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हिमाचल हाईकोर्ट सख्त: घटिया दवाएं बनने पर राज्य सरकार व केंद्र से जवाब तलब, जानें क्या कहा

Sat, 25 Apr 2026 10:45 AM IST
Ankesh Dogra संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला।
संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला। Published by: Ankesh Dogra Updated Sat, 25 Apr 2026 10:45 AM IST
सार

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य में बन रही घटिया और असुरक्षित दवाओं के मामले में राज्य सरकार और केंद्र के संबंधित विभागों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। पढ़ें पूरी खबर...

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HP High Court Seeks Response from State and Central Governments Over Manufacture of Substandard Medicines
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य में बन रही घटिया और असुरक्षित दवाओं के मामले में कड़ा संज्ञान लिया है। मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश बिपिन चंद्र नेगी की खंडपीठ ने जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार और केंद्र के संबंधित विभागों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। 

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अदालत ने चिंता व्यक्त की कि ये दवाएं सार्वजनिक स्वास्थ्य और सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकती हैं। अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय (भारत सरकार) को इस मामले में प्रतिवादी के रूप में शामिल करने का आदेश दिया है।

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वहीं, अदालत ने इस मामले को इसी तरह की एक अन्य लंबित जनहित याचिका के साथ सूचीबद्ध करने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने यह कार्रवाई मुख्य न्यायाधीश को सचिवालय से प्राप्त एक पत्र और समाचार पत्रों में छपी रिपोर्टों के आधार पर की है। रिपोर्ट के अनुसार ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (डीसीजीआई) ने राज्य दवा प्राधिकरण को बद्दी, सोलन, पांवटा साहिब और कांगड़ा में 19 दवा कंपनियों की ओर से निर्मित 26 दवाओं के निर्माण और वितरण को तुरंत रोकने का निर्देश दिया है।

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तीन माह में 190 दवाएं मानकों पर नहीं उतरी खरी
हिमाचल में दवाओं के सैंपल फेल होने के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। इसी साल तीन माह में 190 दवाओं के सैंपल मानकों पर खरे नहीं पाए गए हैं। जनवरी में 71, फरवरी में 73 और मार्च में 46 दवाओं के सैंपल फेल पाए गए। इनमें निमोनिया, अल्सर, बीपी, अस्थमा, किडनी जैसी बीमारियों की दवाएं हैं।

मानव भारती विवि के प्रमोटर की संपत्तियां जब्त करने का आदेश
मानव भारती विवि सोलन से जुड़े फर्जी डिग्री घोटाले में विशेष अदालत (पीएमएलए) ने ईडी की याचिका स्वीकार करते हुए विवि के प्रमोटर मंदीप राणा की संपत्तियों को जब्त करने का आदेश जारी किया है।
 

विशेष न्यायाधीश दविंदर कुमार ने भगोड़ा आर्थिक अपराधी अधिनियम की धारा 12(2) के तहत यह आदेश दिया है। कोर्ट के इस फैसले के बाद फर्जी डिग्रियां बेचकर जुटाई संपत्तियां अब केंद्र सरकार के अधिकार में आ गई हैं। ये संपत्तियां मुक्त रूप से केंद्र सरकार को हस्तांतरित कर दी गई हैं। जांच के अनुसार यूनिवर्सिटी के मुख्य प्रमोटर राज कुमार राणा, उनकी पत्नी अशोनी कंवर और बेटे मंदीप राणा ने एजेंटों-छात्रों को मोटी रकम लेकर फर्जी डिग्री, डिप्लोमा और डीएमसी बेची थीं। 

इन फर्जी डिग्रियों को विवि के नाम पर जारी किया जाता था। जांच में 387 करोड़ के प्रॉसीड्स ऑफ क्राइम का पता चला। ये पैसे बैंक खातों में डाले और फिर परिवार की कई चल-अचल संपत्तियों में लगाए गए। मंदीप ने अवैध फंड्स को अपनी सैलरी के रूप में दिखा इनकम टैक्स रिटर्न में प्रोजेक्ट किया। वास्तव में उन्होंने यूनिवर्सिटी में कभी काम नहीं किया था। ईडी ने 29 जनवरी 2021 को प्रोविजनल अटैचमेंट ऑर्डर जारी किया था। अब तक इस मामले में करीब 200 करोड़ रुपये की संपत्तियां अटैच की जा चुकी हैं।

मंदीप और अशोनी भगोड़ा घोषित
तीन जनवरी को कोर्ट ने मंदीप राणा और अशोनी कंवर को भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित किया था, क्योंकि दोनों ऑस्ट्रेलिया में रहकर भारतीय अदालतों की प्रक्रिया से बच रहे थे और समन/वारंट की अनदेखी कर रहे थे। 16 फरवरी को ईडी ने संपत्तियों की जब्ती के लिए याचिका दायर की। 23 अप्रैल को सुनवाई के बाद कोर्ट ने ईडी की याचिका स्वीकार कर ली। कोर्ट ने शेड्यूल-ए में सूचीबद्ध सभी संपत्तियों (जो पीएमएलए के तहत पहले अटैच थीं) को जब्त कर केंद्र को सौंपने का आदेश दिया। कोर्ट ने कहा कि मंदीप ने कानूनी प्रक्रिया को जानबूझकर विफल किया है।
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