HP Assembly: भारी बारिश से नुकसान पर गरमाया सदन, विपक्ष ने सत्र स्थगित करने की उठाई मांग; जानें विस्तार से
मानसून सत्र में गुरुवार को सदन की कार्यवाही शुरू होते ही भाजपा विधायक हंसराज ने पॉइंट ऑफ ऑर्डर के तहत जिला चंबा में आई प्राकृतिक आपदा का मामला उठाया।
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हिमाचल प्रदेश में जारी भारी बारिश से हो रहे नुकसान को लेकर वीरवार को विधानसभा में माहौल गरमाया रहा। विपक्षी सदस्यों ने सत्र को स्थगित करने की मांग उठाई। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू की इस महत्वपूर्ण समय में सदन से गैरमौजूदगी को विपक्ष ने मुद्दा बनाते हुए खूब नारेबाजी की। सरकार ने विपक्ष के सभी आरोपों को नकारते हुए प्राकृतिक आपदा को लेकर राजनीति करने का आरोप लगाया। सत्ता पक्ष और विपक्षी सदस्यों के बीच तीखी नोकझोंक हाेने से बढ़े हंगामे को देखते हुए विधानसभा अध्यक्ष को 15 मिनट के लिए सदन की कार्यवाही स्थगित भी करनी पड़ी।
उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने कहा कि सरकार पूरी तरह से संवेदनशील है। विपक्ष गलत तस्वीर पेश कर रहा। प्रभावित क्षेत्रों में तेजी से राहत कार्य जारी हैं। नेता विपक्ष जयराम ठाकुर सहित विधायक हंसराज और जनकराज ने प्वाइंट ऑफ ऑर्डर के तहत चंबा, कुल्लू-मनाली, कांगड़ा और लाहौल-स्पीति में हुए नुकसान का मामला उठाते हुए सरकार को घेरा। इस पर अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया ने कहा कि विधायक स्थिति का जायजा लेने के लिए अपने क्षेत्रों में जा सकते हैं। किसी पर कोई रोक नहीं है। मामला शांत होते ही पौने बारह बजे प्रश्नकाल शुरू हुआ।
मानूसन सत्र के नौवें दिन वीरवार को सदन की कार्यवाही शुरू होते ही चुराह से भाजपा विधायक हंसराज ने चंबा जिले में भारी बारिश से आपदा का मुद्दा उठाया। कहा कि चुराह, पांगी और अन्य इलाकों में हालात बेहद खराब हैं। साच पास पर डेढ़ फीट तक बर्फबारी हुई है। कई सड़कें बंद हैं और हजारों लोग फंसे हुए हैं। राशन भी उपलब्ध नहीं हो रहा है। हमें चंबा तक पहुंचाने की व्यवस्था होनी चाहिए। विधायक ने मुख्यमंत्री पर सवाल उठाते हुए कहा कि ऐसे हालात में उन्हें प्रदेश में ही रहना चाहिए था। भरमौर से भाजपा विधायक जनक राज ने कहा कि उनके क्षेत्र में 72 घंटों से संचार व्यवस्था ठप है। मणिमहेश यात्रा प्रभावित हुई है और लोग फंसे हुए हैं। सत्र स्थगित कर विधायकों को राहत कार्यों में शामिल होने की अनुमति दी जाए। चंबा के विधायकों को प्रभावित इलाकों तक पहुंचाने के लिए हेलिकाप्टर की व्यवस्था की जाए। विपक्ष के आरोपों का जब उप मुख्यमंत्री जवाब देने लगे तो भाजपा विधायकों ने हंगामा करना शुरू कर दिया। विपक्ष नहीं माना तो विस अध्यक्ष ने सदन की कार्यवाही 15 मिनट के लिए स्थगित कर दी। इस पर विपक्ष के सदस्यों ने खड़े होकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी और सदन से बाहर चले गए।
अध्यक्ष ने भी जताई चिंता, सर्वसम्मति से निर्णय का दिया सुझाव
पठानिया ने कहा कि चंबा और प्रदेश के अन्य जिलों में हालात चिंताजनक हैं। अगर विपक्ष और सरकार दोनों सहमति से सत्र स्थगित करने का निर्णय लें, तो वह इसके लिए तैयार हैं। उन्होंने माना कि पिछले 72 घंटों में भारी नुकसान हुआ है। प्रभावित क्षेत्रों में हालात बेहद खराब हैं।
जयराम ने कहा कि पूरा प्रदेश आपदा की चपेट में है। ऐसे समय में मुख्यमंत्री का दिल्ली और बिहार में होना दुर्भाग्यपूर्ण है। मंडी, कुल्लू और चंबा जिलों में सड़कें टूटी हुई हैं, दूरसंचार संपर्क ठप है और हजारों लोग फंसे हुए हैं। जयराम ठाकुर ने विधानसभा अध्यक्ष से आग्रह किया कि वह अपनी शक्तियों का प्रयोग करते हुए सरकार को राहत और बचाव कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दें।
मुकेश अग्निहोत्री ने कहा कि सरकार आपदा प्रबंधन में जुटी हुई है। यह गलत छवि पेश की जा रही है कि सरकार कुछ नहीं कर रही। बुधवार रात एक बजे पठानकोट-चंबा सड़क खोल दी गई। मणिमहेश यात्रा में फंसे लोगों को रेस्क्यू किया गया है। उन्होंने विपक्ष पर आरोप लगाया कि वह इस संवेदनशील मुद्दे पर सियासत कर रहा है। विपक्ष का यह कहना कि 10,000 लोग फंसे हुए हैं गलत है। 3,000 लोगों को रेस्क्यू भी कर दिया गया है। इसे राजनीतिक रंग न दिया जाए। नेता विपक्ष राजनीतिक पालने में मामले को झूला रहे हैं। सीएम कहां है, ऐसी बात उन्हें नहीं करनी चाहिए।