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गड़बड़झाला! तकनीकी विवि को आवंटित वन भूमि कर दी कारोबारियों के नाम

Sat, 31 Mar 2018 10:31 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, हमीरपुर
अमर उजाला ब्यूरो, हमीरपुर Updated Sat, 31 Mar 2018 10:31 AM IST
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HPTU hamirpur Fraud on the name of land

हिमाचल प्रदेश तकनीकी विश्वविद्यालय हमीरपुर को आवंटित जमीन के रकबे में बड़ा गड़बड़झाला सामने आया है। आरोप हैं कि राजस्व विभाग के कुछ अधिकारियों और कर्मचारियों की मिलीभगत से वन भूमि को कुछ कारोबारियों के नाम कर दिया गया।

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निशानदेही में यह मामला पकड़ में आ गया। बेशकीमती जमीन की एक बंजर भूमि के साथ अदला-बदला की गई मामले का पता लगते ही तकनीकी विश्वविद्यालय ने जिला प्रशासन हमीरपुर को इसकी सूचना दी। इसके बाद जिला प्रशासन ने मामले की बैठा दी है। जांच के बाद राजस्व विभाग के अधिकारियों व कर्मचारियों पर भी गाज गिर सकती है।
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यह है सारा मामला
तकनीकी विवि को जिला प्रशासन ने जो जमीन आवंटित की है, उसके नजदीक करीब 8 लोगों को वर्ष 1975 में पट्टे पर जमीन आवंटित हुई थी। हमीरपुर जिला के चार कारोबारियों ने अलाटियों से करीब साढ़े चार कनाल भूमि खरीद ली, जिसकी रजिस्ट्री भी हो चुकी है।
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लेकिन इसी बीच राजस्व विभाग की मिलीभगत के चलते खरीदारों को उस खसरा नंबर की रजिस्ट्री कर दी गई, जो तकनीकी विवि को अलॉट हुआ था। हैरानी की बात है कि संबंधित खसरा नंबर पर खुदरा दरख्तान यानी वन भूमि लिखा है। इस खसरा नंबर को राजस्व विभाग ने वन एवं पर्यावरण मंत्रालय के पास स्वीकृति के लिए भेजा हुआ है।

सवाल यह उठ रहा है कि अगर राजस्व विभाग ने वन भूमि का एफसीए केस बनाकर मंत्रालय को भेजा हुआ है तो उक्त खसरा खरीदारों के नाम कैसे कर दिया। जबकि मंत्रालय को क्लीयरेंस भेजने वाले और खरीदारों की रजिस्ट्री उन्हीं राजस्व विभाग के अधिकारियों ने की है। बताया जा रहा है कि राजस्व विभाग के कुछ अधिकारियों का हमीरपुर से तबादला हो चुका है।

यह हो सकता है मकसद

HPTU hamirpur Fraud on the name of land

जमीन की अदला-बदली करने का मकसद आने वाले समय में विवि की जमीन पर कोई होटल, रेस्तरां, शॉपिंग मॉल, हॉस्टल, बहुमंजिला भवन खड़ा करना हो सकता है।

चूंकि जिन खरीदारों ने दडूही पंचायत में अलाटियों से जमीन खरीदी है, वह विवि से करीब 45-50 मीटर की दूरी पर है। अब खरीदार जिस जमीन पर अपना हक जता रहे हैं, वह विवि कैंपस से बिल्कुल साथ लगती है। जब विवि का अपना कैंपस शुरू हो जाएगा तो वहां पर आने वाले समय में बड़ा कारोबार शुरू हो सकता है।

1300 में से 52 कनाल भूमि मिली है विवि को
तकनीकी विवि को ग्राम पंचायच दडूही में भूमि आवंटित हुई है। 1300 कनाल भूमि में से 52 कनाल भूमि तकनीकी विवि के नाम हो चुकी है। जबकि शेष वन भूमि को तकनीकी विवि के नाम करने के लिए जिला प्रशासन ने फाइल वन एवं पर्यावरण मंत्रालय को वर्ष 2014 से भेजी हुई है। तकनीकी विवि प्रशासन ने मिल चुकी 52 कनाल भूमि पर भवन निर्माण का कार्य शुरू कर दिया है।

तकनीकी विवि की निशानदेही के दौरान पाया गया है कि जो भूमि खसरा नंबर फॉरेस्ट क्लीयरेंस के लिए वन एवं पर्यावरण मंत्रालय को भेजा गया है, उसे कुछ व्यवसायियों के नाम कर दिया गया है।

राजस्व विभाग से रिपोर्ट मांगी गई है, जिस भी राजस्व अधिकारी की इसमें संलिप्तता पाई जाएगी, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। - राकेश कुमार प्रजापति, उपायुक्त हमीरपुर

तकनीकी विवि ने निशानेदही के दौरान यह मामला पकड़ा है। विवि ने जिस खसरा नंबर की फाइनल फॉरेस्ट क्लीयरेंस के लिए वन एवं पर्यावरण मंत्रालय को भेजी है, वह जमीन हमीरपुर के कुछ कारोबारियों के नाम कर दी गई है।

सवाल यह है कि राजस्व विभाग ने पहले खुद ही एफसीए केस बनाया और कुछ वर्ष के बाद वन भूमि को निजी लोगों के नाम कागजों में कर दिया। उपायुक्त हमीरपुर के ध्यान में इस मामले को लाया जा चुका है। - डॉ. विक्रम महाजन, कुलसचिव, हिप्र तकनीकी विवि हमीरपुर

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