11 दिन पहले पति की मौत, अब छिना आशियाना
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मणिकर्ण घाटी के बलाधी गांव में ढाई मंजिला मकान जलकर राख हो गया। लकड़ी के 16 कमरों वाले मकान में लगी आग से 35 लाख के नुकसान का अनुमान है। दमकल विभाग के कर्मचारियों ने उक्त मकान को नहीं बचा पाए, लेकिन साथ लगते द्रोपदी देवी के मकान को बचा लिया। आग लगने के कारणों का अभी तक पता नहीं चल पाया है।
अग्निशमन विभाग से मिली जानकारी के अनुसार आग वीरवार सुबह 10 बजे लगी। देखते ही देखते आग ने पूरे मकान को अपनी चपेट में ले लिया। उस घर में चार परिवार झली देवी पत्नी दोत राम, हेमराज पुत्र दोत राम, दिनेश कुमार पुत्र दोत राम और सुनीता देवी पुत्री अनूप राम रहते थे। आग लगने के बाद घर में रह रहे परिवार के लोग खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हैं।
उधर, सब फायर ऑफिसर दुर्गादास ने बताया कि बलाधी गांव में ढाई मंजिला मकान जलकर राख हो गया। सड़क से दूर होने के कारण यहां पर फायर की गाड़ी नहीं पहुंच पाई। हालांकि फायर विभाग के कर्मचारियों ने अपनी मेहनत से साथ लगते मकान को जलने से बचा लिया। उन्होंने कहा कि आग से करीब 35 लाख रुपये का नुकसान हुआ है।
11 दिन पहले ही हुई है झली देवी के पति की मौत
मणिकर्ण घाटी के बलाधी गांव में आग लगने से झली देवी का परिवार बेसहारा हो गया है। झली देवी के पति को मरे हुए 11 दिन हुए थे कि उनका आशियाना राख के ढेर में बदल गया। झली देवी अपने दो बेटों के साथ इस मकान में रहती थी। जो उसने बड़ी मेहनत से बनाया था। लकड़ी का यह मकान उसने कुछ वर्ष पूर्व तैयार किया था।
इससे पहले परिवार पर करीब 20 साल पहले कहर टूटा था। जब बलाधी नाले में बादल फटा था। उस दौरान बादल फटने से पूरा मकान बाढ़ की भेंट चढ़ गया था। उसके बाद झली देवी ने बड़ी मेहनत से तिनका-तिनका इकट्ठा कर अपने लिए आशियान बनाया था। अपने आशियाने को जलता देख झली देवी के आंखों से आंसू नहीं रूक रहे हैं। एक ओर पति के मरने का गम दूसरी ओर बेघर होने का जख्म मिला है।