HP Assembly Session: पहले दिन सारा काम रोककर सरकार आपदा पर चर्चा के लिए तैयार, सदन में तीखी नोकझोंक
हिमाचल प्रदेश विधानसभा का मानसून सत्र सोमवार से से शुरू हो गया है। यह सत्र 18 अगस्त से 2 सितंबर तक चलेगा। इसमें 12 बैठकें होंगी। पहले दिन प्राकृतिक आपदा से हुए नुकसान पर चर्चा करने के लिए नियम तय करने को लेकर दोपहर को विधानसभा सदन में तीखी नोकझोंक हुई।
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हिमाचल विधानसभा के मानसून सत्र के पहले दिन सोमवार को विपक्ष के स्थगन प्रस्ताव पर प्रदेश सरकार सारा काम रोककर आपदा पर चर्चा के लिए तैयार हो गई। स्थगन प्रस्ताव पर सदन में तीखी नोकझोंक के बाद मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा कि वह इसके लिए तैयार हैं, बशर्ते विपक्ष सार्थक चर्चा करे। चर्चा के दौरान उन्होंने नेता प्रतिपक्ष की ओर से उठाए गए सवालों का भी जवाब दिया। नियम-67 के तहत चर्चा की शुरुआत करते हुए विपक्ष के नेता जयराम ठाकुर ने कहा कि कई अपात्र लोगों को भी आपदा राहत बांटी जा रही है। इस पर सीएम ने कहा कि इसकी जांच करवाई जाएगी। आपदा राहत के लिए गलत रिपोर्ट बनाने की भी राजस्व मंत्री से छानबीन करेंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि मंडी के थुनाग में तिरंगे का अपमान करने के आरोपी अगर माफी मांगेंगे तो उन पर दर्ज एफआईआर वापस लेने पर विचार किया जाएगा।
आपदा राहत के लिए पर्याप्त बजट जारी नहीं करने के नेता प्रतिपक्ष के आरोप पर पलटवार करते हुए सीएम सुक्खू ने कहा कि केंद्र से हिमाचल को वांछित आर्थिक मदद नहीं मिली है। उन्होंने विपक्ष से अपील की कि केंद्र से आपदा राहत लेने के लिए वे नई दिल्ली चलें। इस संबंध में प्रधानमंत्री से मिलने चलना है तो उसके लिए भी वह तैयार हैं। उन्होंने कहा कि वह नेता प्रतिपक्ष के क्षेत्र में शेल्टर होम बनाने को तैयार हैं। वह जमीन दिलाने में सहयोग करें। वन अधिकार अधिनियम को बदलने के लिए विपक्ष केंद्र के समक्ष आवाज उठाए, जिससे लोगों को जमीन दी जा सके।
मानसून सत्र के पहले दिन की कार्यवाही सोमवार को दोपहर दो बजे शुरू हुई। विपक्ष ने शोकोद्गार प्रस्ताव पर चर्चा के बाद प्रश्नकाल शुरू नहीं होने दिया। सदन की सारी कार्यवाही रोककर पिछले कुछ समय में प्राकृतिक आपदा से हुए नुकसान पर भाजपा विधायकों ने स्थगन प्रस्ताव दिया और इसे चर्चा के लिए मंजूर करने पर अड़े रहे। शुरू में तो सत्ता पक्ष ने यह कहकर विरोध किया कि इस संबंध में पहले से ही नियम 130 के तहत आधे घंटे के बाद चर्चा प्रस्तावित है, मगर नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर इसे बड़ा मुद्दा बताते हुए नियम 67 के तहत सारा काम रोक कर चर्चा करवाने पर अड़े रहे। सत्ता पक्ष के हल्के-फुल्के विरोध के बाद मुख्यमंत्री इस विषय पर चर्चा के लिए तैयार हो गए।
जयराम ठाकुर ने कहा कि वह नेता प्रतिपक्ष हैं, थुनाग में संचार व्यवस्था ठप हुई तो उन्होंने राज्य सरकार के सबसे बड़े अधिकारी को वॉकी-टॉकी देने को कहा तो उन्होंने यह कहते हुए इन्कार किया कि वह एंटाइटलमेंट नहीं है। मुख्यमंत्री ने कहा कि किस अधिकारी ने उनसे ऐसा कहा, इसका पता करेंगे।