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Himachal News: सुक्खू बोले- पांच साल तक सोई रही जयराम सरकार, करोड़ों का बजट नहीं किया खर्च

Sat, 23 Dec 2023 10:38 AM IST
Krishan Singh अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला Published by: Krishan Singh Updated Sat, 23 Dec 2023 10:38 AM IST
सार

मुख्यमंत्री ने प्रश्नकाल के दौरान निर्दलीय विधायक होशियार सिंह के सवाल पर पूर्व भाजपा सरकार को घेरते हुए कहा कि इन्हें इस प्रश्न का पता लग गया था, तभी सदन से वाकआउट कर दिया।

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HP Assembly Session: cm Sukhu said Jairam govt slept for five years, budget worth crores was not spent Expendi
मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

विधानसभा के शीत सत्र के चौथे दिन शुक्रवार को मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने सदन में तीखे तेवर दिखाए। उन्होंने कहा कि अपने कार्यकाल के पांच साल तक जयराम सरकार सोई रही। उपलब्ध बजट को खर्च नहीं किया। मुख्यमंत्री ने प्रश्नकाल के दौरान निर्दलीय विधायक होशियार सिंह के सवाल पर पूर्व भाजपा सरकार को घेरते हुए कहा कि इन्हें इस प्रश्न का पता लग गया था, तभी सदन से वाकआउट कर दिया। मुख्यमंत्री ने बताया कि वर्ष 2020-21 में 2320 करोड़ और वर्ष 2021-22 में 2032 करोड़ रुपये खर्च नहीं हुए। इस दौरान प्रदेश में भाजपा की सरकार थी। कुछ फंड कोविडकाल में भारत सरकार की ओर से तय औपचारिकताएं पूरी न करने के चलते नहीं खर्चे गए तो कुछ में विभागों में रिक्तियां होने और अन्य कारण बताए गए।

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सूक्खू ने बताया कि अनुसूचित जाति विकास कार्यक्रम के तहत वर्ष 2020-21 में 408.37 करोड़, 2021-22 में 611.26 करोड़ रुपए खर्च नहीं किए गए। जनजातीय क्षेत्र विकास कार्यक्रम के तहत 2020-21 में 381.65 करोड़, 2021-22 में 373.40 करोड़, श्रम रोजगार एवं प्रशिक्षण के तहत 2020-21 में 117.78 करोड़, 2021-22 में 21.99 करोड़, ग्रामीण विकास विभाग में 2020-21 में 45.03 करोड़ और 2021-22 में 165.51 करोड़ रुपये खर्च नहीं किए गए। वन एवं वन्य प्राणी विभाग में 2020-21 में 68.60 करोड़, 2021-22 में 58.72 करोड़, स्वास्थ्य विभाग में 2020-21 में 465.16 करोड़, 2021-22 में 360.91
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करोड़, शिक्षा विभाग में 2020-21 में 589.28 करोड़, 2021-22 में 348.86 करोड़, पुलिस एवं अन्य संबद्ध विभागों में 2020-21 में 245.05 करोड़, 2021-22 में 91.62 करोड़ रुपये खर्च ही नहीं किए गए।
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मुख्यमंत्री ने कहा कि इनकी डबल इंजन की सरकार ने पैसा खर्च नहीं किया। सरकार के मंत्री भी सोए रहे। स्वास्थ्य प्रणाली पर पैसा खर्च नहीं हुआ। मुख्यमंत्री ने कहा कि भर्तियों के केस हम हाईकोर्ट और सुप्रीमकोर्ट में लड़ रहे हैं। कांग्रेस सरकार उपलब्ध बजट को खर्च कर रही है। हर भविष्य में भी सुनिश्चित करेंगे कि बजट समय से खर्च हो। केंद्र सरकार से भी हम पूरा शेयर लेकर रहेंगे। पूर्व की सरकार ने प्रदेश की हालत खराब कर दी है। हम पुलिस कर्मियों की डाइट मनी को बढ़ाने के भी प्रयास करेंगे। बजट उपलब्ध होते ही इसका प्रावधान किया जाएगा।

एसजेवीएन ने समझौता नहीं किया तो धौलासिद्ध, सुन्नी और लुहरी परियोजना का करेंगे अधिग्रहण
 मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा है कि एसजेवीएन ने अगर तय समय में सरकार से समझौता नहीं किया तो धौलासिद्ध, सुन्नी और लुहरी परियोजना का अधिग्रहण किया जाएगा। शुक्रवार को विधानसभा सदन में ठियोग से कांग्रेस विधायक कुलदीप सिंह राठौर के सवाल पर मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश के हित सर्वोपरि हैं। पूर्व सरकार ने इन तीनों परियोजनाओं से ना लाडा लिया, ना 50 फीसदी जीएसटी। निशुल्क बिजली के तौर पर मिलने वाली रायल्टी को भी कम किया है। पूर्व सरकार ने निगम के साथ इंपलीमेंट एग्रीमेंट भी नहीं किया। राज्य सरकार ने निगम को नोटिस दिया है। अगर निगम ने समझौता नहीं किया तो सरकार तीन परियोजनाओं का अधिग्रहण करेगी।

