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HP High Court: एचपीएमसी कर्मचारियों को संशोधित वेतनमान देने के आदेश, छरोड़नाला पशु औषधालय को बदलने पर रोक
Wed, 05 Jul 2023 07:28 PM IST
Krishan Singh
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
Published by: Krishan Singh
Updated Wed, 05 Jul 2023 07:28 PM IST
सार
प्रदेश बागवानी उत्पादन विपणन और प्रसंस्करण निगम लिमिटेड(एचपीएमसी) के कर्मचारियों को हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। अदालत ने एचपीएमसी कर्मचारियों को 1 जनवरी 2016 से संशोधित वेतनमान देने के आदेश दिए हैं।
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हिमाचल हाईकोर्ट
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
हिमाचल प्रदेश बागवानी उत्पादन विपणन और प्रसंस्करण निगम लिमिटेड(एचपीएमसी) के कर्मचारियों को हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। अदालत ने एचपीएमसी कर्मचारियों को 1 जनवरी 2016 से संशोधित वेतनमान देने के आदेश दिए हैं। अदालत ने अपने आदेशों में स्पष्ट किया कि यदि याचिकाकर्ता को यह लाभ 3 माह के भीतर नहीं दिया जाता है तो एचपीएमसी को देय राशि पर नौ फीसदी ब्याज देना होगा। मुख्य न्यायाधीश एमएस रामचंद्र राव और न्यायाधीश अजय मोहन गोयल की खंडपीठ ने सालिग राम चौहान की याचिका को स्वीकार करते हुए यह निर्णय सुनाया।
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निगम की ओर से दलील दी गई थी कि निगम की आर्थिक हालत ठीक नहीं है। इस कारण आयोग संशोधित वेतनमान देने में असमर्थ है। अदालत ने आयोग की इस दलील को खारिज करते हुए कहा कि जब निगम ने अपने कर्मचारियों को संशोधित वेतनमान देने का निर्णय लिया है तो वित्तीय स्थिति खराब होने के आधार पर कर्मचारियों के वित्तीय लाभ नहीं रोके जा सकते। याचिकाकर्ता निगम से बतौर अतिरिक्त विपणन अधिकारी के पद से सेवानिवृत हुआ था। 30 नवंबर को सेवानिवृत हुए उक्त कर्मी के अनुसार उसे न तो सेवानिवृत्ति लाभ दिए गए और न ही संशोधित वेतनमान का लाभ 1 जनवरी 2016 से दिया गया।
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याचिकाकर्ता के अदालत के समक्ष याचिका दायर करने के बाद निगम ने उसे सेवानिवृत्ति लाभ तो दे दिए लेकिन संशोधित वेतनमान का लाभ नहीं दिया। मामले की सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि दिसम्बर 2022 को निगम ने संशोधित वेतन मान का लाभ अपने कर्मचारियों को देने का फैसला ले लिया था। निगम की ओर से आर्थिक हालत खराब होने की बात कहते हुए प्रार्थी सहित अपने अन्य कर्मचारियों को संशोधित वेतनमान का लाभ देने में असमर्थता जताई थी। अदालत ने इस दलील को खारिज करते हुए यह निर्णय सुनाया।
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