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Shimla News: अष्टमी पर शहर के देवालयों में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़
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कन्याओं का पूजन कर लोगों ने मांगी सुख स्मृद्धि
नवरूपों का पूजन करने से मिलता अश्वमेध यज्ञ बराबर फल : चक्रवर्ती
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। चैत्र नवरात्र पर बुधवार को अष्टमी के दिन बड़ी संख्या में लोगों ने कन्या पूजन किया। लोगों ने पूजन कर मां दुर्गा से सुख, समृद्धि, यश, कीर्ति और आरोग्य जीवन की कामना की।
अष्टमी पर माता दुर्गा के महागाैरी रूप की पूजा की गई। नवरात्र व्रत कन्या पूजन के बिना अधूरा माना जाता है। लोगों ने कन्याओं का पूजन कर उन्हें विभिन्न प्रकार के उपहार भेंट किए। मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा के लिए अष्टमी और नवमी के दिन नौ कन्याओं को देवियों का रूप मानकर उनकी पूजा की जाती है। साथ में एक बालक की पूजा होती है। लोगों ने मंदिर के बाहर बैठे गरीब परिवार की बच्चियों को प्रसाद, चुनरी, शृंगार का सामान, चॉकलेट, टॉफियां और खिलौने आदि भेंट किए। शहर के प्रसिद्ध मंदिर कालीबाड़ी में अष्टमी पर भारी संख्या में श्रद्धालु पूजा करने पहुंचे थे। सुबह 6:00 बजे मंदिर के कपाट खुलते ही लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी थी।
मंदिर में सुबह 9:00 से 10:30 बजे तक शुभ मुहूर्त में कन्या पूजन किया गया। दोपहर को भोग आरती के बाद लगभग दो घंटे तक महिलाओं ने मंदिर परिसर में भजन कीर्तन किया। मंदिर के पंडित मुक्ति चक्रवर्ती ने बताया कि अष्टमी पर माता दुर्गा के महागौरी रूप की पूजा की गई। बताया कि माता दुर्गा के नवरूप की पूजा करने से अश्वमेध यज्ञ के बराबर फल प्राप्त होता है। नवरात्र पर अष्टमी और नवमी पर कन्या पूजन किया जाता है। व्यापारी सुखविंद्र सिंह ने बताया कि चैत्र नवरात्रों की तुलना में 30 फीसदी सामान की बिक्री हुई। माता की चुनरी से लेकर शृंगार के सामान में बीते वर्ष की तुलना में 10 फीसदी तक कीमतें बढ़ी हैं।
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नवरूपों का पूजन करने से मिलता अश्वमेध यज्ञ बराबर फल : चक्रवर्ती
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। चैत्र नवरात्र पर बुधवार को अष्टमी के दिन बड़ी संख्या में लोगों ने कन्या पूजन किया। लोगों ने पूजन कर मां दुर्गा से सुख, समृद्धि, यश, कीर्ति और आरोग्य जीवन की कामना की।
अष्टमी पर माता दुर्गा के महागाैरी रूप की पूजा की गई। नवरात्र व्रत कन्या पूजन के बिना अधूरा माना जाता है। लोगों ने कन्याओं का पूजन कर उन्हें विभिन्न प्रकार के उपहार भेंट किए। मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा के लिए अष्टमी और नवमी के दिन नौ कन्याओं को देवियों का रूप मानकर उनकी पूजा की जाती है। साथ में एक बालक की पूजा होती है। लोगों ने मंदिर के बाहर बैठे गरीब परिवार की बच्चियों को प्रसाद, चुनरी, शृंगार का सामान, चॉकलेट, टॉफियां और खिलौने आदि भेंट किए। शहर के प्रसिद्ध मंदिर कालीबाड़ी में अष्टमी पर भारी संख्या में श्रद्धालु पूजा करने पहुंचे थे। सुबह 6:00 बजे मंदिर के कपाट खुलते ही लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी थी।
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मंदिर में सुबह 9:00 से 10:30 बजे तक शुभ मुहूर्त में कन्या पूजन किया गया। दोपहर को भोग आरती के बाद लगभग दो घंटे तक महिलाओं ने मंदिर परिसर में भजन कीर्तन किया। मंदिर के पंडित मुक्ति चक्रवर्ती ने बताया कि अष्टमी पर माता दुर्गा के महागौरी रूप की पूजा की गई। बताया कि माता दुर्गा के नवरूप की पूजा करने से अश्वमेध यज्ञ के बराबर फल प्राप्त होता है। नवरात्र पर अष्टमी और नवमी पर कन्या पूजन किया जाता है। व्यापारी सुखविंद्र सिंह ने बताया कि चैत्र नवरात्रों की तुलना में 30 फीसदी सामान की बिक्री हुई। माता की चुनरी से लेकर शृंगार के सामान में बीते वर्ष की तुलना में 10 फीसदी तक कीमतें बढ़ी हैं।
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