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Himachal Assembly Session: एपीएमसी दुकानों के आवंटन में भ्रष्टाचार का आरोप, विपक्ष की नारेबाजी, वाकआउट
Wed, 27 Aug 2025 12:21 PM IST
Krishan Singh
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला।
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला।
Published by: Krishan Singh
Updated Wed, 27 Aug 2025 12:21 PM IST
सार
प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र में बुधवार को सदन में एपीएमसी की दुकानों के आवंटन में अनियमितता के आरोपों पर हंगामा हुआ।
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भाजपा विधायकों ने किया वाकआउट।
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
विधानसभा में बुधवार को प्रश्नकाल के दौरान एपीएमसी शिमला और किन्नौर में दुकानों के आवंटन को लेकर गहमागहमी हुई। भाजपा ने दुकानों के आवंटन में भ्रष्टाचार का आरोप लगाया। पराला, शिलारू और टुटू मंडी में आवंटित 70 दुकानों और सीए स्टोर को आउटसोर्स करने पर विजिलेंस जांच मांगी। कृषि मंत्री चंद्र कुमार ने कहा कि दुकानों का आवंटन पारदर्शी और निर्धारित प्रक्रिया में किया गया है। एपीएमसी के सचिव के तबादले को उन्होंने नियमित विभागीय प्रक्रिया बताया। चंद्र कुमार ने जोर-जोर से सदन में बोलकर सनसनी न फैलाने की भी विपक्षी सदस्यों को नसीहत दी। मंत्री के जवाब से असंतुष्ट भाजपा विधायक सदन में जोरदार नारेबाजी करने लगे और सदन से वाकआउट कर गए।
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भाजपा विधायक सुधीर शर्मा और रणधीर शर्मा ने कहा कि शिमला और किन्नौर में दुकानों के आवंटन में भारी अनियमितताएं हुई हैं। शिमला में 70 दुकानों के लिए 133 आवेदन आए थे, इनमें 63 आवेदन मनमाने ढंग से रद्द कर दिए गए। जिन आवेदकों को दुकानें देनी थीं, उनके आवेदन ही तर्कसंगत पाए गए और आवंटन भी मनमाने मासिक किराये पर किया गया। जांच केवल औपचारिकता रही, लेकिन आवंटन रद्द नहीं किए गए और 2021 की नीति की अवहेलना हुई।
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जवाब में कृषि मंत्री ने कहा कि एपीएमसी शिमला-किन्नौर की ओर से कुल 70 दुकानों का आवंटन किया गया। कृषि विपणन बोर्ड की ओर से अधिसूचित आवंटन नीति 2021 में निर्देशित प्रक्रिया अपनाई गई। पराला में 34, शिलारू में 28 और टुटू में 8 दुकानों का आवंटन किया गया। दुकानों का आवंटन बेस प्राइस से 150 से 900 रुपये तक के ऊंचे दामों पर अलाट किया गया। उन्होंने कहा कि दुकानों के आवंटन से संबंधित दो शिकायतें प्राप्त हुईं। इसकी विभागीय जांच कृषि विपणन बोर्ड की ओर से करवाई गई। नारकंडा एग्रोफ्रेश प्रोड्यूसर लिमिटेड की ओर से की गई शिकायत में पाया गया कि आवेदक ने जरूरी पांच लाख रुपये की प्रतिभूति राशि जमा नहीं करवाई थी। दूसरी शिकायत रोहित कुमार ने की थी। इसमें आवेदक द्वारा अपेक्षित श्रेणी का प्रमाण पत्र जमा नहीं करवाया गया। इस कारण दोनों आवेदनों पर आवंटन के लिए विचार नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि जो आवेदन रद्द किए गए, वे सभी दस्तावेजों के अभाव में रद्द किए गए।
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आवंटन में गड़बड़ नहीं तो अफसरों के तबादले क्यों किए
