फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Shimla News ›   HP High Court notice to HPU VC and three other officers.

HPU वीसी समेत 4 अफसरों को नोटिस, पूछा क्यों न उन्हें दंडित किया जाए

Fri, 15 Jul 2016 09:26 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला Updated Fri, 15 Jul 2016 09:26 AM IST
विज्ञापन
HP High Court notice to HPU VC and three other officers.
कुलपति प्रो. एडीएन वाजपेयी

प्रदेश हाईकोर्ट ने हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के वीसी प्रो. एडीएन वाजपेयी सहित प्रो. वीसी राजिंद्र चौहान, रजिस्ट्रार पंकज ललित और डिप्टी रजिस्ट्रार सुशील कुमार को कारण बताओ नोटिस जारी कर पूछा है कि क्यों न उन्हें कोर्ट की अवमानना करने पर दंडित किया जाए।

विज्ञापन


मुख्य न्यायाधीश मंसूर अहमद मीर और न्यायाधीश संदीप शर्मा की खंडपीठ ने डॉ. रत्न सिंह, संजीव कुमार और भवानी सिंह की ओर से दायर अवमानना याचिका की सुनवाई के बाद यह आदेश पारित किए। मामले पर सुनवाई 24 अगस्त को होगी।
विज्ञापन


मामले के अनुसार प्रार्थी विश्वविद्यालय से नियमितीकरण और अन्य वित्तीय लाभ दिए जाने की मांग कर रहे थे। शुरुआत में प्रार्थी विश्वविद्यालय की ओर से संचालित यूजीसी के अधीन इंस्टीट्यूट ऑफ इंटीग्रेटेड हिमालयन स्टडीज में बतौर रिसर्च एसोसिएट्स नियुक्त हुए थे।

विज्ञापन
विज्ञापन

विवि प्रशासन ने ठुकराई थी नियमितकरण की मांग

HP High Court notice to HPU VC and three other officers.

इनकी नियुक्ति एक विशेष स्कीम के तहत इस शर्त के साथ हुई थी कि वे तब तक कार्य करेंगे जब तक स्कीम के लिए फंड्स उपलब्ध होंगे। स्कीम लंबी चलने पर प्रार्थियों ने नियमितीकरण की मांग की जिसे विश्वविद्यालय ने यह कह कर ठुकरा दिया कि ये उनके कर्मचारी नहीं हैं।

याचिका के हाईकोर्ट में लंबित रहते हुए विश्वविद्यालय ने इंस्टीट्यूट को मल्टी डिसिप्लिनरी रिसर्च संस्थान के नाम से अपना एक स्थाई विभाग बनाने का निर्णय लिया। इस निर्णय के बावजूद विश्वविद्यालय ने इन प्रार्थियों को अपने अन्य कर्मचारियों के समानांतर लाभ नहीं दिए।

कोर्ट की आंखों में धूल झोंकते रहे अधिकारी

HP High Court notice to HPU VC and three other officers.
हिमाचल हाईकोर्ट

हाईकोर्ट ने प्रार्थियों द्वारा मांगे गए लाभों पर विचार करने के आदेश दिए। विश्वविद्यालय अधिकारियों ने हाईकोर्ट को कई बार बताया कि प्रार्थियों को उनके देय लाभ दे दिए गए हैं जबकि वास्तव में उन्हें वास्तविक लाभ दिए ही नहीं गए।

प्रार्थियों के बार-बार अवमानना याचिकाएं दायर करने के बावजूद यह अधिकारी कोर्ट की आंखों में धूल झोंकते रहे। कोर्ट ने विस्तृत आदेश पारित कर इन अधिकारियों को प्रथम दृष्टया कोर्ट की अवमानना का दोषी पाते हुए कारण बताओ नोटिस जारी किए।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed