Paper Leak Case: सीबीआई जांच के साथ मुख्य आरोपी की आत्मसमर्पण की कहानी सवालों में, पढ़ें पूरा मामला
प्रदेश में 70 हजार से ज्यादा बेरोजगार युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने वाले पेपर लीक मामले में सीबीआई की ओर से एफआईआर के दौरान एक घटनाक्रम ध्यान खींच रहा है।
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हिमाचल प्रदेश में 70 हजार से ज्यादा बेरोजगार युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने वाले पेपर लीक मामले में सीबीआई की ओर से एफआईआर के दौरान एक घटनाक्रम ध्यान खींच रहा है। कुछ दिन पहले सीबीआई ने राज्य सरकार से पेपर लीक मामले में कुछ दस्तावेज मांगे थे ताकि एफआईआर की जा सके। जैसे ही सीबीआई ने राज्य सरकार के साथ पत्राचार किया तो 5 महीने से हथकड़ी से दूर पेपर लीक मामले का मुख्य आरोपी भरत कुमार कांगड़ा कोर्ट में आत्मसमर्पण करने पहुंच गया। सवाल उठ रहा है कि सीबीआई के हरकत में आने के बाद ही आखिर भरत कुमार ने अचानक कोर्ट में आत्मसमर्पण क्यों किया।
पांच महीने से पुलिस उसको क्यों नहीं पकड़ पाई। भरत कुमार के आत्मसमर्पण को कई बिंदुओं से जोड़कर देखा जा रहा है। भरत को पुलिस ने पेपर लीक मामले में मुख्य आरोपी माना था। भरत कुमार ने ही प्रिंटिंग प्रेस से पेपर लेकर आगे लीक किए थे। वहीं, एफआईआर दर्ज करने के बाद सीबीआई पुलिस अधिकारियों की संलिप्तता को लेकर जांच कर सकती है। पुलिस जांच के दौरान पुलिस मुख्यालय शिमला में छापेमारी नहीं हुई थी। कुछ पुलिस अधिकारियों से पूछताछ जरूर हुई थी लेकिन इसको सार्वजनिक नहीं किया गया था।
दो दिन दबाया मामला, आधी रात को दर्ज हुई एफआईआर
वर्ष 2022 में सुर्खियों में रहा पुलिस भर्ती पेपर लीक मामला पुलिस ने दो दिन तक दबाए रखा था। अमर उजाला को जब इसका पता चला तो पुलिस ने आधी रात को मामले में एफआईआर की थी। दस्तावेजों की जांच के दौरान एक पुलिस अफसर को तीन युवकों पर शक हुआ। तीनों युवाओं के 90 में से 70 अंक थे। लेकिन दसवीं की कक्षा में उनके अंक 50 फीसदी भी नहीं थे। पूछताछ में तीनों युवा फंस गए और उन्होंने माना कि लिखित परीक्षा से पहले ही 6 से 8 लाख रुपये देकर उन्हें टाइप्ड प्रश्नों के उत्तर मिल गए थे। पेपर लीक मामले को अमर उजाला ने सबसे पहले मई 2022 में उजागर किया था। इसके बाद प्रदेश सरकार ने सीबीआई को मामले की जांच करने के लिए पत्राचार किया था। 5 माह बाद सीबीआई ने मतदान के बाद एफआईआर की। नई सरकार के गठन से पहले सीबीआई की एफआईआर को कई बिंदुओं से जोड़कर देखा जा रहा है।