विधायक सुधीर शर्मा ने कहा कि यदि आवंटन में कोई गड़बड़ी नहीं हुई तो संबंधित अधिकारियों का तबादला क्यों किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि अधिकारियों को बदलना इस बात का प्रमाण है कि सरकार कुछ छिपा रही है। इस पर मंत्री ने फिर दोहराया कि अधिकारियों का तबादला सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा है और भ्रष्टाचार का कोई मामला नहीं है। भाजपा विधायक बलबीर वर्मा ने कहा कि स्थानीय बागवानों को दुकानों में प्राथमिकता नहीं दी गई। उन्होंने कहा कि पराला का सीए स्टोर 67 करोड़ में बना और 3.36 करोड़ वार्षिक पर लीज पर दे दिया गया है। पराला मंडी में दस साल पहले 60 से 80 हजार रुपये में ऑक्शन हुई। आज इनका आवंटन 5-6 हजार रुपये में किया है। मंत्री ने कहा कि भाजपा के विधायक बिना तथ्यों के हवा में आरोप लगा रहे हैं और आबंटन को रद्द करने का कोई प्रश्न ही नहीं उठता।
महत्वपूर्ण सवालों की जानकारियां ही एकत्र करने के जवाब पर विपक्ष ने जताई आपत्ति
प्रश्नकाल के दौरान महत्वपूर्ण सवालों की जानकारियां ही एकत्र करने के जवाब मिलने पर विपक्षी सदस्यों ने आपत्ति जताई। भाजपा विधायक विपिन सिंह परमार ने कहा कि मेरे इस सवाल पर पहले भी जानकारी दी गई थी, सूचना एकत्र हो रही है। आज फिर वही जवाब दोहराया गया है। इस पर उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने कहा कि सही तरीके से भाजपा विधायक ने सवाल नहीं पूछे हैं। आंकड़ा जुटाने में समय लग रहा है।
भाजपा विधायक विपिन सिंह परमार ने पूछा था कि यह सत्य है कि सरकार की ओर से उच्च न्यायालय के महाधिवक्ता के साथ अतिरिक्त, उप व सहायक महाधिवक्ता नियुक्त किए गए हैं। यदि हां, तो कितने और अब तक इनकी ओर से कितने मामलों की पैरवी की गई। मामलों का क्या नतीजा रहा। वर्तमान में इन्हें कितना मानदेय दिया जा रहा है। कितना प्रदान किया जा चुका है। जवाब में उप मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने कहा कि सवाल में तारीख नहीं लिखी है कि कब से कब तक की सूचना चाहिए। सरकार ने सभी विभागों और एजी कार्यालय को प्रश्न भेजा है। परमार ने कहा कि यह स्थगित प्रश्न है और पिछले सत्र में भी यही कहा था कि सूचना एकत्रित की जा रही है। क्या सरकार दो सितंबर से पहले इसकी सारी सूचना दे देगी। इस बीच नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने जवाब पर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि यदि प्रश्न में तारीख नहीं है तो सवाल को वापस विधानसभा सचिवालय को भेजा जाता, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। इस पर उप मुख्यमंत्री ने कहा कि जिस भी सरकार की सूचना चाहिए, वह दी जाएगी।
विधायक सुधीर शर्मा ने कहा कि यदि आवंटन में कोई गड़बड़ी नहीं हुई तो संबंधित अधिकारियों का तबादला क्यों किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि अधिकारियों को बदलना इस बात का प्रमाण है कि सरकार कुछ छिपा रही है। इस पर मंत्री ने फिर दोहराया कि अधिकारियों का तबादला सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा है और भ्रष्टाचार का कोई मामला नहीं है। भाजपा विधायक बलबीर वर्मा ने कहा कि स्थानीय बागवानों को दुकानों में प्राथमिकता नहीं दी गई। उन्होंने कहा कि पराला का सीए स्टोर 67 करोड़ में बना और 3.36 करोड़ वार्षिक पर लीज पर दे दिया गया है। पराला मंडी में दस साल पहले 60 से 80 हजार रुपये में ऑक्शन हुई। आज इनका आवंटन 5-6 हजार रुपये में किया है। मंत्री ने कहा कि भाजपा के विधायक बिना तथ्यों के हवा में आरोप लगा रहे हैं और आबंटन को रद्द करने का कोई प्रश्न ही नहीं उठता।
