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आईआईटी मंडी: दिमाग में बिना करंट दौड़ाए न्यूरो विशेषज्ञ समझ सकेंगे मस्तिष्क के विकार
Tue, 21 Dec 2021 05:00 AM IST
अरविन्द ठाकुर
संवाद न्यूज एजेंसी, मंडी
संवाद न्यूज एजेंसी, मंडी
Published by: अरविन्द ठाकुर
Updated Tue, 21 Dec 2021 05:00 AM IST
सार
अभी न्यूरो रोगियों के दिमाग को समझने के लिए ट्रांसक्रॉनियल इलेक्ट्रिकल स्टिमुलेशन (टीईएस) तकनीक का सहारा लिया जाता है। इसमें रोगी की खोपड़ी पर कई इलेक्ट्रोड लगाए जाते हैं और करंट के प्रवाह को मस्तिष्क में प्रवेश करवाकर ब्रेन के कार्यों को मैप किया जाता है। लेकिन इसमें खतरा ज्यादा रहता है।
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ब्रेन स्ट्रोक- सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
अब ब्रेन स्ट्रोक का कारण बनने वाली दिमाग की गतिविधियों, दिमागी चोट (न्यूरो इंजरी) और न्यूरो साइकैट्रिक (मानसिक विकारों) को मस्तिष्क में बिजली प्रवाह के बगैर समझना आसान होगा। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) मंडी, नेशनल ब्रेन रिसर्च सेंटर भारत और यूनिवर्सिटी ऑफ बफेलो, यूएसए ने नॉन-इनवेसिव ब्रेन सिमुलेशन तकनीकों पर अध्ययन किया है, जो मनोचिकित्सकों के लिए न्यूरो के मामले समझना बेहद आसान कर देगा।
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अभी न्यूरो रोगियों के दिमाग को समझने के लिए ट्रांसक्रॉनियल इलेक्ट्रिकल स्टिमुलेशन (टीईएस) तकनीक का सहारा लिया जाता है। इसमें रोगी की खोपड़ी पर कई इलेक्ट्रोड लगाए जाते हैं और करंट के प्रवाह को मस्तिष्क में प्रवेश करवाकर ब्रेन के कार्यों को मैप किया जाता है। लेकिन इसमें खतरा ज्यादा रहता है। बिजली का उपयोग खतरनाक हो सकता है। यह शोध ब्रेन स्टिमुलेशन जर्नल में प्रकाशित हो चुका है। इसे आईआईटी मंडी के डॉ. शुभजीत रॉय चौधरी, नेशनल ब्रेन रिसर्च सेंटर भारत की डॉ. याशिका अरोड़ा और बफेलो यूनिवर्सिटी यूएसए के डॉ अनिर्बान दत्ताब ने तैयार किया है।
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हमने चार डिब्बों के साथ न्यूरोवैस्कुलर यूनिट (एनवीयू) के एक शारीरिक रूप से विस्तृत गणितीय मॉडल का अनुकरण किया। सिनैप्टिक स्पेस, एस्ट्रोसाइट स्पेस, पेरिवास्कुलर स्पेस और आर्टेरियोल स्मूथ मसल सेल स्पेस, जिसे न्यूरोवैस्कुलर यूनिट्स या एनवीयू कहा जाता है। गणितीय मॉडल में चार नेस्टेड एनवीयू कंपार्टमेंटल पाथ-वे के लिए विद्युत क्षेत्र का अनुकरण करने के लिए अलग-अलग आवृत्तियों (0.1 हर्ट्ज से 10 हर्ट्ज) के गड़बड़ी के अनुप्रयोग शामिल थे और आवृत्तियों के जवाब में रक्त वाहिका व्यास में परिवर्तन का विश्लेषण किया। - डॉ. शुभजीत रॉय चौधरी, एसोसिएट प्रोफेसर, स्कूल ऑफ कंप्यूटिंग एंड इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग, आईआईटी
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ब्रेन स्ट्रोक के कारण
ब्रेन स्ट्रोक की बीमारी आमतौर पर मस्तिष्क में ऑक्सीजन की कमी के कारण होती है। ऐसे समय में नसों में खून का प्रवाह कम होने लगता है और वे सूखने लगती हैं। ऑक्सीजन और खून की कमी के कारण ब्रेन सुचारू रूप से काम करना बंद कर देता है। इसके अलावा जब लंबे समय तक ब्रेन को खून और ऑक्सीजन की सप्लाई नहीं होती है, तो ब्रेन सेल्स और टिशू मरने लगते हैं। इसकी वजह से ब्रेन ठीक तरह से काम नहीं करता है और स्ट्रोक जैसे हालात पैदा हो जाते हैं।
ट्रॉमेटिक ब्रेन इंजरी के लक्षण
सिरदर्द और उलटियां होने लगती हैं। बोलने में दिक्कत होती है और चक्कर आने लगते हैं। शरीर पर कंट्रोल खत्म सा हो जाता है और बैलेंस बनाने में दिक्कत होती है। आंखों से धुंधला दिखाई देने लगता है और कानों में हमेशा ऐसी आवाज आती है जैसे कुछ बज रहा हो। मुंह का स्वाद बदल जाता है और लाइट जलने या तेज आवाज से भी दिक्कत होने लगती है। सिर में अगर जोर का झटका लगे या हल्की सी चोट भी लग जाए तब भी डॉक्टर से जरूर संपर्क करें। हो सकता है कि बाहर ज्यादा चोट न दिख रही हो लेकिन अंदर काफी गहरी चोट लगी हो।