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Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   HP high Court: BJP MLAs withdrew the petition rejecting the appointment of Deputy Chief Minister

Himachal: भाजपा विधायकों ने वापस ली उप मुख्यमंत्री की नियुक्ति को खारिज करने संबंधी याचिका

Wed, 20 Dec 2023 08:20 PM IST
Krishan Singh अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला Published by: Krishan Singh Updated Wed, 20 Dec 2023 08:20 PM IST
सार

हाईकोर्ट में सीपीएस की नियुक्ति को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई 2 जनवरी को होगी। न्यायाधीश विवेक सिंह ठाकुर और न्यायाधीश संदीप शर्मा की खंडपीठ के समक्ष इस मामले पर सुनवाई हुई। 

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HP high Court: BJP MLAs withdrew the petition rejecting the appointment of Deputy Chief Minister
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

भाजपा विधायक सतपाल सत्ती समेत अन्य विधायकों ने उप मुख्यमंत्री की नियुक्ति को खारिज करने संबंधी याचिका को हाईकोर्ट से वापस ले लिया है, जबकि अन्य मुख्य संसदीय सचिवों (सीपीएस) की नियुक्तियों को खारिज करने की मांग को जारी रखा है। हाईकोर्ट में सीपीएस की नियुक्ति को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई 2 जनवरी को होगी। न्यायाधीश विवेक सिंह ठाकुर और न्यायाधीश संदीप शर्मा की खंडपीठ के समक्ष इस मामले पर सुनवाई हुई। याचिकाकर्ताओं की ओर से बहस पूरी होने के बाद इस मामले में राज्य सरकार की ओर से बहस हुई।

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अब मामले की आगामी सुनवाई 2 जनवरी को निर्धारित की गई है। भाजपा विधायक सतपाल सत्ती समेत 12 भाजपा नेताओं ने उप मुख्यमंत्री समेत सीपीएस की नियुक्ति को चुनौती दी थी। याचिका में अर्की विधानसभा क्षेत्र से सीपीएस संजय अवस्थी, कुल्लू से सुंदर सिंह, दून से राम कुमार, रोहड़ू से मोहन लाल ब्राक्टा, पालमपुर से आशीष बुटेल और बैजनाथ से किशोरी लाल की नियुक्ति को चुनौती दी गई है। याचिका में उप मुख्यमंत्री को कैबिनेट मीटिंग में हिस्सा लेने से रोकने के आदेशों की मांग के साथ इसकी एवज में मिलने वाले अतिरिक्त वेतन को वसूलने की मांग भी की गई थी।
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एसबीआई के आवेदन पर 30 दिनों में कार्रवाई करें जिला मजिस्ट्रेट : हाईकोर्ट
 वहीं, प्रदेश हाईकोर्ट ने स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की ओर से दायर 6 याचिकाओं को मंजूर करते हुए संबंधित जिला मजिस्ट्रेट को आदेश जारी किए हैं कि वह सर्वोच्च न्यायालय द्वारा पारित निर्णय के दृष्टिगत 30 दिनों के भीतर बैंक के आवेदन पर कार्रवाई बाबत निर्णय लें। हालांकि वह 60 दिनों तक निर्णय लेने की सीमा को बढ़ा सकते हैं लेकिन इसके लिए उसको इस बाबत स्पष्टीकरण देना होगा। हाईकोर्ट ने ऋण वसूली अधिनियम के प्रावधानों का दुरुपयोग करने पर जिलाधीशों की कार्यशाली पर टिप्पणी करते हुए कहा कि सरफेसी एक्ट की धारा 14 के मुताबिक उनकी शक्तियां मामले पर मुकद्दमा चलाने की नहीं हैं बल्कि कार्रवाई करने की हैं।
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न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान व न्यायाधीश सत्येन वैद्य की खंडपीठ ने पाया कि अनेकों मामलों में जिला मजिस्ट्रेट सरफेसी एक्ट की धारा 14 के तहत आवेदनों का निपटान बैंकों को सहायता प्रदान किए बिना कर रहे हैं। डिफॉल्टर अपनी सुरक्षित परिसंपत्तियों पर कब्जा वापस पाने में लगे हुए हैं और इससे भी बुरी बात यह है कि जिला मजिस्ट्रेट प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से उधारकर्ताओं या तीसरे पक्षों को कानून का घोर उल्लंघन करते हुए राहत दे रहे हैं। जिला मजिस्ट्रेट द्वारा इस तरह के पारित आदेशों को कोर्ट ने शून्य करार देते हुए मुख्य सचिव को आदेश जारी किया कि वह प्रदेश के सभी जिला मजिस्ट्रेटों को उपरोक्त निर्णय के बारे में अवगत करवाएं ताकि वह सरफेसी एक्ट के प्रावधान 14 के तहत उपयुक्त निर्णय लें।


बैंक की ओर से हाईकोर्ट के समक्ष यह दलील दी गई थी कि उनके आवेदन पर जिला मजिस्ट्रेट को केवल यह तय करने का अधिकार है कि लेनदार की रेहन रखी जमीन उनके क्षेत्राधिकार में पड़ती है या नहीं और बैंक की ओर से इस जमीन को अपने कब्जे में लेने बाबत क्या बैंक की ओर से सरफेसी एक्ट के प्रावधानों के अनुरूप नोटिस जारी किया है या नहीं? इस प्रावधान के अंतर्गत जिला मजिस्ट्रेट को इस तरह के मामले पर मुकद्दमा चलाने का कोई अधिकार नहीं है।

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