एचआरटीसी कंडक्टर की ट्रेनिंग छोड़ रहे युवा, ये रही वजह
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बेरोजगार युवा एचआरटीसी कंडक्टर प्रशिक्षण से किनारा कर रहे हैं। एचआरटीसी मंडल हमीरपुर के तहत पांच डिपो में कौशल विकास के तहत प्रशिक्षण ले रहे प्रशिक्षु परिचालकों की निर्धारित सीटें नहीं भर पाई हैं। परिचालक का प्रशिक्षण लेने में युवा खास रुचि नहीं दिखा रहे हैं। प्रत्येक डिपो में प्रशिक्षु परिचालकों के पहले बैच में 50 सीटें निर्धारित की गई थीं।
पांचों डिपो में से एक भी डिपो में पूरी सीटें नहीं भर पाई हैं। नालागढ़ और बिलासपुर डिपो में तो महज 50 फीसदी ही सीटें भर पाई हैं। करीब 13 प्रशिक्षणार्थी बीच में ही प्रशिक्षण छोड़ चुके हैं। निगम प्रबंधन की मानें तो युवाओं को कौशल विकास के तहत ढाई माह का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसके बाद इन्हें रेगुलर परिचालक के पद पर नियुक्ति का कोई प्रावधान नहीं है।
युवाओं को प्रति घंटा 15 रुपये मानदेय दिया जा रहा है। 8 घंटे ड्यूटी के बाद इन्हें 120 रुपये दिहाड़ी दी जाती है। महंगाई के दौर में इतना कम मानदेय मिलने के कारण भी युवा कंडक्टर का प्रशिक्षण लेने में रुचि नहीं दिखा रहे। इस कारण सभी एचआरटीसी के डिपो में प्रशिक्षु परिचालकों की पूरी सीटें नहीं भर पाई हैं।
इन डिपो में इतनी सीटें खाली
एचआरटीसी के ऊना डिपो में 50 सीटों में से 40 भर पाई हैं, जबकि दो युवाओं ने बीच में ही प्रशिक्षण छोड़ दिया है। नालागढ़ में महज 28 ही युवा प्रशिक्षण ले रहे हैं। बिलासपुर डिपो में 50 सीटों पर 42 युवा प्रशिक्षण ले रहे हैं। देहरा डिपो में 39 युवाओं ने आवेदन किए थे। इनमें से तीन युवा बीच में ही प्रशिक्षण छोड़ चुके हैं। हमीरपुर में 43 युवा प्रशिक्षण ले रहे थे।
इनमें से 8 ने बीच में ही प्रशिक्षण छोड़ दिया है। अब डिपो में 35 युवा प्रशिक्षण ले रहे हैं। पांचों डिपो में प्रत्येक में पहले बैच में 50 सीटों का प्रावधान है। कुछ युवा बीच में किन्हीं कारणों से प्रशिक्षण छोड़ चुके हैं। युवाओं को कौशल विकास के तहत प्रशिक्षण दिया जा रहा है।- दलजीत सिंह, डीएम एचआरटीसी