महत्वपूर्ण सवालों की जानकारियां ही एकत्र करने के जवाब पर विपक्ष ने जताई आपत्ति
प्रश्नकाल के दौरान महत्वपूर्ण सवालों की जानकारियां ही एकत्र करने के जवाब मिलने पर विपक्षी सदस्यों ने आपत्ति जताई। भाजपा विधायक विपिन सिंह परमार ने कहा कि मेरे इस सवाल पर पहले भी जानकारी दी गई थी, सूचना एकत्र हो रही है। आज फिर वही जवाब दोहराया गया है। इस पर उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने कहा कि सही तरीके से भाजपा विधायक ने सवाल नहीं पूछे हैं। आंकड़ा जुटाने में समय लग रहा है।
भाजपा विधायक विपिन सिंह परमार ने पूछा था कि यह सत्य है कि सरकार की ओर से उच्च न्यायालय के महाधिवक्ता के साथ अतिरिक्त, उप व सहायक महाधिवक्ता नियुक्त किए गए हैं। यदि हां, तो कितने और अब तक इनकी ओर से कितने मामलों की पैरवी की गई। मामलों का क्या नतीजा रहा। वर्तमान में इन्हें कितना मानदेय दिया जा रहा है। कितना प्रदान किया जा चुका है। जवाब में उप मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने कहा कि सवाल में तारीख नहीं लिखी है कि कब से कब तक की सूचना चाहिए। सरकार ने सभी विभागों और एजी कार्यालय को प्रश्न भेजा है। परमार ने कहा कि यह स्थगित प्रश्न है और पिछले सत्र में भी यही कहा था कि सूचना एकत्रित की जा रही है। क्या सरकार दो सितंबर से पहले इसकी सारी सूचना दे देगी। इस बीच नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने जवाब पर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि यदि प्रश्न में तारीख नहीं है तो सवाल को वापस विधानसभा सचिवालय को भेजा जाता, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। इस पर उप मुख्यमंत्री ने कहा कि जिस भी सरकार की सूचना चाहिए, वह दी जाएगी।
विधायक लोकेंद्र कुमार, सुधीर शर्मा, राकेश जम्वाल ने सवाल किया कि दिसंबर 2022 से 20 फरवरी 2025 तक लोक सेवा आयोग, राज्य चयन आयोग और विभिन्न विभागों में सरकारी पदों पर भर्ती के लिए कितनी अधिसूचनाएं जारी हुईं। कितने पदों पर परीक्षाएं और अंतिम परिणाम घोषित किए गए। कितने अभ्यर्थियों को नियुक्ति दी गई। राज्य चयन आयोग के गठन के बाद अब तक कितनी भर्तियां हुई हैं। इसका भी विभागवार, पदवार और जिलावार ब्योरा दें। जवाब में उप मुख्यमंत्री ने कहा कि सदस्यों की ओर से जो जानकारी मांगी गई है, वह बहुत विस्तृत है और इसकी सूचना एकत्रित की जा रही है। विधायक सुधीर शर्मा ने कहा कि 12 दिसंबर 2024 को एक सवाल पूछा गया था और जवाब में 34 हजार का आंकड़ा आया था। इस सत्र में प्रश्न लगा था कि और जानकारी दी गई कि 23 हजार को नौकरी दी है। आज भी मिलता जुलता सवाल है तो जानकारी एकत्र करने का हवाला दिया गया है। इस पर उप मुख्यमंत्री ने कहा कि अब जो जानकारी मांग रहे हैं, वह सारी नौकरियों की मांग रहे हैं। यह विस्तृत है और इसलिए इसमें समय तो लगेगा।
ठेकेदार की लेबर को परियोजना में कर्मी बनाने की नहीं प्रावधान
विधायक नंद लाल के सवाल पर उप मुख्यमंत्री ने कहा कि रामपुर विधानसभा क्षेत्र में स्थापित रामपुर पनबिजली परियोजनाओं में 630 लोगों को रोजगार मिला है। जब बिजली परियोजनाएं लगती हैं तो रोजगार के अधिक अवसर मिलते हैं, जब प्रोजेक्ट का काम पूरा हो जाता है तो रोजगार भी कम हो जाता है। उन्होंने कहा कि निजी ठेकेदारों के पास काम करने वाले कर्मियों को परियोजनाओं का कर्मचारी नहीं बनाया जा सकता। फिर भी वे इस संबंध में परियोजना प्रबंधकों से बात करेंगे।
