Himachal News: हाईकोर्ट ने दी हल्की राहत, निगम को 31 मार्च तक 9 होटलों के संचालन की दी छूट, जानें पूरा मामला
प्रदेश हाईकोर्ट से प्रदेश सरकार, पर्यटन विकास निगम को बड़ी राहत मिली है। हाईकोर्ट ने पर्यटन विकास निगम के नाै होटलों को 31 मार्च 2025 तक खुले रखने के आदेश दिए हैं।
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पर्यटन निगम की ओर से पूर्व महाधिवक्ता श्रवण डोगरा ने अदालत को बताया कि निगम को घाटे से उबारने के लिए कुछ समय दिया जाए। उन्होंने बताया कि प्रदेश में पर्यटन को पहले कोविड के कारण नुकसान हुआ, उसके बाद प्राकृतिक आपदा का सामना करना पडा। श्रवण डोगरा ने कोर्ट को आश्वस्त किया है कि घाटे में चल रहे होटल अपग्रेड किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि जिन होटलों को बंद करने के आदेश दिए हैं, उनमें अधिकतर की एडवांंस बुकिंग है और पेमेंट भी आ गई है। ऐसे में इन्हें बंद किया गया तो पर्यटन उद्योग को बड़ा नुकसान होगा। सैकड़ों लोग बेरोजगार होंगे। उन्होंने अदालत में घाटे में चल रहे होटलों की वित्तीय स्थिति से संबंधित आंकड़े भी पेश किए। पूर्व महाधिवक्ता ने अदालत को भरोसा दिया है कि भविष्य में ख्याल रखा जाएगा कि इसके सेवानिवृतत्त कर्मचारियों के बकाया का भुगतान समय पर हो। अदालत ने इसके बाद निगम को चायल पैलेस, चंद्रभागा केलांग, देवदार खजियार, कुंजम मनाली, मेघदूत क्यारीघाट, लॉग हट्स मनाली, भागसू मैक्लाेडगंज, नग्गर कैसल कुल्लू और धौलाधार धर्मशाला को 31 मार्च तक खुले रखने के आदेश दिए हैं।
31 मार्च तक खुले रहेंगे ये एचपीपीटीसी के ये होटल
ये होटल नहीं होंगे बंद
द पैलेस होटल चायल
होटल चंद्रभागा केलांग
होटल देवदार खज्जियार
होटल मेघदूत, क्यारीघाट
होटल लॉग हट्स मनाली
होटल कुंजम मनाली
होटल भागसू मैक्लोडगंज
द कैसल होटल नग्गर
होटल धौलाधार धर्मशाला
हालांकि, 19 नवंबर का आदेश अन्य संपत्तियों/इकाइयों के लिए लागू रहेगा।
पर्यटन निगम के होटलों की वर्तमान स्थिति के लिए पूर्व सरकार जिम्मेवार
पर्यटन निगम के 18 होटलों को बंद करने के फैसले पर नरेश चौहान ने कहा कि इस मामले में राज्य सरकार ने प्रदेश हाईकोर्ट में अपना पक्ष रखा। इसके परिणामस्वरूप निगम के नौ होटलों को दोबारा शुरू करने के आदेश हुए हैं। निगम के अन्य होटलों को लेकर भी अध्ययन किया जा रहा है। इस मामले में गठित कमेटी की रिपोर्ट आने के बाद उचित कदम उठाए जाएंगे। पर्यटन निगम के अधिकारियों, कर्मचारियों और हितधारकों के हित पूरी तरह से सुरक्षित हैं और उन्हें डरने की आवश्यकता नहीं है। निगम के होटलों की हालत के लिए वर्तमान सरकार जिम्मेदार नहीं है, बल्कि यह पूर्व भाजपा सरकार के कुप्रबंधन के कारण ही आज यह परिस्थिति उत्पन्न हुई है।