शिमला, कुल्लू में अवैध कब्जों पर आया हाईकोर्ट का बड़ा फैसला
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प्रदेश हाईकोर्ट ने वन भूमि से पेड़ काटकर अवैध ढंग से सेब के बगीचे विकसित करने के मामले में मुख्य अरण्यपाल को आदेश दिए कि वह शिमला और कुल्लू में वन भूमि पर पाए गए अवैध कब्जों को 4 सप्ताह के भीतर हटाएं।
कोर्ट ने सरकार को चेताया कि यदि हाईकोर्ट के आदेशों की अनुपालना नहीं हुई तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कोर्ट के आदेशों की अवमानना का मामला चलाया जाएगा। न्यायाधीश संजय करोल और न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई के दौरान पीसीसीएफ एसएस नेगी, शिमला सीएफ और डीएफओ ठियोग केआर कौंडल कोर्ट में हाजिर रहे।
सुनवाई के दौरान सरकार ने कोर्ट के पिछले आदेशों की अक्षरश: अनुपालना न करने पर माफी मांगी। सरकार ने बताया कि डीएफओ रोहड़ू चमन लाल का हमीरपुर किया गया तबादला आदेश रद्द कर दिया गया है।
दोनों जिलों में हैं इतने अवैध कब्जे, मांगा समय
पीसीसीएफ ने मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट को बताया कि कुल्लू जिला के 1030 व शिमला जिला के 1929 अवैध कब्जों के मामलों में वन भूमि को 4 सप्ताह के भीतर खाली करवा लिया जाएगा।
रोहड़ू के डीएफओ की ओर से बताया गया कि रोहड़ू में 10 बीघा से कम वन भूमि पर कब्जा करने वाले 1481 मामलों में बेदखली आदेश पारित किए जा चुके हैं और 10 बीघा से अधिक 418 मामलों में से 399 का निपटारा कर लिया गया है।
कोर्ट ने डीएफओ रोहड़ू को आदेश दिए कि वह 4 सप्ताह के भीतर लंबित मामलों का निपटारा करे। कोर्ट ने पीसीसीएफ को आदेश दिए कि वह रोहड़ू के निपटाए गए मामलों में 4 सप्ताह के भीतर वन भूमि को अवैध कब्जा मुक्त कराए। कोर्ट ने पीसीसीएफ सहित शिमला और कुल्लू के सभी डीएफओ को मामले की अगली सुनवाई के दौरान कोर्ट में उपस्थित रहने के आदेश भी दिए। मामले पर अगली सुनवाई 15 नवंबर को होगी।