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सरकारी महकमों का कारनामा, फाइलों में दबा दिया सवा चार लाख गरीबों का राशन

Sat, 23 Jul 2016 10:51 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला Updated Sat, 23 Jul 2016 10:51 AM IST
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HP Govt offices Negligency in Cheap rations to poor families.

सरकारी महकमों की घोर लापरवाही से शिमला के करीब सवा चार लाख लोग सस्ते राशन से महरूम रह गए हैं। शिमला शहर में ही अकेले ऐसे 53 हजार लोग प्रभावित हो रहे हैं। संबंधित जिम्मेदार महकमों से अब तक इन परिवारों का डाटा ही एकत्रित नहीं हो पाया है।

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जिला शिमला के गरीब लोगों को अभी सस्ता गेहूं एवं चावल लेने के लिए अभी और इंतजार करना होगा। एनएफएसए एक्ट में बीपीएल परिवारों का डाटा खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के पास नहीं है। इस योजना को भारत सरकार की ओर से बीपीएल परिवारों के लिए शुरू किया गया है।
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हैरानी है कि शिमला में इस योजना को सिरे नहीं चढ़ाया जा सका है। एनएफएसए एक्ट को साल 2013 में पास कर दिया गया था। इस एक्ट के तहत गरीब रेखा से नीचे रहने वाले लोगों को डिपुओं से दो रुपये किलो के हिसाब से गेहूं और तीन रुपये किलो चावल दिए जाने थे, लेकिन खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के पास डाटा पूरा न होने के कारण लोगों को सस्ते राशन से वंचित रहना पड़ रहा है।

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हिमाचल के 36.82 लाख लोगों को मिलना था लाभ

HP Govt offices Negligency in Cheap rations to poor families.

आंकड़ों के मुताबिक नेशनल फूड सेफ्टी एक्ट में पूरे हिमाचल भर से 36.82 लाख और पूरे शिमला भर से 4.26 लाख तथा शिमला शहर के करीब 53 हजार से ज्यादा गरीब लोगों को इसका लाभ मिलना था।

खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग के पास परिवारों को पूरा डाटा नहीं होने के कारण इस स्कीम को शुरू नही किया जा रहा है। गरीब लोगों को भी अन्य लोगों की तरह ही डिपुओं के रेट पर चावल और गेहूं खरीदना पड़ रहा है।

शिमला शहर का डाटा नगर निगम की ओर से खाद्य आपूर्ति निगम को दिया जाना था। नगर निगम का दावा है कि उनकी ओर से यह डाटा दे दिया गया है। खाद्य आपूर्ति विभाग के अधिकारियों का कहना है कि इसमें नगर निगम को टारगेट अचीव करने को कहा गया था।

लेकिन दूसरी ओर एमसी का कहना है कि उन्हें जो काम दिया गया था उसे पहले ही सर्वे कर पूरा कर दिया गया है, मौजूदा समय में उन्हें लिखित रुप में कोई आदेश नही मिले हैं।

सभी लोगों को लिया जाएगा योजना में

HP Govt offices Negligency in Cheap rations to poor families.

खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति उपभोक्ता मामले की निदेशक एम सुधा देवी ने बताया कि लोगों को एनएफएसए संबंधी गरीब लोगों की लिस्ट जारी नही पाई है। जैसे ही यह लिस्ट पूरी होती है लोगों को राशन उपलब्ध करवा दिया जाएगा।

एनएफएसए में हमारा नही कोई योगदान
नेशनल फूड सेफ्टी एक्ट में हमारा कोई योगदान नही है। डीएफएसई विभाग ने कुछ महीनों पहले बीपीएल परिवारों की डिटेल मांगी थी। उस दौरान एमसी ने सर्वे किया और तीन हजार से ज्यादा बीपीएल परिवारों की लिस्ट डीएफएसई को सौंप दी थी, लेकिन दोबारा से इन लोगों के डाटा लेने के लिए लिखित में कोई सूचना नही आई हैं।- प्रशांत सरकैक,  सहायक आयुक्त, नगर निगम शिमला

शहरी तथा ग्रामीण इंस्पेक्टरों के साथ भी बैठक
गरीबी लोगों की संख्या की जांच करने के लिए डीएफएसई विभाग ने पिछले दिनों शहरी और ग्रामीण इंस्पेक्टरों के साथ बैठक की थी। बैठक में आदेश दिए गए थे कि वे भी इस टारगेट को पूरा करने में सहयोग करें।

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