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नहीं माने हाईकोर्ट के आदेश, इन चार अफसरों को नोटिस

Sun, 18 Oct 2015 10:34 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला Updated Sun, 18 Oct 2015 10:34 AM IST
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hp high court issue notice to four officers for contempt of court.

प्रदेश हाईकोर्ट ने पूर्व शिक्षा सचिव एसके मूर्ति और पूर्व शिक्षा निदेशक ओपी शर्मा को कोर्ट की अवमानना का दोषी पाते हुए कारण बताओ नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने नोटिस में दोनों से पूछा है की क्यों न उन्हें कोर्ट की अवमानना करने पर दंडित किया जाए। मुख्य न्यायाधीश मंसूर अहमद मीर और न्यायाधीश धर्म चंद चौधरी की खंडपीठ ने मौजूदा अतिरिक्त मुख्य सचिव शिक्षा पीसी धीमान और उच्च शिक्षा निदेशक दिनकर बुराथोकी को भी नोटिस जारी करने के आदेश दिए हैं।

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इन्हें पूछा गया है कि क्यों न उनके खिलाफ भी अवमानना का मामला चलाया जाए। प्रार्थी बृज लाल ठाकुर के अनुसार इन सभी अधिकारियों ने अदालत के आदेशों के बावजूद उसे उसका हक नहीं दिया। कोर्ट के आदेशों में बेवजह बाधक बने। प्रार्थी ने शिक्षा विभाग पर आरोप लगाया है कि उसे उचित तनख्वाह नहीं दी जा रही है, जिसका वह हकदार है। उसके साथ वाले अध्यापक उससे अधिक तनख्वाह पा रहे हैं। वास्तव में वह और अन्य अध्यापक शिक्षा विभाग में अनुबंध आधार पर नियुक्त हुए थे।
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उनकी तनख्वाह 8 अक्तूबर 1996 को सरकार की ओर से जारी निर्देशों के अनुसार तय की गई। 10 जून 2005 को सरकार ने 50 प्रतिशत महंगाई भत्ता उनकी बेसिक पे में समायोजित करने की अधिसूचना जारी की। कुछ समय उन्हें इसका लाभ मिला, लेकिन 29 सितंबर को सरकार ने बिना नोटिस यह अधिसूचना वापस ले ली। इससे उनकी तनख्वाह घट गई। मामला अदालत में ले जाने पर कोर्ट से उन्हें इंसाफ तो मिला पर अधिकारियों के रवैये की वजह से वर्ष 2010 में हाईकोर्ट से उनके हक में पारित आदेशों का फायदा उन्हें आज तक नहीं मिला।
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सरकार ने प्रार्थियों को उनके हक से दूर रखने के लिए मामला सुप्रीम कोर्ट तक भी पहुंचाया लेकिन वहां भी उनके हक में फैसला हुआ। कोर्ट ने पाया कि दोनों अधिकारियों ने न केवल हाईकोर्ट बल्कि सुप्रीम कोर्ट की अवमानना भी की है। ऐसे में इन्हें दंडित करने से पहले सुनवाई का मौका दिया जाए। चारों अधिकारियों को 28 अक्तूबर को कोर्ट में तलब किया गया है।

शिक्षा विभाग पर 150 से अधिक अवमानना मामले
केवल शिक्षा विभाग के ही मौजूदा आला अधिकारियों के खिलाफ इस वर्ष 150 से अधिक अवमानना याचिकाएं हाईकोर्ट में दायर हुई हैं। इसी वर्ष अभी तक 800 से अधिक अवमानना याचिकाएं हाईकोर्ट में दायर हो चुकीं हैं, जिससे जाहिर है कि सरकारी अधिकारी कोर्ट के आदेशों को गंभीरता से नहीं ले रहे, जिस कारण आम जनता को वास्तव में समय पर न्याय नहीं मिल पा रहा। अवमानना मामलों में दोषी को अधिकतम 6 महीने की कैद अथवा माफी मांगने पर सजा से छूट का प्रावधान है।

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