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IGMC: फर्जी डॉक्टरों से राहत दिलाने के लिए अस्पताल प्रबंधन ने लिया बड़ा फैसला
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
Updated Mon, 18 Jul 2016 10:33 AM IST
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आईजीएमसी
- फोटो : फाइल फोटो
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इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज में अब हर डॉक्टर के लिए आईडी गले में डालकर उपचार करना जरूरी होगा। अस्पताल के दूसरे स्टाफ के लिए भी यह व्यवस्था लागू होने जा रही है। अस्पताल में फर्जी डॉक्टरों के मामले सामने आने के बाद प्रबंधन ने यह फैसला लिया है। इसके लिए फैकल्टी, प्राचार्य, विभागाध्यक्ष, पीजी डॉक्टर, टेकनीशियन के अलावा स्टाफ नर्सों को अलग- अलग कलर की आईडी बैच पहनकर अपनी सेवाएं देनी होंगी।
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प्रबंधन का कहना है कि इससे अस्पताल में मरीजों को डॉक्टरों की पूरी जानकारी होगी तथा फर्जी लोगों के चक्कर में अपने पैसे लूटाने वाले गरीब और असहाय लोग इस तरह की घटनाओं से बच सकेंगे। अस्पताल में फर्जी लोगों का गिरोह लूट के चक्कर में वार्ड ओपीडी के बाहर बैठे मरीजों की रैकी करते हैं।
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जब इनके उपचार में देरी होती है तो मजबूरन शातिरों की बातों में आकर यह लोग ठगी का शिकार हो जाते हैं। गिरोह का निशाना ज्यादातर पहली बार अस्पताल आए लोग तथा बुजुर्ग लोग होते हैं। अस्पताल में अभी तक ज्यादातर लूट तथा चोरी के मामले भी इन्हीं लोगों के सामने आते हैं।
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अस्पताल के सीसीटीवी कैमरों की क्लीयरेंस सही न होने के कारण इनकी पहचान नही हो पाती है। लेकिन अब इन डॉक्टरों के विभाग की पहचान और बैच पर जानकारी होने के कारण इस तरह की घटनाएं काफी हद तक कम हो पाएंगी।
अस्पताल में हर डॉक्टर को बैच दिया जाएगा। नए बैच डॉक्टरों को एक माह में उपलब्ध करवा दिए जाएंगे। एक महीने में इस प्रक्रिया को शुरू कर दिया जाएगा। - डॉ. रमेश चंद, - वरिष्ठ चिकित्सा अधीक्षक, आईजीएमसी
अस्पताल में इससे पहले मरीजों को केवल बड़े डॉक्टर का ही नाम पता होता था। जबकि उनके केसों को अस्पताल में पीजी और सीनियर तथा जूनियर रेजिडेंट डॉक्टर हैंडल करते हैं। अब मरीज हर डॉक्टर का नाम जान सकेगा।
अस्पताल में सीनियर डॉक्टरों समेत 2000 का स्टाफ
आईजीएमसी में टीचिंग फैकेल्टी के 200, पीजी स्टूडेंट सहित अन्य डॉक्टरों का स्टाफ 600 और पैरामेडिकल, टेकनीशियन और स्टाफ नर्स सहित करीब दो हजार लोगों का अस्पताल में स्टाफ है।
अलग-अलग कैटेगरी को मिलेंगे कलर
अस्पताल में प्राचार्य, सीनियर डॉक्टर के अलावा पीजी छात्रों को अलग- अलग कलर के स्ट्रेप दिए जाएंगे ताकि विभाग के डॉक्टरों को भी इनका पता चल सके।
मरीजों के साथ नही होगी बदसलूकी
अस्पताल में कई मर्तबा अनपढ़ लोगों के साथ डॉक्टरों की ओर से बदतमीजी की जाती है ऐसे में साथ के अन्य लोग डॉक्टर का नाम जानने के बाद उनकी सूचना विभाग के अधिकारियों को दे सकते हैं।
आईजीएमसी में आज से गेट पास के साथ एंट्री
प्रदेश के सबसे बड़े स्वास्थ्य संस्थान आईजीएमसी में मरीजों के लिए गेट पास सुविधा शुरू की गई है। अस्पताल के पुराने भवन में बने डी ब्लॉक के मेल- फिमेल आर्थों, आई, ईएनटी और मेडिसन के वन, टू, थ्री और फोर यूनिट में मरीज के केवल एक परिचित के पास गेटपास होगा।
अस्पताल प्रबंधन ने इसके अलावा ई ब्लॉक के स्किन तथा चेस्ट वार्ड में सुविधा शुरू कर दी है। अस्पताल प्रबंधन का तर्क है कि मरीजों को मिलने वाली यह सुविधा अगर सफल रहती है तो दूसरे अस्पताल भी इसे देखते हुए अपने अस्पतालों में यह सिस्टम शुरू कर सकते है।
आईजीएमसी में मौजूदा समय मरीजों के बिस्तरों की संख्या करीब 650 के करीब है। वार्ड में मरीजों का हाल जानने के लिए रोजाना सैकड़ों लोग पहुंचते हैं। वार्ड में भीड़ के कारण इससे अन्य लोगों में भी संक्रमण फैलने का खतरा होता है, जिसके डॉक्टरों को
भी सुरक्षा के लिए वार्ड में एंट्री से पहले मुंह को मास्क से ढंककर मरीजों का उपचार करना पड़ता है। लेकिन अब भीड़ को कम करने के लिए प्रबंधन ने एक नायाब तरीका ढूंढा है। इस तरीके से अस्पताल में भीड़ तो कम होगी बल्कि लोगों के शोर से मरीजों को होने वाली परेशानी से भी निजात मिलेगी।
डी और ई ब्लॉक में शुरू किया गया सिस्टम
गेट पास सुविधा को डी और ई ब्लॉक में सोमवार से शुरू कर दिया जाएगा। वार्ड में मरीज के साथ केवल एक व्यक्ति को ही पास उपलब्ध होगा। जिससे कि वार्ड में तीमारदारों की भीड़ कम रहेगी और मरीज को भरपूर इलाज मिलेगा। -डॉ. राहुल राव, - डिप्टी एमएस, आईजीएमसी
सर्जरी के चारों यूनिट में पास पर एंट्री
सर्जरी विभाग के यूनिट वन, टू, थ्री और फोर यूनिट में गेटपास सिस्टम शुरू कर दिया है।
लेमिनेटिड होगा पास
अस्पताल में मरीजों के परिजनों को लेमिनेटिड पास उपलब्ध करवाया जाएगा। पास में मरीजों का बेड नंबर तक लिखा होगा।