HPU वीसी समेत 4 अफसरों को नोटिस, पूछा क्यों न उन्हें दंडित किया जाए
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प्रदेश हाईकोर्ट ने हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के वीसी प्रो. एडीएन वाजपेयी सहित प्रो. वीसी राजिंद्र चौहान, रजिस्ट्रार पंकज ललित और डिप्टी रजिस्ट्रार सुशील कुमार को कारण बताओ नोटिस जारी कर पूछा है कि क्यों न उन्हें कोर्ट की अवमानना करने पर दंडित किया जाए।
मुख्य न्यायाधीश मंसूर अहमद मीर और न्यायाधीश संदीप शर्मा की खंडपीठ ने डॉ. रत्न सिंह, संजीव कुमार और भवानी सिंह की ओर से दायर अवमानना याचिका की सुनवाई के बाद यह आदेश पारित किए। मामले पर सुनवाई 24 अगस्त को होगी।
मामले के अनुसार प्रार्थी विश्वविद्यालय से नियमितीकरण और अन्य वित्तीय लाभ दिए जाने की मांग कर रहे थे। शुरुआत में प्रार्थी विश्वविद्यालय की ओर से संचालित यूजीसी के अधीन इंस्टीट्यूट ऑफ इंटीग्रेटेड हिमालयन स्टडीज में बतौर रिसर्च एसोसिएट्स नियुक्त हुए थे।
विवि प्रशासन ने ठुकराई थी नियमितकरण की मांग
इनकी नियुक्ति एक विशेष स्कीम के तहत इस शर्त के साथ हुई थी कि वे तब तक कार्य करेंगे जब तक स्कीम के लिए फंड्स उपलब्ध होंगे। स्कीम लंबी चलने पर प्रार्थियों ने नियमितीकरण की मांग की जिसे विश्वविद्यालय ने यह कह कर ठुकरा दिया कि ये उनके कर्मचारी नहीं हैं।
याचिका के हाईकोर्ट में लंबित रहते हुए विश्वविद्यालय ने इंस्टीट्यूट को मल्टी डिसिप्लिनरी रिसर्च संस्थान के नाम से अपना एक स्थाई विभाग बनाने का निर्णय लिया। इस निर्णय के बावजूद विश्वविद्यालय ने इन प्रार्थियों को अपने अन्य कर्मचारियों के समानांतर लाभ नहीं दिए।
कोर्ट की आंखों में धूल झोंकते रहे अधिकारी
हाईकोर्ट ने प्रार्थियों द्वारा मांगे गए लाभों पर विचार करने के आदेश दिए। विश्वविद्यालय अधिकारियों ने हाईकोर्ट को कई बार बताया कि प्रार्थियों को उनके देय लाभ दे दिए गए हैं जबकि वास्तव में उन्हें वास्तविक लाभ दिए ही नहीं गए।
प्रार्थियों के बार-बार अवमानना याचिकाएं दायर करने के बावजूद यह अधिकारी कोर्ट की आंखों में धूल झोंकते रहे। कोर्ट ने विस्तृत आदेश पारित कर इन अधिकारियों को प्रथम दृष्टया कोर्ट की अवमानना का दोषी पाते हुए कारण बताओ नोटिस जारी किए।