केंद्र से उठाएंगे बीपीएल की आय सीमा बढ़ाने का मामला : विक्रमादित्य
शहरी विकास मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने कहा कि शहरी क्षेत्रों में बीपीएल चयन के लिए आय सीमा बढ़ाने का मामला केंद्र सरकार से उठाया जाएगा। विधायक संजय रतन और आशीष बुटेल के सवाल का जवाब देते हुए शहरी विकास मंत्री ने कहा कि इस मामले में केंद्र सरकार से आग्रह किया जाएगा। विधायक संजय रतन ने कहा कि शहरी क्षेत्रों में बीपीएल में आने के लिए 26 हजार रुपये की आय सीमा रखी है, जबकि पंचायतों में यह 50 हजार रुपये है। आशीष बुटेल ने कहा कि शहरी क्षेत्रों में रहन-सहन महंगा होता है और इसलिए आय सीमा बढ़नी चाहिए।
सरकार तय नहीं करती निजी शिक्षण संस्थानों की फीस, वेतन : रोहित
शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने कहा कि प्रदेश में निजी शिक्षण संस्थानों की फीस और उनमें कार्यरत कर्मचारियों का वेतन तय करने के लिए कोई नीति नहीं बनाई जाएगी। सरकार इसे तय नहीं करती। विधायक केवल सिंह पठानिया के सवाल का लिखित जवाब देते हुए शिक्षा मंत्री ने कहा कि निजी शिक्षण संस्थानों की फीस सरकारी संस्थानों की तरह निर्धारित नहीं की जा सकती। इन्हें सरकार की ओर से कोई वित्तीय सहायता प्राप्त नहीं होती। सरकार का इन संस्थानों पर केवल विनियामक नियंत्रण रहता है। यह नियंत्रण मुख्य रूप से संस्थानों की मान्यता, गुणवत्ता, मानक और न्यूनतम वेतनमान के संदर्भ में होता है।
विधायक नंद लाल के सवाल पर उप मुख्यमंत्री ने कहा कि रामपुर विधानसभा क्षेत्र में स्थापित रामपुर पनबिजली परियोजनाओं में 630 लोगों को रोजगार मिला है। जब बिजली परियोजनाएं लगती हैं तो रोजगार के अधिक अवसर मिलते हैं, जब प्रोजेक्ट का काम पूरा हो जाता है तो रोजगार भी कम हो जाता है। उन्होंने कहा कि निजी ठेकेदारों के पास काम करने वाले कर्मियों को परियोजनाओं का कर्मचारी नहीं बनाया जा सकता। फिर भी वे इस संबंध में परियोजना प्रबंधकों से बात करेंगे।
केंद्र से उठाएंगे बीपीएल की आय सीमा बढ़ाने का मामला : विक्रमादित्य
शहरी विकास मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने कहा कि शहरी क्षेत्रों में बीपीएल चयन के लिए आय सीमा बढ़ाने का मामला केंद्र सरकार से उठाया जाएगा। विधायक संजय रतन और आशीष बुटेल के सवाल का जवाब देते हुए शहरी विकास मंत्री ने कहा कि इस मामले में केंद्र सरकार से आग्रह किया जाएगा। विधायक संजय रतन ने कहा कि शहरी क्षेत्रों में बीपीएल में आने के लिए 26 हजार रुपये की आय सीमा रखी है, जबकि पंचायतों में यह 50 हजार रुपये है। आशीष बुटेल ने कहा कि शहरी क्षेत्रों में रहन-सहन महंगा होता है और इसलिए आय सीमा बढ़नी चाहिए।
सरकार तय नहीं करती निजी शिक्षण संस्थानों की फीस, वेतन : रोहित
शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने कहा कि प्रदेश में निजी शिक्षण संस्थानों की फीस और उनमें कार्यरत कर्मचारियों का वेतन तय करने के लिए कोई नीति नहीं बनाई जाएगी। सरकार इसे तय नहीं करती। विधायक केवल सिंह पठानिया के सवाल का लिखित जवाब देते हुए शिक्षा मंत्री ने कहा कि निजी शिक्षण संस्थानों की फीस सरकारी संस्थानों की तरह निर्धारित नहीं की जा सकती। इन्हें सरकार की ओर से कोई वित्तीय सहायता प्राप्त नहीं होती। सरकार का इन संस्थानों पर केवल विनियामक नियंत्रण रहता है। यह नियंत्रण मुख्य रूप से संस्थानों की मान्यता, गुणवत्ता, मानक और न्यूनतम वेतनमान के संदर्भ में होता है।