शीत सत्र: बिखरे विपक्ष ने तपोवन में भी निकाला सत्तारूढ़ दल का पसीना
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हिमाचल विधानसभा के तपोवन में संपन्न हुए छह दिन के शीत सत्र में विपक्ष का बिखरा कुनबा सत्ता पक्ष का पसीना निकालने में कामयाब रहा। संख्या बल में सत्ता पक्ष के आधे कांग्रेस विधायक सदन के नेता जयराम की तरफ एक के बाद एक तीर फेंकते रहे, मुख्यमंत्री भी अपनी गहरी सूझबूझ से इन्हें काटने में सफल दिखे। कई बार वह अपने मंत्रियों को घिरते देख उनकी ढाल बनते रहे।
वीरभद्र की गैर हाजिरी में अपने कांग्रेस विधायक दल को एक होने को हांकते नेता प्रतिपक्ष मुकेश अग्निहोत्री ही सरकार पर सबसे ज्यादा हमलावर रहे और माकपा के अकेले आक्रामक विधायक का भी उन्हें पूरा साथ मिला। इसके अलावा भीतर भीषण घमासान छेड़ने वाले ‘माननीयों’ में बाहर हंसी-ठिठोली भी खूब चली। उनके डांस करते फोटो-वीडियो भी वायरल हुए, जिस पर जनता को सोशल मीडिया पर खरी-खरी सुनाने का मौका मिला।
वर्ष 2006 में धर्मशाला के प्रयास भवन से शुरू हुई शीत सत्र की यह परंपरा एक दशक से ज्यादा समय से चिन्मय आश्रम से सटे हिमाचल विधानसभा के तपोवन सदन में निभाई जा रही है। जनता में ही नहीं, कुछ नेताओं में भी हर बार की तरह इस सत्र के आयोजन में होने वाली फिजूलखर्ची की बहस उठी। इस बार भी इस रस्म पर जनता के पांच-छह करोड़ रुपये बहने की चर्चा रही।
हालांकि, प्रदेश के क्षेत्रीय संतुलन की दुहाई देकर होने वाले इस सत्र की सार्थकता यह भी है कि कांगड़ा और इसके निकटवर्ती जिलों के लोग यहां आकर हर साल अपनी समस्याएं मंत्रियों, विधायकों के सामने रखते हैं, उनका समाधान तलाशते हैं। अबकी भी नेताओं से बड़ी संख्या में लोग मिलते नजर आए। पुनर्वास की तलाश करते कांगड़ा के नेता राजन सुशांत ने भी पौंग विस्थापितों को साथ लेकर सदन को घेरकर उनकी दशकों पुरानी निर्वासन की पीड़ा से तपोवन को फिर तपाया।
मगर यह भी सच्चाई कि इन छह दिनों में बहुत से विषय सत्तापक्ष और विपक्ष के चुने हुए मुद्दों पर मचे हंगामे के नीचे दब गए। बहुत से सवाल नहीं पूछे जा सके। रोजाना आधा दर्जन या इससे थोड़े से अधिक जनता के सवालों पर ही सरकार के जवाब मिलते रहे। बहुत से विषयों पर चर्चा नहीं हो पाई। इन्वेस्टर्स मीट, महंगाई, अवैध खनन के अलावा सड़क, पानी, रोजगार, कानून-व्यवस्था आदि के जनता के मतलब के कुछ चुनिंदा मुद्दों पर ही बात हो पाई।
विधायकों के अपने क्षेत्रों के बहुत से सवाल भी नहीं पूछे जा सके। इतना जरूर है कि अपनी सरकार के कार्यकाल के इस तीसरे शीत सत्र में मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर भाजपा के सभी विधायकों के सुर साधकर अपनी पकड़ और मजबूत बनाते नजर आए हैं तो नेता प्रतिपक्ष मुकेश अग्निहोत्री भी कांग्रेस के अस्वस्थ चल रहे कद्दावर नेता वीरभद्र सिंह की गैर हाजिरी में अपनी हांक से विपक्ष के बिखरे कुनबे को आक्रामक रखने में सफल रहे।
तपोवन में 28 घंटे 50 मिनट चली सदन की कार्यवाही
हिमाचल विधानसभा के शीत सत्र धर्मशाला में कुल 326 प्रश्न गूंजे। इसमें 220 तारांकित और 106 अतारांकित शामिल हैं। नियम -61 के तहत 1 प्रस्ताव, नियम - 62 के तहत 10 प्रस्ताव, नियम- 61 के तहत 1 प्रस्ताव, नियम 130 के तहत 5 प्रस्ताव पर चर्चा हुई। इसके अतिरिक्त नियम 101 के तहत पिछले सत्र में प्रस्तुत संकल्प पर भी चर्चा हुई। छह दिन सदन में 28 घंटे 50 मिनट कार्यवाही चली।
पिछले 15 साल में यह सबसे अधिक कार्यवाही चलने का नया रिकॉर्ड बन गया है। शीत सत्र अभी तक चार दिन का होता था, लेकिन इस बार छह दिनों तक कार्यवाही चली। विधानसभा अध्यक्ष राजीव बिंदल ने सत्र के दौरान जानकारी दी कि चारों विधेयकों को पारित किया गया। नियम - 324 के तहत विशेष उल्लेख के माध्यम से 17 विषय सभा में उठाए गए। विधानसभा अध्यक्ष ने संसदीय कार्यमंत्री सुरेश भारद्वाज और सदन के दोनों पक्षों सहित उपाध्यक्ष का आभार जताया।
35 में 31 सीटिंग हुई इस साल
विधानसभा नियमों के तहत साल में 35 सिटिंग का होना अनिवार्य है लेकिन लोकसभा चुनाव के चलते 4 सिटिंग कम हुई है। मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने कहा कि लोकसभा चुनाव की अधिसूचना के चलते बजट सत्र कम करना पड़ा। कोशिश की जा रही थी कि सभी सिटिंग हो, लेकिन ऐसा नहीं हो पाया। अगले साल इसका ध्यान रखा जाएगा।