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ऐतिहासिक रघुनाथ मंदिर पर सरकार का कब्जा, देव समाज ने दी चेतावनी

Thu, 28 Jul 2016 09:53 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला Updated Thu, 28 Jul 2016 09:53 AM IST
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HP Govt Take over RaghuNath Temple at Kullu.
कुल्‍लू का ऐतिहासिक रघुनाथ मंदिर - फोटो : अमर उजाला

दुनिया भर में मशहूर कुल्लू के प्रसिद्ध रघुनाथ मंदिर आखिरकार सरकार ने अपने कब्जे में ले लिया। राज्य सरकार ने बुधवार को इसकी अधिसूचना जारी कर अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू कर दी है। प्रसिद्ध रघुनाथ मंदिर कुल्लू राजघराने से संबंधित है।

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राष्ट्रीय स्तर के दशहरा उत्सव में भगवान रघुनाथ की कुल्लू के प्रधान देवता के रूप में पूजा-अर्चना की जाती है। हिलोपा विधायक एवं कुल्लू के राजघराने से संबंधित महेश्वर सिंह भगवान रघुनाथ के छड़ीबरदार हैं। मंदिर भी महेश्वर के घर के परिसर में है।
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अभी तक मंदिर का प्रबंधन महेश्वर के नियंत्रण की स्थानीय कमेटी के पास था। उन्हें कल इस फैसले की भनक तक नहीं थी।  लिहाजा, सरकार के इस फैसले का विरोध शुरू हो गया है। बुधवार को कुल्लू बाजार बंद रहा।

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देव समाज ने कहा, नहीं मंजूर होगा सरकार का फैसला

HP Govt Take over RaghuNath Temple at Kullu.
बुधवार को कुल्लू बाजार बंद रहा। - फोटो : अमर उजाला

देव समाज ने दो टूक कहा है कि वे इस फैसले को किसी भी कीमत पर मंजूर नहीं करेंगे। बाकायदा इसके लिए बैठक बुला ली गई है। देव समाज का कहना है कि आस्था से तो अंग्रेजों ने भी छेड़खानी नहीं की, लेकिन सरकारें और प्रशासन ऐसा करने पर तुले हुए हैं।

वीरवार को महेश्वर सिंह हिमाचल हाईकोर्ट में सरकार के फैसले को चुनौती देंगे। महेश्वर सिंह ने कहा कि उन्हें मंदिर अधिग्रहण का नोटिस मिला है। वह वीरवार को प्रदेश उच्च न्यायालय में फैसले को चुनौती देने के लिए विधि विशेषज्ञों से चर्चा कर रहे हैं। 

आठ दिसंबर, 2014 की रात हुई थी चोरी

HP Govt Take over RaghuNath Temple at Kullu.
अधिग्रहण खिलाफ दिन भर बैठकों का दौर जारी रहा। विरोधस्वरूप कुल्लू बाजार भी बंद रहा। - फोटो : अमर उजाला

आठ दिसंबर, 2014 की रात एक नेपाली युवक अपने साथियों के साथ मंदिर की छत की स्लेट उखाड़कर मंदिर में घुसा था। भगवान रघुनाथ समेत कई देवताओं की मूर्तियां चुरा ले गया था। जनवरी 2015 में ये मूर्तियां बरामद कर ली गई थीं। मंदिर के लोगों की आस्थाओं से जुड़ा होने के कारण यहां ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने का तर्क देकर इस मंदिर के अधिग्रहण का फैसला लिया है।

गुपचुप ढंग से हुआ फैसला
मंदिर अधिग्रहण का फैसला आखिर अफसर क्यों छिपाते रहे। सोमवार और मंगलवार को इस मामले में अधिकारी कुछ भी बात करने से कतराते रहे। अधिसूचना जारी होने और नोटिस जारी करने के बाद ही अधिकारियों ने इसकी पुष्टि की कि ऐसा फैसला हुआ है।

विश्वस्त सूत्रों ने बताया कि सोमवार को मंत्रिमंडल की बैठक  के एजेंडे में भी रघुनाथ मंदिर के अधिग्रहण का मामला शामिल नहीं था। इस मुद्दे पर कैबिनेट की ही बैठक में गोपनीय चर्चा हुई। खुद महेश्वर सिंह भी इस फैसले से अनभिज्ञ रहे।

सरकार ने रघुनाथ मंदिर का अधिग्रहण करने की अधिसूचना जारी कर दी हैै। अधिग्रहण करने के एक्ट के प्रावधानों के तहत ही इस पर कार्रवाई की जा रही है।- अनुराधा ठाकुर, सचिव भाषा एवं संस्कृति विभाग

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