बागवानी: निजी नर्सरियों में विदेशों से आयातित सेब पौधों से वायरस का खतरा
विदेशों से आयात होने वाले फलदार पौधों को एक साल तक क्वारंटीन करना जरूरी होता है। इस दौरान बागवानी वैज्ञानिक इन पौधों पर बराबर निगरानी रखते हैं, ताकि विदेशों से कोई वायरस या बीमारी तो नहीं आ रही।
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हिमाचल में निजी क्षेत्र की नर्सरियों में विदेशों से आयातित सेब पौधों से बगीचों में वायरस आने का खतरा बना हुआ है। प्रदेश में हर साल अमेरिका और इटली से हजारों सेब के पौधे आयात किए जाते हैं। विदेशों से आयात होने वाले फलदार पौधों को एक साल तक क्वारंटीन करना जरूरी होता है। इस दौरान बागवानी वैज्ञानिक इन पौधों पर बराबर निगरानी रखते हैं, ताकि विदेशों से कोई वायरस या बीमारी तो नहीं आ रही।
इसके बाद ही बागवानों को सेब के पौधे बगीचों में लगाने के लिए बेच सकते हैं। हिमाचल सब्जी एवं फल उत्पादक संघ के अध्यक्ष हरीश चौहान कहते हैं कि कई बागवान और निजी कंपनियां अपने स्तर पर सेब के पौधे आयात कर रहे हैं। इन पौधों को क्वारंटीन किए बिना ही बागवानों को बेचकर मोटी कमाई कर रहे हैं। अगर सरकार समय पर कार्रवाई नहीं करती है तो यह प्रदेश के बागवानी क्षेत्र के लिए खतरा बन सकता है। ऐसे लोगों ने विदेशों से पचास हजार पौधे आयात किए हैं और सिर्फ 300 पौधे क्वारंटीन किए हैं।
राज्य के बागवानी निदेशक को भी लिखा पत्र
बताते हैं कि इस गंभीर मसले को लेकर एक पत्र राज्य के बागवानी निदेशक को भी लिखा गया है। इस पत्र में कहा गया है कि विदेशों से आयात किए जा रहे सेब के पौधों से प्रदेश के बगीचों में खतरनाक वायरस और बीमारियां फैलने की आशंका बनी हुई है।
क्या कहते हैं बागवानी निदेशक
प्रदेश के बागवानी निदेशक जेपी शर्मा ने कहा कि ऐसा मामला सामने आया है। इसकी छानबीन की जा रही है। वैसे विदेशों से सेब पौधे आयात करने के लिए बागवानों को मंजूरी लेनी पड़ती है। ये बागवान अपने बगीचों में ही आयातित सेब पौधे लगा सकते हैं। इन पौधों को बेचा नहीं जा सकता। बागवानों को ये पौधे बेचने से पहले सेब के पौधों को केंद्र सरकार की एजेंसी के पास एक साल के लिए क्वारंटीन रखना जरूरी है।
प्रदेश में सिर्फ पांच सौ प्राइवेट नर्सरियां हैं पंजीकृत
प्रदेश सरकार के पास प्रदेश में सिर्फ पांच सौ प्राइवेट नर्सरियां पंजीकृत हैं। इनके अलावा कई बागवान अपने स्तर पर सेब के पौधे विदेशों से आयात करके बेचने का कारोबार करते रहे हैं।
इटली के सेब पौधों की मांग सबसे अधिक
इटली के सेब पौधों की मांग काफी रहती है। इटली से सेब का पौधा 250 रुपये में मिलता है। इसे बागवान साढ़े सात सौ में बेचते हैं। एक कंटेनर में आठ हजार तक पौधे आते हैं। हर साल करीब तीस हजार पौधे आयात किए जाते हैं।
सूबे की मंडियों में बिकने वाले सेब पर विभाग रखेगा निगरानी
हिमाचल प्रदेश की मंडियों में बिकने वाले सेब पर इस साल से सिर्फ बागवानी विभाग निगरानी रखेगा। राज्य से बाहर हर रोज कितना सेब बेचा जा रहा है, यह आंकड़ा भी विभाग को जुटाने के निर्देश दिए गए हैं। पिछली बार हिमाचल प्रदेश मार्केटिंग बोर्ड और विभाग के आंकड़ों में अंतर था। इससे सरकार की किरकिरी भी हुई थी। बताते हैं कि इस सेब सीजन से राज्य के बागवानी विभाग को एजेंसी बनाया गया है, जो प्रदेश में बिक ने वाले सेब पर बराबर निगरानी रखेगा।
इस बार मार्केटिंग बोर्ड के अधिकारियों से कहा गया है कि वह सेब की बिक्री के आंकड़े जारी नहीं करेेंगे। सेब की बिक्री को लेकर जो भी आंकड़ा जारी होगा, यह बागवानी विभाग के अधिकारी ही जारी करेंगे। सरकार ने यह कदम इसलिए उठाया है, ताकि आंकड़ों में कोई भिन्नता न हो। हिमाचल प्रदेश मार्केटिंग बोर्ड के प्रबंध निदेशक नरेश ठाकुर कहते हैं कि इस बार से सेब की मंडियों और बहरी राज्यों में सेब की बिक्री के आंकड़े बागवानी विभाग ही जारी करेगी।