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कोरोना संकट के बीच 710 करोड़ रुपये बढ़ गया हिमाचल के बैंकों का एनपीए

Thu, 25 Mar 2021 11:02 AM IST
Krishan Singh अनिमेष कौशल, अमर उजाला, शिमला
अनिमेष कौशल, अमर उजाला, शिमला Published by: Krishan Singh Updated Thu, 25 Mar 2021 11:02 AM IST
सार

  • हिमाचल में बढ़ा बैंकों का एनपीए
  • तिमाही में कम ऋण वसूली ने बैंकर्स की चिंता बढ़ाई
  •  प्रदेश के बैंकों का एनपीए 7.47 फीसदी हुआ

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hpsbc meeting decisions: npa of himachal banks increase 710 crores during corona crisis
एनपीए(सांकेतिक)

विस्तार

कोरोना संकट के बीच हिमाचल प्रदेश के बैंकों का एनपीए (नॉन परफार्मिंग असेट्स) 710.58 करोड़ रुपये तक बढ़ गया। जून 2020 में प्रदेश के बैंकों का एनपीए 3551.53 करोड़ रिकॉर्ड हुआ था। तीन तिमाही के बाद यह आंकड़ा 4262.11 करोड़ पहुंच गया। प्रदेश के बैंकों का एनपीए 7.47 फीसदी हो गया है। अप्रैल से दिसंबर 2020 के बीच की तीन तिमाही में कम ऋण वसूली ने बैंकर्स की चिंता बढ़ा दी है।

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राज्य सहकारी बैंकों का एनपीए 3.42 फीसदी बढ़ा। सबसे खराब हालत कांगड़ा केंद्रीय सहकारी (केसीसी) बैंक की है। इस बैंक का एनपीए नौ माह में 8.06 फीसदी बढ़ा। राजधानी शिमला में हुई राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति की 159वीं बैठक में यह खुलासा हुआ। कोरोना से बचाव के लिए प्रदेश में 22 मार्च, 2020 को जनता कर्फ्यू लगने के साथ ही लॉकडाउन लग गया था। जून 2020 तक हालात ज्यादा खराब थे। काम-धंधे बंद होने से लोगों को बैंकों का ऋण चुकाना मुश्किल हो गया।
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जुलाई के बाद हालात कुछ सामान्य हुए, लेकिन वित्तीय हालात पटरी पर नहीं लौटे, जिसके चलते बैंकों के एनपीए में बढ़ोतरी दर्ज हुई है। केसीसी बैंक, कृषि ग्रामीण विकास बैंक, जोगिंद्रा केंद्रीय सहकारी बैंक का एनपीए बढ़ गया। तीनों बैंकों पर ग्रेडिंग गिरने का खतरा मंडराना शुरू हो गया। सहकारी बैंकों की एनपीए राशि 2075 करोड़ पहुंच गई है। राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति की ओर से जारी यह आंकड़े ऋण वसूलने में नाकाम रहने वाले बैंकों के लिए अलार्मिंग हैं। बैंकों को रिजर्व बैंक इंडिया की कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है। 
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विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए होना होगा गंभीर
अतिरिक्त मुख्य सचिव वित्त प्रबोध सक्सेना ने कहा कि सहकारी बैंक प्रबंधनों को जनता में विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए ऋण वसूली के लिए गंभीर होना होगा।  

तीन किस्तें टूटते ही एनपीए हो जाते हैं खाते
बैंकों द्वारा ग्राहकों को विभिन्न योजनाओं के तहत ऋण दिए जाते हैं। ऋण वसूली के लिए प्रतिमाह की किस्त तय होती है। लगातार तीन किस्तें नहीं आने पर खाता एनपीए हो जाता है।

एनपीए बढ़ने का यह होता है नुकसान
एनपीए बैंक का वह कर्ज होता है जो डूब गया है, जिसके वापस आने की उम्मीद कम होती है। इससे बैंक की वित्तीय स्थिति खराब होती है।

प्रदेश के बैंकों का एनपीए...

तिमाही रिपोर्ट    एनपीए राशि (करोड़ में)
दिसंबर 2019    3838        
मार्च 2020    4012
जून 2020    3531
सितंबर 2020    3630
दिसंबर 2020    4262 

बैंक    एनपीए जून 2020 (फीसदी)    एनपीए दिसंबर 2020 (फीसदी)    वृद्धि (फीसदी)
राज्य सहकारी बैंक    8.21    8.24    0.03
कांगड़ा सहकारी बैंक    22.19    30.25    8.06
कृषि एवं ग्रामीण बैंक    32.43    37.69    5.26
जोगिंद्रा बैंक    6.96    12.06    5.01    

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