय है।

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IIT Mandi prepared formula: Cementing solution will save mountains from cracking in Himalayan regions
आईआईटी मंडी ने सीमेंटिंग सॉल्यूशन तैयार किया - फोटो : संवाद

विस्तार

बरसात और बर्फबारी के मौसम में हिमालयी क्षेत्रों में दरकते पहाड़ों से होने वाले जानमाल के नुकसान को अब रोका जा सकेगा। हिमाचल प्रदेश के आईआईटी मंडी ने प्राकृतिक संसाधनों से ऐसा सीमेंटिंग सॉल्यूशन तैयार किया है, जिसे संवेदनशील पहाड़ों में डालकर मिट्टी को मजबूत किया जा सकेगा। भूमि कटान को रोकने के लिए भी यह सॉल्यूशन बेहतर उपाय है। खास बात यह है कि इसमें खतरनाक रसायनों का इस्तेमाल नहीं किया गया है। आईआईटी के निदेशक प्रो. लक्ष्मीधर बैहरा के मुताबिक पूरी दुनिया में मिट्टी के स्थिरीकरण की पर्यावरण अनुकूल और स्थायी तकनीक माइक्रोबियल इंड्यूस्ड कैल्साइट प्रेसिपिटेशन (एमआईसीपी) पर परीक्षण हो रहे हैं।

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इसमें बैक्टीरिया का उपयोग कर मिट्टी के सूक्ष्म छिद्रों में कैल्शियम कार्बोनेट (कैल्साइट) बनाया जाता है, जो अलग-अलग कणों को आपस में मजबूती से जोड़ता है। परिणामस्वरूप मिट्टी/जमीन की पकड़ मजबूत होती है। कैल्साइट प्रेसिपिटेशन एफिसियंसी (सीपीई) कई मानकों पर निर्भर करती है। जिनमें सीमेंट सॉल्यूशन का कंसंट्रेशन, कॉलम से होकर प्रवाह की दर, लागू आपूर्ति दर, पोर वॉल्यूम और रेत के कणों के मुख्य गुण शामिल हैं। शोध में सीपीई पर विभिन्न मानकों के प्रभाव जानने की कोशिश की गई है। इसके सकारात्मक परिणाम निकले हैं। आईआईटी मंडी की शोधकर्ता टीम के निष्कर्ष हाल ही में जियो टेक्निकल एंड जियो इन्वायरनमेंटल इंजीनियरिंग ऑफ अमेरिकन सोसायटी ऑफ सिविल इंजीनियर्स जर्नल में प्रकाशित किए गए हैं। 
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शोधकर्ताओं का दावा
शोध के प्रमुख आईआईटी मंडी के स्कूल ऑफ बेसिक साइंस के एसोसिएट प्रो. डॉ. कला वेंकट उदय और सह लेखक उनके एमएस स्कॉलर दीपक मोरी हैं। इनका दावा है कि मिट्टी के स्थिरीकरण की स्थायी तकनीक विकसित करने की दिशा में कार्यरत हैं। इसमें बैक्टीरिया एस पाश्चरी का उपयोग कर रहे हैं, जो यूरिया को हाइड्रोलाइज कर कैल्साइट बनाते हैं। इस प्रक्रिया में खतरनाक रसायन इस्तेमाल नहीं होता है और प्राकृतिक संसाधनों का सतत उपयोग भी किया जा सकता है। 
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बड़े हादसे

  1. 13 अगस्त 2017 : पहाड़ दरकने से मंडी के कोटरोपी में हिमाचल पथ परिवहन निगम की चंबा से मनाली आ रही बस मलबे में दफन हो गई थी। इस हादसे में 50 लोगों की जान गई। 
  2. 26 जुलाई 2021: किन्नौर जिले के बटसेरी में पहाड़ से पर्यटकों के वाहनों पर चट्टानें गिर गई थीं। इस हादसे में नौ सैलानियों की मौत हो गई थी। 
  3. 10 अगस्त 2021 : किन्नौर के निगलुसरी में पहाड़ी दरकने से परिवहन निगम की बस सहित 6 अन्य वाहन भूस्खलन की चपेट आ गए थे। इसमें 28 लोगों ने जान चली गई थी। 13 लोगों को रेस्क्यू कर निकाला गया था। 


एसोसिएट प्रो. डॉ. कला वेंकट उदय और सह लेखक उनके एमएस स्कॉलर दीपक मोरी

 

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