विधायक कुलदीप सिंह राठौर ने सीएसआर फंड का सही इस्तेमाल नहीं होने का मामला उठाकर जांच कमेटी बनाने की मांग की। उन्होंने कहा कि धूल से फसलों को नुकसान हो रहा है। प्रभावित किसानों और बागवानों को अभी तक मुआवजा राशि भी नहीं दी गई। मलबा फेंकने को लेकर भी मनमानी की जा रही है। सीएसआर के तहत दी जाने वाली राशि की भी जांच होनी चाहिए। निगम की ओर से अपनी मर्जी से धनराशि को आवंटित किया जा रहा है। इस पर मुख्यमंत्री ने कहा कि यह सुनिश्चित किया जाएगा कि स्थानीय विधायक से बात करने के बाद ही सीएसआर का पैसा जारी किया जाए। जांच कमेटी गठित करने को लेकर मुख्यमंत्री ने राठौर से अलग से चर्चा करने का आश्वासन दिया।

जलजीवन मिशन के कार्य तय समय में करेंगे पूरा : मुकेश
 उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने कहा कि जलजीवन मिशन अब पूरा होने की ओर बढ़ रहा है। जिन क्षेत्रों में कार्य अधूरे पड़े हैं, उन्हें तय समय में पूरा किया जाएगा। पूर्व सरकार ने चुनाव जीतने के लिए इस मिशन का गलत प्रयोग किया। इसके बावजूद वह जीत नहीं सके। कांग्रेस सरकार खामियों को दूर कर रही है। नाहन से विधायक अजय सोलंकी ने प्रश्नकाल के दौरान इस मामले को उठाते हुए कहा कि जल जीवन मिशन की योजनाओं का कार्य बहुत धीमी गति से चल रहा है। पूर्व सरकार ने योजनाओं के आवंटन में बंदरबांट की। टेंडरों का कोई पता तक नहीं है। इससे कई जगहों में पानी का संकट गहरा गया है।

जैविक खेती की ओर बढ़ रहा हिमाचल प्रदेश: चंद्र
 कृषि मंत्री चंद्र कुमार ने कहा है कि प्रदेश अब जैविक खेती की ओर बढ़ रहा है। जाइका और आत्मा प्रोजेक्ट से महत्वपूर्ण परिवर्तन लाए जा रहे हैं। 40-50 पंचायतों के क्लस्टर बनाए गए हैं। इस मॉडल को ब्लॉक स्तर तक भी लेकर जाएंगे। मिट्टी की जांच को लेकर विशेष योजना बनाई गई है। विधायक चैतन्य शर्मा के सवाल पर कृषि मंत्री ने यह जानकारी दी। 

केंद्र के फरमान रोक रहे मनरेगा के काम : चंद्रशेखर
 कांग्रेस विधायक चंद्रशेखर ने कहा कि जून, जुलाई और अगस्त के महीने प्रदेश के लिए इस बार दुखदायी रहे। आपदा से निपटने की तैयारी उस एवज में नहीं हो रही है। मनरेगा को लेकर केंद्र सरकार के फरमान काम रोक रहे हैंं। जवाब में ग्रामीण विकास मंत्री अनिरुद्ध सिंह ने कहा कि धर्मपुर सहित प्रदेश के कई क्षेत्रों में मानसून सीजन के दौरान भारी नुकसान हुआ है। धीमी गति से चल रहे कार्यों को स्वयं देखेंगे। 

158 प्राथमिक स्कूलों में एक भी जेबीटी शिक्षक नहीं
प्रदेश के 158 प्राथमिक स्कूलों में एक भी जेबीटी शिक्षक कार्यरत नहीं है। भाजपा विधायक सुरेंद्र शौरी के सवाल का लिखित जवाब देते हुए शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने बताया कि सरकारी स्कूलों में शिक्षक-विद्यार्थी अनुपात का आकलन कर हर स्कूल में सुचारु शिक्षण प्रबंध करने के लिए सरकार प्रयासरत है। जिला बिलासपुर-हमीरपुर में 6-6, चंबा में 31, कांगड़ा में 16, कुल्लू में 15, मंडी में 41, शिमला में 27, सिरमौर में 13 और सोलन में तीन स्कूलों में एक भी जेबीटी शिक्षक नियुक्त नहीं है।

सरकारी डाॅक्टरों को प्राइवेट प्रैक्टिस लाइसेंस देने की मंशा नहीं
स्वास्थ्य मंत्री डॉ. धनीराम शांडिल ने बताया कि सरकारी डाॅक्टरों को प्राइवेट प्रैक्टिस का लाइसेंस देने की सरकार की कोई मंशा नहीं है। भाजपा विधायक जनकराज के सवाल का लिखित जवाब देते हुए स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि गैर प्रैक्टिसिंग भत्ते को मेडिकल डाॅक्टर, दंत चिकित्सा, आयुर्वेदिक चिकित्सा अधिकारियों और पशु चिकित्सकों के लिए भविष्य में होने वाली सभी संभावित नियुक्तियों के लिए अस्वीकार्य किया गया है। इससे राज्य सरकार को प्रतिवर्ष करीब नौ करोड़ रुपये की अनुमानित वित्तीय बचत हो रही है। 

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