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अरे वाह! अब बिना मिट्टी और कम पानी में भी तैयार होंगी सब्जियां

Thu, 19 May 2016 10:26 AM IST
अर्चना जनदेव/अमर उजाला, सोलन
अर्चना जनदेव/अमर उजाला, सोलन Updated Thu, 19 May 2016 10:26 AM IST
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Hydroponic method for growing plants using mineral nutrient solutions in water without soil
वाईएस परमार विवि में हाइड्रापोनिक विधि से तैयार की जा रहीं सब्जियां। - फोटो : अमर उजाला

अब सब्जी उगाने के लिए मिट्टी की जरूरत नहीं पड़ेगी। पानी का भी कम प्रयोग होगा। डा. वाईएस परमार औद्योनिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय ने हाइड्रापोनिक विधि में यह मुमकिन कर दिखाया है। इसमें पॉलीहाउस में प्लास्टिक की एक विशेष आकार की पाइपों का जाल बनाया जाएगा। इसमें विशेष मात्रा में एक बार पानी डाला जाएगा। यह दस से पंद्रह दिन तक रोटेशन में चलता रहेगा।

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इसी पानी में वे पोषक तत्व मिलाए जाएंगे, जो मिट्टी में होते हैं। पूरा सिस्टम कंप्यूटरीकृत होगा। इसकी मदद से बिना बीमारी के सब्जियों का उत्पादन किया जा सकेगा। मौसम के बदलाव, दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों और सिंचाई के अभाव वाले प्रदेश के इलाकों में यह तकनीक लाभदायक हो सकती है, लेकिन इसके लिए किसानों को जेब अधिक ढीली करनी होगी। एक सामान्य पॉलीहाउस के लिए इस तकनीक की व्यवस्था करने में करीब दो लाख रुपये खर्च आएगा।
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हालांकि, वैज्ञानिक कोशिश कर रहे हैं कि किस तरह कम लागत में किसान इस तकनीक को अपना सकें। विवि के प्रोजेक्ट को सूचना एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय दिल्ली ने हरी झंडी दे दी है। प्रोजेक्ट के लिए 90 लाख की मंजूरी मिल गई है। इसमें 50 लाख विवि को मंत्रालय से जारी हो गए हैं। इससे इस तकनीक को अधिक सुगम और सस्ता बनाने को आगामी शोध होगा।

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10 से 15 दिन में एक बार होगी सिंचाई

Hydroponic method for growing plants using mineral nutrient solutions in water without soil
वाईएस परमार विवि में हाइड्रापोनिक विधि से तैयार की जा रहीं सब्जियां। - फोटो : अमर उजाला

जल प्रवाह तकनीक (हाइड्रापोनिक विधि) पूरी तरह कंप्यूटरीकृत है। इससे किसान बिना मिट्टी के पालक, पत्ता गोभी, शिमला मिर्च, टमाटर और अन्य पत्तेदार सब्जियां उगाकर मुनाफा कमा सकेंगे। पौधों को मिट्टी से होने वाली बीमारियों का खतरा भी नहीं होगा। पौधो को एक बार पानी देने के बाद 10 से 15 दिन सिंचाई की व्यवस्था नहीं होगी।

सब्जियों की गुणवत्ता अच्छी

नौणी विवि के कुलपति डा. विजय सिंह ठाकुर ने कहा कि इस विधि का नौणी विवि में शुभारंभ किया जा चुका है। अगर कामयाबी मिली तो यह तकनीक कृषि क्षेत्र में क्रांतिकारी साबित होगी। नौणी विवि मृदा विज्ञान विभाग और पॉलीहाउस विशेषज्ञ डा. आरएस

सिपहिया ने बताया कि जल प्रवाह तकनीक को आम किसानों तक पहुंचाने के लिए विवि प्रयासरत है। इसे अधिक सरल, उपयोगी और किफायती बनाने के लिए प्रयास जारी हैं। केंद्र ने 90 लाख का प्रोजेक्ट स्वीकृत किया है। इसके उपकरण मोहली की एक निजी कंपनी से मिलकर तैयार किए हैं। तीन साल तक रिसर्च जारी रहेगी।

 

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